जम्मू कश्मीर में कौन रह सकता है ?

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कुलदीप चन्द अग्निहोत्री जम्मू कश्मीर में फिर बबाल मच गया है । कश्मीर घाटी उग्र हो रही है । श्रीनगर में रह रहे गिलान वाले सैयद अली गिलानी अत्यन्त ग़ुस्से में है । जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ़्रंट के यासीन मलिक के क्रोध का भी पारावार नहीं है । दोनों मीरवायज, जामा मस्जिद वाले और खानगाह-ए-मौला… Read more »

शर्म उनको मगर नहीं आई?

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-तनवीर जाफरी- ऋषियों-मुनियों, साधू-संतों, पीरों-फकीरों तथा अध्यात्मवादियों की धरती समझा जाने वाला हमारा भारतवर्ष अपनी इसी पहचान के चलते सहस्त्राब्दियों से पूरे विश्व की नज़रों में आदर व सम्मान का पात्र रहा है। भारतवर्ष ने अहिंसा परमो धर्म:, विश्व शांति तथा वसुधैव कुटंबकम का पाठ सारी दुनिया को पढ़ाया । सर्वे भवंतु सुखिन: की आवाज़… Read more »

विभाजन की लकीरें

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-जावेद अनीस- सआदत हसन मंटो ने अपनी मशहूर रचना ‘टोबा टेक सिंह‘ में एक मेंटल हॉस्पिटल का जिक्र करते हुए बताया गया कि सन 47 में सिर्फ हिन्दुस्तान के लोग और ज़मीन नहीं बंटे थे बल्कि मानसिक रोगियों का भी विभाजन हुआ था, दरअसल कहानी में ये मानसिक रोगी तथाकथित होशमंदों के प्रतीक थे.भारतीय उपमहाद्वीप… Read more »

सबका साथ सबका विनाश, भा.(२)

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-डॉ. मधुसूदन– (एक)भा.(१)की प्रतिक्रियाएँ।  आलेख की प्रतिक्रिया में, कुछ विद्वानों के विचार और संदेश आए। एक बड़ा दीर्घ (१० पृष्ठ) अंग्रेज़ी आलेख एक प्रोफेसर ने भी भेजा। शायद यह “विनाश” शब्द की प्रेरणा ही मानता हूँ। अनुभव किया है, कि, संकट के नाम से हमारी  भारतभक्ति विशेष जाग जाती है।  मुझे स्वयं को, उस शीर्षक… Read more »

गौरवशाली है भारत का इतिहास ?

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-सुरेश हिन्दुस्थानी- किसी देश की वास्तविकता जानना हो तो उस देश के महापुरुषों का अध्ययन करने से हमें उस सच का पता चलता है, जो उस देश की मूल अवधारणा में समाहित होता है। लेकिन यह भारत का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि भारत के परम भक्त महाराणा प्रताप पर हमला करने वाले विदेशी आक्रमणकारी… Read more »

हम उस देश के वासी हैं…

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-राकेश कुमार आर्य- भारत के गौरव पर प्रकाश डालते हुए मैक्समूलर ने अपनी पुस्तक ‘इंडिया: व्हाट कैन इज टीच अस’ में लिखा है-‘‘यदि मैं विश्वभर में से उस देश को ढूंढने के लिए चारों दिशाओं में आंखें उठाकर देखूं जिस पर प्रकृति देवी ने अपना संपूर्ण वैभव, पराक्रम तथा सौंदर्य खुले हाथों लुटाकर उसे पृथ्वी का स्वर्ग बना… Read more »

हिन्द और पाक की बातचीत टली

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-डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री- पच्चीस अगस्त को हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच विदेश सचिवों के स्तर की बातचीत होने वाली थी । इस प्रकार की द्विपक्षीय बातचीत दोनों देशों में पिछले कई दशकों से हो रही है । स्तर अलग अलग होता है। कभी प्रधानमंत्री स्तर की तो कभी विदेश मंत्री स्तर की । लेकिन… Read more »

‘हां मैं कहता हूं यह हिन्दू राष्ट्र है’

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-अतुल तारे- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने क्या आज ही कोई नए ऐतिहासिक तथ्य का प्रगटीकरण किया है? संघ अपनी स्थापना काल (1925) के पहले दिन से यह उद्घोषणा कर रहा है और वह यह कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है। संघ पर समय-समय पर आरोप लगते हैं कि संघ की कार्यपद्धति… Read more »

मैं जलता हिंदुस्तान हूं…

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–कुलदीप प्रजापति- मैं जलता हिंदुस्तान हूं, लड़ता, झगता, उबलता, अंगारों सा सुलगता हुआ , फिर भी देश महान हूं, मैं जलता हिंदुस्तान हूं|   आतंकवाद बना दामाद मेरा, भ्र्ष्टाचार ने चुराया चीर मेरा, हो रहा जो हर धमाका, चीर देता दिल मेरा, कहते हैं जब सोने की चिड़ियां, आंख मेरी रोती हैं, क्योंकि मेरी कुछ संतानें इस युग मैं भूखी सोती हैं, कई समस्याओं से झुन्झता मैं निर्बल-बलवान हूँ , मैं जलता हिंदुस्तान हूं|   नारी की जहां होती हैं पूजा , अब वहां वह दर रही , लूट ना ले कोई भेड़िया , इस डर वो ना निकल रही , प्यार के स्थान पैर बाँट रहे अब गोलियां, कहाँ गई मेरे दो बेटों की, प्यार भरी बोलियां, जाति आरक्षण से टूटता और खोता अपना सम्मान हूं, मैं जलता हिंदुस्तान हूं|   हैं बदलती रंग टोपियां , भाषा नहीं बदल रही , राजनीति एक की चड़थी, अब दलदल में वो बदल रही, मर्द अब मुर्दा बना बस खड़ा सब देखता , जिसके हाथों में है लाठी, दस की सौ में बेचता , हर समय, हर जगह झेलता अपमान हूं, मैं जलता हिंदुस्तान हूं|

कभी झंडा… तो कभी ट्रांजिसटर…!

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-तारकेश कुमार ओझा- पाक कला के कुशल कलाकार सब्जियों के छिलकों को मिला कर एक नई सब्जी बना देते हैं, जिसे खाने वाला अंगुलियां तो चाटता ही है, समझ भी नहीं पाता कि उसने कौन सी सब्जी खाई है। इसी तरह मिठाइयों के सृष्टिकर्ता यानी हलवाई बची हुई मिठाइयों के अवशेष से भी एक अलग… Read more »