व्हिस्की पीने के लिए और पानी लडने के लिए

Posted On by & filed under विविधा

हेमेन्द्र क्शीरसागर व्हिस्की पीने के लिए और पानी लडने के लिए अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन की यह मशहूर कहावत चरितार्थ हो चुकी है। जगह-जगह लोग पानी-पानी के लिए त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहे है। जीने के लिए एक बूंद पानी बमुश्किल से मुनासिब हैं। वहीं व्हिस्की का जगह-जगह पाबंदी के बावजूद मिलना आम बात हो गई है।… Read more »

पानी के लिए हथियार नहीं, हाथ बढ़ाइए

Posted On by & filed under समाज

एक अनुमान के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष 2,600 से 3,500 घन किलो मीटर के बीच जल की वास्तविक खपत है। मनुष्य को जिंदा रहने के लिए प्रतिवर्ष एक घन मीटर पीने का पानी चाहिए, परन्तु समस्त घरेलू कार्यों को मिलाकर प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष 30 घन मीटर जल की आवश्यकता होती है। विश्व जल की खुल खपत 6 फीसदी हिस्सा घरेलू कार्यों में प्रयुक्त होता है। कृषि कार्यों में 73 प्रतिशत जल और उद्योगों में 21 प्रतिशत जल की खपत होती है।

पानी पर विकलांगों का भी अधिकार है

Posted On by & filed under समाज

मोहम्मद अनीस उर रहमान खान   “घर में पानी की पाइप लगी है, लेकिन पानी नहीं आता, परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर चश्मे से पानी लाता हूँ, अम्मी बीमार रहती हैं, छोटी बहन के पैर सूख गए हैं वे सी-टी-ई-वी बीमारी का शिकार है, उसका तो चलना मुश्किल है तो पानी… Read more »

पानी दूर हुआ या हम ?

Posted On by & filed under पर्यावरण, विविधा

ग्लेशियर पिघले। नदियां सिकुङी। आब के कटोरे सूखे। भूजल स्तर तल-वितल सुतल से नीचे गिरकर पाताल तक पहुंच गया। मानसून बरसेगा ही बरसेगा.. अब यह गारंटी भी मौसम के हाथ से निकल गई है। पहले सूखे को लेकर हायतौबा मची, अब बाढ़ की आशंका से कई इलाके परेशान हैं। नौ महीने बाद फिर सूखे को… Read more »

पानी की तलाश में गुम होता बचपन

Posted On by & filed under विविधा

मौ. अनिस उर रहमान खान स्वर्ग रुपी कश्मीर के सीमावर्ती जिले पूंछ की तहसील मेंढर के गांव छतराल के मुहल्ला नक्का की दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली निवासी हसीना नाज़ कहती हैं “सुबह छह बजे पानी लेने झरने पर आते हैं उसके बाद स्कूल जाते हैं, स्कूल से वापस आते ही फिर पानी लेने झरने… Read more »

समवर्ती सूची में पानी

Posted On by & filed under जन-जागरण, विविधा

एक बहस, समवर्ती सूची में पानी (भाग-1) प्यास किसी की प्रतीक्षा नहीं करती। अपने पानी के इंतजाम के लिए हमें भी किसी की प्रतीक्षा नहीं करनी है। हमें अपनी जरूरत के पानी का इंतजाम खुद करना है। देवउठनी ग्यारस का अबूझ सावा आये, तो नये जोहङ, कुण्ड और बावङियां बनाने का मुहूर्त करना है। आखा… Read more »

मयस्सर नहीं पानी किसी के लिए

Posted On by & filed under विविधा

शम्स तमन्ना   इस वर्ष देश के विभिन्न भागों में गर्मी पिछले सारे रिकार्डों को तोड़ती नज़र आ रही है. उत्तर पूर्वी राज्यों को छोड़ दें तो तकरीबन समूचा भारत सूर्य देवता के प्रकोप से झुलस रहा है. सबसे बुरा हाल ओडिशा का है जहाँ अभी से पारा रिकॉर्ड 50 डिग्री (तितलागढ़ में 48.5 डिग्री)… Read more »

चुल्लू भर पानी का सवाल है भई !

Posted On by & filed under समाज

अशोक “प्रवृद्ध” जीव-जन्तु हो या पेड़-पौधे,सबो के जीवन के लिए अत्यन्त ही महत्व की चीज है-जल। जल के अभाव में जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।इसीलिए कहा गया हैकि जल ही जीवन है।वेद,पुराण,उपनिषद,इतिहासादि ग्रन्थों में सर्वत्र जल की महिमा गायी गई है।ग्रीष्म काल में तो जल की महता और भी बढ़ जाती… Read more »

” रहीमन पानी राखिए बिन पानी सब सून “

Posted On by & filed under जन-जागरण, विविधा

अगर रहीमदास के इस दोहे को हम समझ लेते जिसे हमें बचपन में पढ़ाया गया था तो आज न हमारी धरती प्यासी होती न हम ।जल हरियाली और खुशहाली दोनों लाता है। लेकिन आज हमारे देश का अधिकांश हिस्सा पिछले चालीस सालों के सबसे भयावह सूखे की चपेट में है।महाराष्ट्र का मराठवाड़ा आन्ध्र का रायलसीमा… Read more »

सरकारी पानी

Posted On by & filed under लेख, साहित्‍य

बिजली और पानी को बरबाद होते देख मुझे बहुत गुस्सा आता है। मैं इस मामले में कुछ सनकी स्वभाव का हूं। यदि कहीं ऐसा होता दिखे, तो मैं दूसरों को कुछ कहने की बजाय स्वयं ही आगे बढ़कर इन्हें बंद कर देता हूं। कई लोग इसे मेरी मूर्खता कहते हैं। यद्यपि पीठ पीछे वे इसकी… Read more »