जन-जागरण धर्म-अध्यात्म भूगोल में मनुष्य सृष्टि का आदि स्थान एवं अन्य कुछ प्रश्न March 13, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment संसार में मनुष्यों की जनसंख्या लगभग 7 अरब से कुछ अधिक होने का अनुमान है। संसार में देशों की कुल संख्या 195 से अधिक हैं। इन सभी देशों में सबसे पुराना देश भारतवर्ष है जिसका प्राचीन नाम आर्यावर्त है। आर्यावर्त से पूर्व इस देश का अन्य कोई नाम नहीं था। इस आर्यावर्त देश में ही […] Read more » \मनुष्य सृष्टि का आदि स्थान
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-२१ March 13, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment मातु यशोदा! अपनी स्मृतियों पर तनिक जोर डालें। श्रीकृष्ण के शिशु-काल की शरारतों को याद कीजिए। क्या कोई सामान्य बालक ऐसी लीला कर सकता था? जिसे आप सिर्फ अपना पुत्र समझती हैं, वह जगत्पिता है। याद कीजिए – श्रीकृष्ण को ओखल से बांधने में आपको किन-किन अवस्थाओं से गुजरना पड़ा था – मातु यशोदा के […] Read more » यशोदानंदन
धर्म-अध्यात्म यशोदनंदन-२० March 11, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment छः महीनों में ही श्रीकृष्ण घुटनों के बल मकोइया बन पूरे आंगन में विचरण करने लगे। चलते समय वे किलकारी मारना नहीं भूलते थे। भांति-भांति के मणियों से जड़ित समुज्ज्वल आंगन में अपने ही प्रतिबिंब को पकड़ने के लिए इधर से उधर दौड़ लगाते, कभी सिर झुका उसे चूमने का प्रयत्न करते, तो कभी […] Read more » यशोदनंदन-२०
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-१९ March 11, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment श्रीकृष्ण ने अवतरण के प्रथम दिवस से ही अपनी अद्भुत बाललीला आरंभ कर दी थी। वे उन्हीं को अधिक सताते थे, जो उनका सर्वप्रिय था। मातु यशोदा जिसे एक शिशु का सामान्य व्यवहार समझती थीं, वह वास्तव में विशेष लीला थी। छकड़ा टूटने की घटना के पश्चात्, मातु कुछ अधिक ही सजग हो गई […] Read more » yashodanandan 19 यशोदानंदन-१९
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-१८ March 9, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment “देख रहे हैं आर्य! आज मेरा लल्ला तीन मास और एक पक्ष का हो गया है। अत्यन्त स्वाभाविक रूप से उसका विकास हो रहा है। अब मेरा लड्डू गोपाल जांघ पलटकर करवट बदलने लगा है। मैं सौभाग्यवती हुई। चिरंजीवी हो मेरा लाडला! मैं इसके लिए बधाई उत्सव करूंगी।” यशोदा जी के मुख से उत्सव की […] Read more » यशोदानंदन
धर्म-अध्यात्म आओ, ईश्वर की स्तुति और प्रार्थना करें March 7, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ईश्वर समस्त ऐश्वर्यों का स्वामी होने के कारण ही ईश्वर कहलाता है। जीवात्मा अल्पज्ञ, अल्प शक्ति व सामर्थ्यवाला है। अतः बुद्धि, ज्ञान, स्वास्थ्य, बल, शक्ति व ऐश्वर्य आदि के लिए ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना व उपासना करना स्वाभाविक व आवश्यक है। महर्षि दयानन्द के आगमन से पूर्व संसार के लोग ईश्वर से क्या व […] Read more » ईश्वर की स्तुति प्रार्थना
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-१६ March 6, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment पूतना-वध हो चुका था लेकिन कैसे और क्यों हुआ था, सामान्य मनुष्यों की समझ के बाहर था। यह रहस्य स्वयं नन्द बाबा और मातु यशोदा जिनके नेत्रों के समक्ष यह घटना घटी, वे भी नहीं समझ पाए। मरणोपरान्त पूतना का शव अत्यन्त विशाल और विकराल हो गया। प्रासाद के लंबे-चौड़े आंगन के इस सिरे […] Read more » यशोदानंदन-१६
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-१५ March 6, 2015 / March 6, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment नन्द बाबा और मातु यशोदा के नेत्रों से आनन्दाश्रु छलक रहे थे। समस्त गोकुलवासी भी आनन्द-सरिता में गोते लगा रहे थे। जिसे वे एक सामान्य गोप और अपना संगी-साथी समझते थे, वह परब्रह्म है, इसका रहस्योद्घाटन होते ही सभी अतीत में चले गए। कब-कब श्रीकृष्ण के साथ वे झगड़े थे, उसे खेल में हराया […] Read more » यशोदानंदन
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-१४ March 5, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment पुत्र-प्राप्ति के लिए कंस ने नन्द बाबा को बधाई दी, परन्तु जब यह ज्ञात हुआ कि पुत्र का जन्म उसी रात्रि में हुआ था, जिस रात्रि में देवकी ने कन्या को जन्म दिया था, तो उसके माथे पर बल पड़ गए। एक सघन सैन्य अभियान चलाकर उसने मथुरा के सभी नवजात शिशुओं का वध […] Read more » यशोदानंदन
धर्म-अध्यात्म भोले बाबा के त्रिशूल की महिमा March 2, 2015 / March 2, 2015 by सत्यव्रत त्रिपाठी | Leave a Comment आप देश के किसी हिस्से में जाइए। छोटे-छोटे मंदिर हों, गुफा या कंदरा। भोले बाबा का त्रिशूल आपको दिख ही जाएगा। इसकी पूजा-अर्चना भी होती है। दरअसल, त्रिशूल त्रिदेवों में एक, सृष्टि के संहारक महादेव शंकर का अस्त्र है। इसे धारण करने से ही शिव का शूलपाणि भी कहा जाता है। वैसे, त्रिशूल से मतलब […] Read more » त्रिशूल की महिमा
धर्म-अध्यात्म यशोदानंदन-१३ March 2, 2015 / March 2, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment कंस एक क्रूर अधिनायक था। पर साथ ही चतुर और धूर्त राजनीतिज्ञ भी था। मथुरा का वह राजा बन ही गया था। वहां की प्रजा, ऐसा प्रतीत होता था कि एक सांस लेने के बाद दूसरी सांस लेने के लिए कंस की आज्ञा की प्रतीक्षा करती थी। परन्तु उसने अन्य गणराज्यों की शासन-व्यवस्था में सीधे […] Read more » yashodanandan यशोदानंदन
धर्म-अध्यात्म सृष्टि की रचना, संचालन व प्रलय से जुड़े प्रश्नों पर विचार March 2, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment हम पृथिवी पर रहते हैं और इससे जीवन पाते हैं। पृथिवी में ही हम श्वांस लेना आरम्भ करते हैं, जीवन भर लेते हैं और मृत्यु के अवसर पर अन्तिम श्वांस लेकर इस शरीर को छोड़कर अपने कर्मों व प्रारब्ध के अनुसार ईश्वर की व्यवस्था से नया जन्म, योनि व जीवन पाते हैं। हमारी पृथिवी हमारे […] Read more » ‘सृष्टि की रचना संचालन व प्रलय से जुड़े प्रश्नों पर विचार’