छत्तीसगढ़

खूंटी सामूहिक बलात्कार के पीछे चर्च और नक्सलियों का खतरनाक गठजोड़

– लोकेन्द्र सिंह झारखंड के खूंटी जिले में पाँच महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं से सामूहिक बलात्कार और

शहरी नक्सलियो को बेनकाब करने की जरूरत

नक्सली अपने प्रभाव क्षेत्र में क्रूरतापूर्वक युवतियों का यौनशोषण कर रहे हैं,उन्हें मनमर्जी से उठाकर ले जाते हैं,उन महिलाओं का सामूहिक बलात्कार तक किया जाता है बड़े नक्सली कमांडरों द्वारा,यहां तक कि समय समय पर गर्भपात और जबर्दस्ती नसबंदी जैसे अमानुषी कुकृत्यों को भी अंजाम देने में नक्सली कतई नही हिचकते। नक्सली तमाम ठेकेदारों,आम जनता तथा उद्योगपतियों से अवैध धन उगाही में लिप्त हैं,जो इनका मुख्य धंधा है।जो निर्दोष आदिवासी इनक़े पाशविक कारनामो का विरोध करते हैं उन्हें सरेआम पत्थरो से कुचलकर मार दिया जाता है।अनेक बच्चो को अपहृत कर लिया जाता है, जो आदिवासी मांसाहार न करना चाहे उसे बलपूर्वक गाय तथा मनुष्य तक का मांस खिलाने का पैशाचिक कारनामा ये लोग करते सुनाई देते हैं।

बड़ी अदालत में बड़ा अन्याय

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आप किसी भी भारतीय भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते। हिंदी का भी नहीं। हिंदी राजभाषा है। यह हिंदी और राज दोनों का मजाक है। यदि आप संसद में भारतीय भाषाओं का प्रयोग कर सकते हैं तो सबसे बड़ी अदालत में क्यों नहीं? सबसे बड़ी अदालत में सबसे बड़ा अन्याय है, यह ! देश के सिर्फ चार उच्च न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग हो सकता है- राजस्थान, उप्र, मप्र और बिहार! छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने भी स्वभाषा के प्रयोग की मांग कर रखी है।