मेक्समूलर और मैकाले का षडयंत्र बनाम आदिवासी दिवस !
Updated: August 4, 2020
भारत पर अपना औपनिवेशिक प्रभुत्व स्थापित कर लेने के बाद ब्रिटिश हूक्मरानों को यह समझ में आ गया कि इस राष्ट्र की शाश्वतता, इसकी संजीवनी शक्ति…
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नई शिक्षा नीति से शिक्षा के माध्यम में परिवर्तन… ?
Updated: August 4, 2020
वेद प्रताप वैदिकनई शिक्षा नीति बनाकर सरकार ने सराहनीय कार्य किया है लेकिन ऐसा करने में उसने छह साल क्यों लगा दिए ? उसके छह…
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सैंकडों वर्षों की दासता के दंश से मुक्त करेगा भव्य राम मंदिर निर्माण
Updated: August 4, 2020
कई सदियों बाद एक ऐसा सपना साकार होने जा रहा है जिसके लिए लाखों लोगों ने अपनी जिंदगियां खपा दीं और लाखों लोगों ने अपने…
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सशक्त भारत का माध्यम बनेगा राम मन्दिर
Updated: August 4, 2020
-ः ललित गर्ग:-मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम मन्दिर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में होना, नये भारत के अभ्युदय की…
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ईश्वर के सत्यस्वरूप और ज्ञान का प्रकाश सर्वप्रथम वेदों द्वारा किया गया”
Updated: August 4, 2020
-मनमोहन कुमार आर्य संसार की अधिकांश जनसंख्या ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करती है। बहुत बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी किसी न किसी रूप में इस…
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श्रीराम जन्मभूमि: देश का मानस एवं विमर्श
Updated: August 4, 2020
कर सारंग साजि कटि भाथा । अरिदल दलन चले रघुनाथा ।। प्रथम किन्ही प्रभु धनुष टंकोरा। रिपु दल बधिर भयहू सुनि सोरा ।। लगभग पाँच सौ वर्षों के सतत, दुधुर्ष व उत्कट संघर्ष के बाद 5 अगस्त को अयोध्या मे रामलला जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की प्रथम शिला रखी जानी है। जो समय के भीतर झांक सकते हैं वे जानते हैं कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तो 6 दिसंबर 1992 के दिन ही प्रारंभ हो गई थी जिस दिन बाबरी ढांचे का कलंक भारत भूमि से हटा था। बाबरी ढांचे से लेकर भव्य निर्माण तक का ये घटनाक्रम और आरोह अवरोह, सब प्रारब्ध है और रामरचित लीला मात्र है। श्रीराम भारत के गुलामी से जकड़े हुये समाज जागरण हेतु जितने बरस स्वयं की जन्मभूमि को आतताइयों के कब्जे मे रहने देना चाहते थे उतने बरस उन्होने रहने दिया। जब श्रीराम का मन किया कि अब लीला को नवस्वरूप देना है और नवविलास करना है तो वे तिरपाल को त्याग कर नए भवन की ओर अग्रसर हो गए हैं। होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥ मैं स्वयं अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि यदि इतिहास मे 6 दिसंबर की वीरोचित घटना नहीं हुई होती तो 9 नवंबर 2019 का विवेकपूर्ण निर्णय भी नहीं हो सकता था। साथ ही यह भी कहना ही होगा कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या मे जितने भी रामभक्त बाबरी विध्वंस मे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित थे उन सभी मे उस दिन रामेश्वरम रामसेतु के निर्माण मे संलग्न देव तुल्य वानरों की आत्मा प्रवेश कर गई थी। गिलहरी, नल, नील, जांबवंत, सुग्रीव, अंगद, हनुमान, सहित भैया लक्ष्मण और श्रीराम वहाँ स्वयं स्वयंसेवक रूप मे उपस्थित थे और एक नए युग के जन्म की कथा का प्रारंभ स्वयं अपने हाथों से लिख रहे थे। गोस्वामी तुलसीदास के इन शब्दों को प्रत्येक स्वयंसेवक कहते हुये आगे बढ़ रहा था – कटि तूनीर पीत पट बाँधें। कर सर धनुष बाम बर काँधें॥पीत जग्य उपबीत सुहाए। नख सिख मंजु महाछबि छाए॥ कमर में तरकस और पीतांबर बाँधे हैं। हाथों में बाण और कंधों पर धनुष तथा पीले यज्ञोपवीत सुशोभित हैं। नख से लेकर शिखा तक सब अंग सुंदर हैं, उन पर महान शोभा छाई हुई है और वे साथ साथ चलते जा रहे हैं। लंका दहन, क्षमा कीजिये बाबरी विध्वंस के बाद देश भर व विश्व मे चले विमर्श के संदर्भ मे कभी किसी प्रसिद्ध लेखक ने लिखा था कि वह विमर्श बड़ा ही भयावह था। समूचे भारतीय व वैश्विक मीडिया ने बड़ा ही अनैतिक, अनर्गल व अनावश्यक प्रलाप किया था। भारतीय सेकुलर विधवा विलाप कर रहे थे और बीबीसी से लेकर न्यूयार्क टाइम्स, मिरर, वाशिंगटन पोस्ट, एकानामिक टाइम्स आदि आदि वही कह रहे थे जो पाकिस्तान का “द डान” कह रहा था। द टाइम मेगज़ीन ने तो लिखा था कि “पवित्र काम भारत मे शांति नष्ट किए दे रहा है।“ टाइम ने उस समय “राम का क्रोध” नाम से भी एक स्टोरी भी प्रकाशित की थी। यूनिवर्सिटी आफ केलिफोर्निया से Ayodhya and the Politics of India’s Secularism: A Double-Standards Discourse जैसा शोध पत्र भी प्रकाशित हुआ था। इस समूचे विमर्श मे एक ही बात पर बल दिया जा रहा था कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ढाँचा गिराए जाने को ग़ैरक़ानूनी घोषित कर दिया है। बाबरी विध्वंस के बाद देश भर मे ऐसे लेखन को प्रायोजित किया गया जो हिंदू समाज मे घनघोर आत्मग्लानि, दुख, कुंठा व खेद का वातावरण तैयार करे। वामपंथी, तथाकथित सेकुलर व कांग्रेस ने भारत मे इस वितंडावादी वातावरण को निर्मित करने हेतु एड़ी चोटी के प्रयास किए। वस्तुतः बाबरी विध्वंस राम काज था, गौरावान्वित कर देने वाला अवसर था, पाँच सौ वर्षों की कुंठा, अवसाद व कलंक को मिटा देने वाला अवसर था। बाबरी विध्वंस पर 6 दिसंबर 1992 से लेकर 9 अक्तूबर 2019 तक न्यायालय द्वारा जितनी भी प्रतिकूल, अनुकूल प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थी उन सभी को इस राष्ट्र के हम हिंदू बंधुओं ने न तो स्मरण करना चाहिए और न ही उन्हें विस्मृत करना चाहिए। मुझे लगता है बाबरी विध्वंस पर हुई तमाम न्यायलीन टिप्पणियों का यथासमय श्माशोधन / न्याय हमारे समाज द्वारा स्वमेव ही कर दिया जाएगा। एक सर्वव्यापी मंथन कभी न कभी होगा जो इस विमर्श के सत्व को स्थापित करेगा। जिस राष्ट्र ने श्रीराम को अपना पूर्वज, अपना कुटुंबपति, अपना पुरोधा, अपना प्रभु, अपना नीतिनियंता और अपना आदर्श माना हो उस समाज मे रामकाज करना प्रत्येक नागरिक का प्रथम कर्तव्य है। निस्संदेह मंदिर निर्माण रामकाज ही है और बाबरी का विध्वंस भी रामकाज ही था। यदि समाज, देश व विश्व यह सोचता है कि अयोध्या मे श्रीराम मंदिर निर्माण ही अंतिम रामकाज है तो वह गलत सोचता है। आप चिंता न करें मैं यहां मथुरा, काशी आदि आदि की बात नहीं कर रहा हूँ। मथुरा काशी अपने आप मे एक सामाजिक कार्य है जो समय आने पर विधिवत अभियान का स्वरूप लेगा; मैं तो यहां यह चर्चा कर रहा हूँ कि ये जो पाँच सौ वर्षों तक हमारे माथे पर कलंक का टीका लगा रहा है वह मंदिर बनने मात्र से समाप्त नहीं होगा। इस कलंक को समाप्त करने हेतु हमें हमारे समाज मे चले पाँच सौ वर्षों के षड्यंत्रकारी व लज्जाधारी विमर्श के विरुद्ध भी एक व्यापक विमर्श खड़ा करना होगा। मंदिर स्थूल है किंतु मंदिर का व्यापक विमर्श एक दिव्य विचार है। हमें इस दिव्य विचार की स्थापना हेतु कार्य करना होगा ताकि हम हमारी आने वाली पीढ़ियों को आत्मग्लानि, कुंठा व खेद के भाव से निकालकर वीरोचित भाव से आत्मविभोर कर पाएँ। आप कल्पना कीजिये कि जिस देश मे नरेंद्र मोदी के पूर्व किसी प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक मंच से जय श्रीराम का उद्घोष ही नहीं किया, उस देश मे राममंदिर के निर्माण हेतु एक प्रधानमंत्री का जाना सतह के नीचे कितनी लहरों को जन्म दे रहा होगा। हम आज यदि लगभग बीते तीन दशकों के बाबरी ढांचा विध्वंस पर हुये विमर्श को जांचे परखे तो लगता है इस विषय पर बहुत दीर्घ, सतत व विस्तृत अध्ययन विमर्श की आवश्यता है। द वीक पत्रिका द्वारा जारी 7 सितंबर, 2003 की रिपोर्ट “ The layers of truth” हो, या आउटलूक इंडिया पत्रिका की “What If…
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मुहूर्त,मोदी जी और अयोध्या
Updated: August 4, 2020
अयोध्या भूमि पूजन के लिए सज चुकी है जैसे त्रेता युग में जब 14 वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्री राम अयोध्या लौटे थे…
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पाँच अगस्त, पाँच सौ वर्षों का संघर्ष और साधना
Updated: August 5, 2020
अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते ।जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥ (वाल्मीकि रामायण)लंका विजयोपरांत लंका के वैभव…
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कोरोना वायरस का हवा से फैलना एक बड़ा खतरा है.
Updated: August 4, 2020
प्रियंका सौरभ आज भारत में कोरोना के मरीज सबसे ज्यादा हो चुके है जो एक बेहद चिंताजनक स्थिति है, हमारे लिए मृत्युदर कम होना ही एक…
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विश्व का एकमात्र ब्रह्माणी माता मंदिर जहाँ होती है देवी की पीठ की पूजा
Updated: August 4, 2020
राजस्थान का इतिहास वीरता , शौर्य और पराक्रम का इतिहास रहा है । वीरता के चरित्र को प्रेरणा देने वाली शक्ति की आराधना यहाँ की…
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अभिजीत मुहूर्त में राम मंदिर निर्माण भूमि पूजन करना कैसा रहेगा ? – शुभ या अशुभ आईये जानें
Updated: August 4, 2020
5 अगस्त 2020 को सनातन हिन्दू धर्म के प्रतीक भगवान राम के मंदिर का भूमि पूजन किया जाएगा। राम मंदिर निर्माण का शुभ मुहूर्त अभिजीत…
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सच्चे मित्र की पहचान
Updated: August 4, 2020
मित्र वहीं जो बुरे वक़्त पर तुम्हारे काम आए।बने सुख दुख का साथी सच्चा मित्र कहलाए।। बन जायेगे सभी मित्र जब दौलत है होती।बने उस…
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