चिंतन विविधा आओ चलें, जीवन के प्रश्नों का डटकर सामना करें April 22, 2015 / April 22, 2015 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- एक सफल और सार्थक जिंदगी जीने के लिए मनुष्य के पास उन रास्तों का ज्ञान होना बहुत जरूरी है जो उसे अपने लक्ष्य तक पहुंचाते हैं। इन्हीं रास्तों पर आगे बढ़ते हुए हर मनुष्य की ‘सर्व भवन्तु सुखिनः’-सब सुखी हों- यह भावना होनी चाहिए। हम अपने कर्म और वाणी से ऐसा एक भी […] Read more » Featured आओ चलें जीवन जीवन के प्रश्नों का डटकर सामना करें जीवन प्रश्न जीवन संघर्ष
धर्म-अध्यात्म वर्ण और जन्मना जाति व्यवस्था तथा हमारा वर्तमान समाज April 22, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य– उपलब्ध ज्ञान के आधार पर यह ज्ञात होता है कि अमैथुनी सृष्टि के प्रथम दिन ही जगत पिता ईश्वर ने अपनी शाश्वत् प्रजा मनुष्यों के कल्याणार्थ श्रेष्ठ पवित्र आत्माओं जो अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा नामक चार ऋषि कहे जाते हैं, को क्रमशः चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद का ज्ञान […] Read more » Featured महर्षि दयानंद वर्ण और जन्मना जाति व्यवस्था तथा हमारा वर्तमान समाज वर्तमान समाज वेद
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-५० April 22, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment -विपिन किशोर सिन्हा- ढोल-नगाड़ों की ध्वनि मथुरा नगर के बाहर भी पहुंच रही थी। स्नानादि प्रातःकर्मों से निवृत्त होने के पश्चात् श्रीकृष्ण तथा बलराम ने मल्लयुद्ध की रंगभूमि से आ रही नगाड़ों की ध्वनि सुनी। शीघ्र ही तैयार होकर उन्होंने रंगभूमि की ओर प्रस्थान किया। रंगभूमि के विशाल द्वार पर एक विशालकाय हाथी ने भयंकर […] Read more » Featured कृष्ण गोकुल यशोदानंदन-५० श्रीकृष्ण
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द का सन् 1879 में देहरादून आगमन और आर्य समाज April 21, 2015 / April 21, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य- स्वामी दयानन्द ने सन् 1863 में मथुरा में प्रज्ञाचक्षु दण्डी स्वामी गुरू विरजानन्द सरस्वती से विद्या प्राप्त कर गुरू की प्रेरणा व आज्ञा से सत्य के मण्डन व असत्य का खण्डन का कार्य चुना था। उन्होंने अपने अपूर्व ज्ञान व वैदुष्य के कारण वैदिक मान्यताओं को सत्य पाया और अन्य विचारधाराओं को […] Read more » Featured आर्य समाज महर्षि दयानन्द महर्षि दयानन्द का सन् 1879 में देहरादून आगमन और आर्य समाज
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-49 April 21, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment -बिपिन किशोर सिन्हा- श्रीकृष्ण अपने सभी बन्धु-बान्धवों और अनुचरों के साथ मथुरा आए थे। अपने साथ प्रचूर मात्रा में खाद्य-सामग्री भी लाना नहीं भूले थे। शिविर में पहुंचते ही अनुचर सेवा में तत्पर हो गए। उन्होंने दोनों भ्राताओं के पांव पखारे और उत्तम आसन दिए। दाउ के साथ अगले दिन के कार्यक्रम पर विस्तार से […] Read more » Featured कृष्ण यशोदानंदन-49 श्रीकृष्ण
धर्म-अध्यात्म अक्षय तृतीया का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व April 20, 2015 / April 21, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment -मृत्युंजय दीक्षित- 21 अप्रैल पर विशेषः- हिंदू धर्मों में पर्वों की एक महान श्रृंखला है जिसके अंतर्गत वैषाख माह की षुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। अक्षय तृतीया का पर्वों में अद्वितीय स्थान है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मान्यता है कि इसदिन जो भी कार्य मिलते हैं उनका अक्षय […] Read more » Featured अक्षय तृतीया अक्षय तृतीया का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व धार्मिक सांस्कृतिक महत्व
धर्म-अध्यात्म मूर्तिपूजा और ओ३म् जय जगदीश हरे आरती April 20, 2015 / April 21, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on मूर्तिपूजा और ओ३म् जय जगदीश हरे आरती –मनमोहन कुमार आर्य– महर्षि दयानन्द ने वेदों के आधार पर विद्या की नगरी काशी के सभी पण्डित समुदाय को चुनाती दी थी कि मूर्तिपूजा अवैदिक है। वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है। अतः मूर्तिपूजा वेदविहित न होने से कर्तव्य नहीं है। काशी के सभी पण्डित मूर्तिपूजा करते व कराते थे और भक्तों से दान […] Read more » Featured महर्षि दयानन्द मूर्तिपूजा मूर्तिपूजा और ओ३म् जय जगदीश हरे आरती वैदिक
चिंतन यह अपनापन ही तो है ! April 20, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -सुनील एक्सरे- दुनिया में अच्छी घटना बुरी घटना हर पल घटती रहती है ,लेकिन बुरी घटना में ग्रस्त व्यक्ति जब हमारे परिचय का होता है तब हमें दुख होता है किसी क्षेत्र विशेष में जब हमारा कोई अपना सफलता प्राप्त करता है तो हम खुशी से उछल पड़ते हैं। जब किसी अपने की मौत हो […] Read more » Featured जीवन जीवन की घटनाएं यह अपनापन ही तो है !
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-४८ April 20, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment -विपिन किशोर सिन्हा- श्रीकृष्ण ने मुस्कुरा कर अपनी सहमति दे दी। सुदामा ने भांति-भांति के पुष्पों से दो अति सुन्दर मालायें बनाईं और श्रीकृष्ण-बलराम को अपने हाथों से सजाया। उसके घर में जितने पुष्प थे, उसने सबका उपयोग कर ग्वालबालों को पुष्प-हार पहनाये। दोनों भ्राता अत्यन्त प्रसन्न हुए। सुदामा ने प्रभु के चरणों में अविचल […] Read more » Featured कृष्णा गीता यशोदानंदन-४८ श्रीकृष्ण
धर्म-अध्यात्म शूद्रों को ब्राह्मण बनाने वाले परशुराम April 20, 2015 / April 21, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment -प्रमोद भार्गव- -भगवान परशुराम जयंती 21 अप्रैल के अवसर पर- हमारे धर्म ग्रंथ और कथावाचक ब्राह्मण भारत के प्राचीन पराक्रमी नायकों की संहार से परिपूर्ण हिंसक घटनाओं के आख्यान तो खूब सुनाते हैं, लेकिन उनके समाज सुधार से जुड़े जो क्रांतिकारी सरोकार थे, उन्हें लगभग नजरअंदाज कर जाते हैं। विष्णु के दशावतारों में से एक […] Read more » Featured परशुराम परशुराम जयंती ब्राह्मण शूद्र शूद्रों को ब्राह्मण बनाने वाले परशुराम
धर्म-अध्यात्म ‘वैदिक धर्म बनाम् आधुनिक जीवन’ April 20, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य– वैदिक धर्म एक जीवन पद्धति है जो कि आघुनिक जीवन पद्धति से कुछ समानता रखने के साथ कुछ व कई बातों में इसके विपरीत भी है। अतः इन दोनों जीवन पद्धतियों में कौन सी पद्धति मनुष्यों के लिए श्रेयस्कर और श्रेष्ठ है और कौन सी नहीं है, इस पर विचार करना इस […] Read more » ‘वैदिक धर्म बनाम् आधुनिक जीवन’ Featured आधुनिक जीवन वैदिक धर्म
धर्म-अध्यात्म दक्षिण भारत के संत (6 ) संत पुरन्दर दास April 20, 2015 by बी एन गोयल | 1 Comment on दक्षिण भारत के संत (6 ) संत पुरन्दर दास बी एन गोयल युवावस्था में मैं अज्ञानी और अभिमानी था। मेरी इच्छाओं की कोई सीमा नहीं हैं, स्त्रियों के प्रति मेरी इच्छाएं अतृप्त हैं। मेरे प्रभु, मैंने एक बार भी तुम्हें याद नहीं किया मुझे अपना अनुचर बना ले, प्रभु। मुझे मानसिक शांति प्रदान करें मेरे पापों को उसी प्रकार क्षमा करें जैसे […] Read more » दक्षिण भारत के संत संत पुरन्दर दास