राहुल

शायद पार्टी ही कन्फ्यूज है राहुल के भविष्य पर

पहली बार नेता और मुख्यमंत्री बने केजरीवाल की मति पर पड़े भाटे तो समझ में आते हैं किन्तु राजीव गांधी जैसे दूरदर्शी के पुत्र होकर भी ऐसी बचकानी बातें करना अनेक बातों की तरफ़ स्पष्ट इशारा है।पार्टी में पहली पंक्ति के जिम्मेदारों कॊ इस गम्भीर्य कॊ समझने की नितांत आवश्यकता है कि क्या वाकई राहुल में अब भी अच्छे संगठक के गुण हैं..। कहने में कोई गुरेज नही कि नसीब और कर्म से इन्हें भविष्य में जो भी मिले,पर पार्टी कॊ अभी तो नुकसान सामने ही है..

एक जुमले ने निकाली राहुल की किसान यात्रा की हवा

2017 के विधान सभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी किसको मिलेगी, इसके लिये भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच कड़ी टक्कर चल रही है, लेकिन राहुल गांधी अपनी सीएम प्रत्याशी शीला दीक्षित के लिये नही 2019 में स्वयं पीएम बनने का रास्ता साफ करने में लगे रहे। इसी लिये वह सीएम अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बजाये प्रधानमंत्री मोदी पर कहीं ज्यादा हमलावर दिखे। उधर, भाजपा नेता राहुल के हमलावर रूख पर चुटकी लेते हुए कहते रहे कि जो स्वयं कुछ नहीं कर पाया, वह मोदी पर तंज कस रहा है। मोदी को सार्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है।