प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण

सिर्फ दो लोग जानते हैं कि कौन होगा अगला राष्ट्रपति

हमारे हिंदुस्तान के अगले राष्ट्रपति के लिए उम्मीदवारी किसको दी जाए, उस व्यक्ति के नाम पर सत्ता पक्ष और विरोधी दलों में चर्चा की शुरुआत कोई डेढ़ – दो महीने पहले से ही गई थी। लेकिन पक्ष हो या विपक्ष, जिन नेताओं के बीच चर्चा चल रही है, उन्हें और सहमति बनाने के लिए डगर डगर फिर रहे देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह और नगर विकास मंत्री वेंकैया नायडू को सच में नहीं पता कि सहमति आखिर किसके नाम पर बनानी है। राजनीति का यह सबसे मनोरंजक परिदृश्य है कि देश के आला मंत्री भी नहीं जानते कि उन्हें किसके नाम पर सहमति बनानी है।

कांग्रेस सावधान… कचूमर निकालने निकल पड़े हैं मोदी के ‘हनुमान’ !

आराम न करना अमित शाह का शगल है और निशाना साधे रखना उनकी फितरत। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक सेनापति अमित शाह ने अपने अगले युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है। वे लोकसभा चुनाव में अपना रणनीतिक कौशल साबित कर चुके हैं। और अब यूपी और उत्तराखंड में उनकी रणनीतिक सफलता ने बीजेपी को चमत्कृत कर देनेवाली जीत दिला दी है। मणिपुर और गोवा में भी सरकार बनाने का काम पूरा हो गया है।

बयान पर विवाद या कटु सत्य पर प्रहार

भाजपा सांसद साक्षी महाराज द्वारा यह कहा जाना कि ”चाहे नाम कब्रिस्‍तान हो, चाहे नाम श्‍मशान हो, दाह होना चाहिए। किसी को गाड़ने की आवश्‍यकता नहीं है।” गाड़ने से देश में जगह की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्‍होंने कहा कि ”2-2.5 करोड़ साधु हैं सबकी समाधि लगे, कितनी जमीन जाएगी। 20 करोड़ मुस्लिम हैं सबको कब्र चाहिए हिंदुस्‍तान में जगह कहां मिलेगी।” अगर सबको दफनाते रहे तो देश में खेती के लिए जगह कहां से आएगी, सत्य ही तो है.