कविता क्यो होता है श्रमिको का शोषण ? May 3, 2020 / May 3, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment क्यो होता है श्रमिको का शोषण ?क्यो नहीं मिलता उनको पूरा पोषण ? सारे दिन रात करते वे मजदूरी |फिर भी न मिलती पूरी मजदूरी ||छेनी हथोड़े सारे दिन वे चलाते |हाथो मे उनके छाले पड जाते |तभी पत्थरो को वे रूप दे पाते ||और भगवान का रूप दे पाते |फिर भी मंदिर के बाहर […] Read more » Why are workers exploited क्यो होता है श्रमिको का शोषण ? श्रमिको का शोषण
कविता प्रकृति का संदेश May 2, 2020 / May 2, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment न करो तुम दोहन मेरा ,न करो तुम दूषित मुझको |हे ! मानव मै कोई वायरस नहींप्रकृति का संदेश है तुझको || सदियो से मनमानी करता आया ,मनमुटाव मुझसे करता है आया |जल और वायु जो जीवन उपयोगी ,उनको सदा तू दूषित करता आया || धरा और गगन को तूने न छोड़ा ,उच्चे उच्चे शिखरो […] Read more » the message of nature
कविता बिन ताले के अपने आप को बन्द किए हुए है April 29, 2020 / April 29, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment घर मे अपने आप को बंद किए हुए है | बिन ताले के अपने को बंद किए हुए है || लगता नहीं दिल अपने घर मे | मन मे अनेकों द्व्न्द उठे हुए है || खालीपन मे कविता बाजी करते करते | जो रस अलंकार और छ्ंद लिए हुए है || नर्स डॉक्टर घर से […] Read more » corona lock up Corona virus Lock yourself up without a lock
कविता कोरोना वारियर्स April 29, 2020 / April 29, 2020 by उमेश पंसारी | Leave a Comment वो कर्मयोगी निष्ठा प्रतीक, कर्तव्य की राहों पर निर्भीक, अमर अजर अविनाशी है, वह धड़कन हिन्दुस्तानी है। जग में जब गूंजा हाहाकार, प्रचंड प्रलय लाया विकार, कोरोना से रक्षा हेतु, हुआ घरबंदी का जब विचार, श्वेत रंग के वस्त्रों में, रक्षक बन आया प्राणाधार, डॉक्टर की जो उपाधि है, वह धड़कन हिन्दुस्तानी है। कोरोना की […] Read more » corona warriors कोरोना वारियर्स
कविता हुए पूरे 40 दिन लॉक डाउन के April 29, 2020 / April 29, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment हुए पूरे 40 दिन लॉक डाउन के,हम क्या क्या नहीं कर पाये |चकला बेलन झाड़ू पौछा कर लिये ,क्या बच्चो को नहलाये || बीबी कहती घर में पड़े रहते ,अब बाहर क्यों नहीं जाते ?हम बोले बाहर पुलिस का पहरा है,क्या उनसे पिट कर आते ? कैसा है ये लॉक डाउन ,कही लगा नहीं है […] Read more » 40 days of lock down हुए पूरे 40 दिन लॉक डाउन के
कविता पालघर की धरती पर, संतो के शव बिखरें हैं। April 26, 2020 / April 26, 2020 by सुधीर मौर्य | Leave a Comment निर्दोषों को चोर बताकरचोरों ने मारामारी कीपुलिस मूक हो खड़ी रहीबनकर छवि हत्यारी कीसंतो के करुण क्रंदन पेवो अट्ठाहस कर बिफरें हैंपालघर की धरती परसंतो के शव बिखरें हैं। मद मे इतराना बलखानासब ईश्वर ने ये देखा हैजो भी अत्याचार कियेउन सबका बही मे लेखा हैअसतित्व मिटाने पापों कायम तुम पर अब उतरे हैंपालघर की […] Read more » On the land of Palghar the bodies of saints are scattered. पालघर की धरती पर संतो के शव बिखरें हैं
कविता भोर हो गयी है April 22, 2020 / April 22, 2020 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment विनायक त्यागी भोर हो गयी हैआँखे खोलोपृथ्वी मातासूर्य देव कोकरो सादर प्रणामघर वालों कोसुप्रभात बोलोंजल्दी से उठजाओं लालकरो जीवन मेंनित नये कमालतैयार होकरचलों स्कूलनहीं करनापढाई में कोई भूलपढ़ लिखकरबनना इंसानकरना जीवन मेंसदा अच्छा कामरोशन करनादुनिया मेंपरिवार औरदेश का नाम Read more » भोर हो गयी है
कविता एक कवि के मन की व्यथा April 21, 2020 / April 21, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पड़े पड़े घर में ऊब गया हूँ ,घन चक्कर सा घूम गया हूँ |बाहर जाओ तो पुलिस डाटती है,घर रहो तो बीबी फटकारती है |लिखते लिखते कलम थक गयी है ,बुद्धि भी अब बहुत थक गयी है |हाथो में अब पड गये है छाले ,कागजो के भी पड गये है लाले |अब कही मन नहीं […] Read more » corona men during lockdown poem during lockdown एक कवि के मन की व्यथा
कविता परिंदे और प्रवासी मजदूर April 21, 2020 / April 21, 2020 by कैलाश सत्यार्थी | Leave a Comment कैलाश सत्यार्थी मेरे दरवाज़े के बाहर घना पेड़ था, फल मीठे थे कई परिंदे उस पर गुज़र-बसर करते थे जाने किसकी नज़र लगी या ज़हरीली हो गईं हवाएं बिन मौसम के आया पतझड़ और अचानक बंद खिड़कियां कर, मैं घर में दुबक गया था बाहर देखा बदहवास से भाग रहे थे सारे पक्षी कुछ बूढ़े […] Read more » परिंदे और प्रवासी मजदूर
कविता रूक जाओ अभी अपने घरो में April 20, 2020 / April 20, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रूक जाओ अभी अपने घरो में, देश को राख मत होने दो |पहुँच गयी है संख्या हजारो में,इसे लाखो में मत आने दो || ले लो सबक दुसरे देशो से,जो मृत्यु के कागार पर खड़े हुए |शक्तिशाली होते हुये भी,मृत्यु के आगे लाचार हुये || पता नहीं कोरोना कितने प्राणियों को अपने साथ ले जाएगा […] Read more » रूक जाओ अभी अपने घरो में
कविता धरा हिल गयी April 19, 2020 / April 19, 2020 by बलराम सिंह | Leave a Comment बलराम सिंह युग है आज बवालों का, बे सिर पैर सवालों का। टिक टोक पर जाकर बोलें, क्या करना है भू जब डोले? दे भूकम्प का एक जायज़ा, ले ली खबर हवालों का॥ बे सिर पैर सवालों का … बे सिर पैर सवालों का … मोदी की अब बात चल गयी, कितनों को तो बहुत […] Read more » धरा हिल गयी
कविता लिखता हूँ बार बार उसको मिटा देता हूँ मै, April 19, 2020 / April 19, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चारो तरफ है सन्नाटा ,अब क्या किया जाये ,दिल बहलाने के लिये, अब कुछ लिखा जाये |भेज दू क्या मै जो लिखता हूँ,मै तुम्हारे लिये ,जिससे दिल की बाते,दिल को सुना दिया जाये |\ लिखता हूँ बार बार उसको मिटा देता हूँ मै,हिम्मत नहीं होती है उसको बता दू मै |पता नहीं ये दिल,कमजोर हो […] Read more » लिखता हूँ बार बार उसको मिटा देता हूँ मै