कविता शांति की शुरुआत मुस्कुराते चेहरे से ही होती है September 13, 2022 / September 13, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमुसकुराकर जीना सीख लोकि शांति की शुरुआतमुस्कुराते चेहरे से ही होती है! मुखौटा लगाना छोड़ दोकि रिश्ते की शुरुआतमासूमियत भरे सूरत से ही होती है! धर्म को बीच में आने नहीं दोकि दोस्ती की शुरुआतधर्म नहीं विचार के मिलन से होती है! मजहब को ओढ़ना बिछाना छोड़ दोकि मानवता की सोचमजहबी उन्माद के […] Read more » Peace begins with a smiling face शांति की शुरुआत मुस्कुराते चेहरे से ही होती है
कविता अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी September 10, 2022 / September 10, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment मंजू धपोला कपकोट, बागेश्वर उत्तराखंड अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी। वह चार थे और बेचारी अकेली खड़ी थी।। बेदर्द है जमाना सुना था उसने। लग रहा था वह बेदर्दी देखने वाली थी।। कोमल से हाथो को कस के पकड़ा था उन जालिमों ने। और वो बस दर्द से वह चीख रही […] Read more » अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी
कविता मुखौटा September 9, 2022 / September 9, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment मुखौटों का शहर है यह जनाब !यहाँ चेहरे पर ‘हर कोई सजाए बैठा है हिज़ाब।बड़ी लाजबाव चीज है यहगुण हैं इसके बेहिसाब। चेहरे पर डाल देता है यहएक आकर्षक आवरणअसलियत छिपाने का नहीं कोईइससे बेहतर माध्यम। चेहरे की धूर्तता छिपाते यहबड़ी आसानी सेसजाकर इसको पाखंडी भी लगतेसज्जन-दानी से। किसी के अश्कों को बड़ी संजीदगीसे छिपा […] Read more » मुखौटा
कविता आओ सजाऊँ तुम्हें नटखट नंदलाल September 9, 2022 / September 9, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment श्रृंगार करूँ तिहारा मेरे लड्डू गोपालआओ सजाऊँ तुम्हें नटखट नंदलाल।केसर-चंदन तिलक, लाऊँ मोतियन मालचित हर लेते तुम्हारे ये घुँघराले बाल।श्रृंगार करूँ तिहारा मेरे लड्डू गोपालआओ सजाऊँ तुम्हें नटखट नंदलाल। स्नान कराऊँ सूंदर वस्त्र पहनाऊँशीश पर तेरे मोर-पंख मैं सजाऊँ।गले में पहनाऊँ तुझे वैजयंती हारवारी जाऊँ कान्हा तुझ पर बारंबार।छवि अनोखी तुम्हारी मेरे मोहनसाँवरी सूरत पर […] Read more » let me decorate you naughty Nandlal
कविता धर्म सिखाने की चीज नहीं धर्म सिखाया नहीं जा सकता September 8, 2022 / September 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकधर्म सिखाने की चीज नहींधर्म कभी सिखाया नहीं जा सकतामगर धर्म को सिखा दिया जाताउनके द्वारा जिसने धर्म नहीं सीखाईश्वर खुदा को नहीं जाना परखा! धर्म दिखाने की चीज नहींधर्म कभी दिखाया नहीं जा सकतामगर धर्म को दिखा दिया जातामंदिर मस्जिद गिरजाघर मेंउनके द्वारा जिसने धर्म नहीं देखा! हमसे कहा जाता ईश्वर खुदा […] Read more » Religion cannot be taught religion cannot be taught धर्म सिखाने की चीज नहीं धर्म सिखाया नहीं जा सकता
कविता हिंदी पर है मान मुझे September 6, 2022 / September 6, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment राष्ट्रभाषा हिंदी है हमारी प्यारीसरस-मधुर बोली लगे हमें न्यारी।हर भाषा पर पड़ जाए जो भारीऐसी निराली मातृभाषा है हमारी।गुलाम बन रहे अंग्रेजी के सब आजविदेशी भाषा में करने लगे काज।अंग्रेजी को कितना भी अपना ले समाजपर हिंदी से ही है हमारी लाज।निज गौरव अभिमान है यहहिंदी पर है मान मुझे।फिर से कहती हूँबार-बार सहस्र बार […] Read more » हिंदी पर है मान मुझे
कविता गुरुवर जलते दीप से September 5, 2022 / September 5, 2022 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान।मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।।जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान।गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।।नानक, गौतम, द्रोण सँग, कौटिल्या, संदीप।अपने- अपने दौर के, मानवता के दीप।।चाहत को पर दे यही, स्वप्न करे साकार।शिक्षक अपने ज्ञान से, जीवन देत निखार।।शिक्षक तो अनमोल है, इसको कम […] Read more »
कविता शिक्षक September 5, 2022 / September 5, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment चरण-रज गुरु की मस्तक पर लो लगायजीवनपथ पर चलने की राह यही दिखाय।शिक्षा से अपनी ज्ञान-ज्योति दे सहज जलायउपकार जीवन में इनका कभी न बिसराय।गुरु के समक्ष नहीं है कभी कोई असहायगोविंद से बढ़कर महिमा इनकी कहलाय। प्रथम शिक्षक माँ को शीश झुका करते प्रणामबढ़ती निरंतर आगे कभी यह न करती विश्राम।डाँट-दुलार से रखती हमेशा […] Read more » poem on teacher poem on teachers day शिक्षक
कविता ख्वाहिश September 4, 2022 / September 4, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment ख्वाहिश बस इतनी सी है इस दिल मेंदेश के लिए मिट पाऊँसजाने को मातृभूमि के रक्षक की राहेंपुष्प बनकर बिछ जाऊँ।सर्वस्व बलिदान जन्मभूमि के लिए करकेइस जीवन का मोल चुकाऊँकर गुजरूँ कुछ ऐसा कि चहुंओर अपनीभारत माँ का गौरव बढ़ाऊँ।संभव नहीं देश की माटी का ऋण कभी भीकिसी तरह चुका पाऊँपर किसी मोड़ पर तो […] Read more »
कविता संस्कृति बची है भाषाओं की जननी संस्कृत में ही September 4, 2022 / September 4, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायककुछ चीजें जन्मजात नहीं संस्कार से आतीमगर संस्कार कहां से आता?निश्चय ही संस्कार आता संस्कृति सेऔर संस्कृति बची है भाषाओं की जननी संस्कृत में ही! “मातृवत परदारेषु’पराई नारी को माता समझनाये आज भी है भारत देश की मान्यताबस ट्रेन में खड़ी महिला देखकरसीट से उठ जाना फिर महिला को बिठा देना! ऐसी भावना […] Read more » Culture is left the mother of languages is in Sanskrit only
कविता प्रेम का अनोखा मर्म September 3, 2022 / September 4, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment गोकुल का नंदकिशोर तेरो दीवानो भयोरम्य-रमणीक रूप साँवरे को मोह गयो।पढ़ रहे अब यह नैन नैनों की मूक भाषाप्रेम ने तिहारे बदल दी प्रीत की परिभाषा। Read more » unique meaning of love
कविता मेरी गुंजन September 1, 2022 / September 1, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment नहीं सी प्यारी सी अठखेली तेरीमुझको बड़ा लुभाती-हंसाती है।अपनी मधुर-कोमल मुसकान से तूहमारा घर-आँगन चहकाती है।नन्हीं-नन्हीं पायल की छम-छम तेरीसात सुरों से सुरीले संगीत सुना जाती है।अपने अबोध बालपन से तूमेरा संसार महकाती है।तुतले स्वर में जब तू माँ कहकर बुलाती हैन जाने कितनी संवेदना तू मेरी जगाती है।मेरी गुंजन तू केवल बिटिया नहीं हमारीहम […] Read more » मेरी गुंजन