कविता बादल हटेगा, अँधेरा छँटेगा हम सूरज बन फिर दमकेंगें February 1, 2021 / February 1, 2021 by प्रणय कुमार | Leave a Comment आप जितना रोकेंगेंहम उतना बढेंगेंसनद रहे, हम उतना बढेंगें षड्यंत्रों से कभी संकल्प डिगे हैंबाधाओं से कभी इरादे झुके हैंसत्य के आगे कभी प्रपंच टिके हैंअवरोधों का सीना चीरहम फिर फूटेंगें, बढेंगें, लहलहाएँगेआप जितना रोकेंगेंहम उतना बढेंगेंसनद रहे, हम उतना बढेंगें कल हमसे मनुष्यता अर्थ पाएगीऊँचाई मानक तय करेगीपीड़ित-पददलित जन न्याय पाएँगेंहर बाहरी अँधेरे कोहम […] Read more » बादल हटेगा अँधेरा छँटेगा हम सूरज बन फिर दमकेंगें
कविता मानव का क्लोन बनाने में क्यों नहीं मिल पा रही सफलता? February 1, 2021 / February 1, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकजरा बताओ तो विज्ञानवेत्ता!मानव का क्लोन बनाने में क्यों नहीं मिल पा रही सफलता?क्यों फेल हो जाती जीन-जेनेटिक्स/एक्स-वाई क्रोमोजोम केसद्-असद् गुण सूत्रों को सटा-हटाकरएक सा मनोवांछित मानव बनाने की मंशा? भेड़-बकरी/चूहे-चूजों का क्लोन बनानेवाले जरा बताओ तो विज्ञानवेत्ता!मानव का क्लोन क्यों नहीं बन पाता? कौन सी समस्या है सृष्टिजेता? विज्ञान की भाषा में […] Read more » मानव का क्लोन
कविता दुनिया भर के बच्चे, मां और भाषाएं January 31, 2021 / January 31, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकएक जैसे होते दुनिया भर के बच्चे!एक ही बाल-सुलभ हंसी-रुदन-कौतुकबच्चे चाहे हों अमेरिकी/अफगानी/तालिबानी/ब्रितानी/ईरानी/पाकिस्तानीभारतीय सप्तद्वीप-नौखण्ड में कहीं केएक जैसे होते दुनिया भर के बच्चे! दुनिया भर के बच्चों के,मां की कोख सेनिकलते ही के हूं—के हूं–कहां—कहां? केपहले सबाल में ही छिपी होतीविश्वभर की तमाम मानवीय भाषाएं! जिसे समझ लेती विश्वभर की मांएंदूध उतर आए […] Read more » Children mothers and languages around the world दुनिया भर के बच्चे मां और भाषाएं
कविता हारा-थका किसान ! January 31, 2021 / January 31, 2021 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment बजते घुँघरू बैल के, मानो गाये गीत ! चप्पा चप्पा खिल उठे, पा हलधर की प्रीत !! देता पानी खेत को, जागे सारी रात ! चुनकर कांटे बांटता, फूलों की सौगात !! आंधी खेल बिगाड़ती, मौसम दे अभिशाप ! मेहनत से न भागता, सर्दी हो या ताप!! बदल गया मौसम अहो, हारा-थका किसान ! सूखे […] Read more » हारा-थका किसान
कविता बापू की पुण्यतिथि पर January 31, 2021 / January 31, 2021 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बापु तुम्हारी पुण्यतिथि पर तुमको क्या मै बताऊं,आज तिरंगा रो रहा है किस किस को मै समझाऊं । नाम किसानों का लेकर ये झंडा खालिस्तानी फहराते,शोरगुल व तोड़ फोड़ कर अपनी बाते मनवाते। अब तो तुम्हारे तीनों बंदर भी गूंगे बहरे अंधे हो गए है,सत्य अहिंसा का मार्ग छोड़कर,ये मस्त कलंदर हो गए हैं। शायद […] Read more » बापू की पुण्यतिथि
कविता विदाई January 31, 2021 / January 31, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment आँसुओं के संग जबहोती है ठठोलीमुश्किल है समझनातब नैनों की बोली पिता दिखता है परेशानमाँ लगती है बेचैनबहन दिनभर हँसती हैरोती है सारी रैन भाई की आँखों मेंदिखता है तब ग़म का रेलानिकट आती है जबबहन के विदाई की बेला अजीब-सी घड़ी होती हैजब बजती है शहनाईकिसी से होता है मिलनहोती है किसी से जुदाई […] Read more » विदाई
कविता फिर क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून? January 29, 2021 / January 29, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकनदी-पहाड़-झील-झरने-पौधे और खूनक्या हम बना सकते? भगीरथ से पूछो जिसने बीड़ा उठाया थाएक हरकुलियन टास्क गंगा बनाने कापर क्या बना पाया था उन्होंने एक गंगा? जो हिमालय का वक्ष फोड़करगोमुख तोड़कर, शिलाखंड मोड़करअपने गोद में आबाद करतीइलाहाबाद, बनारस, पटना, भागलपुर जैसेविशाल जन आबादी वाले शहरऔर खो जाती समुद्री गर्भ में! फिर क्यों नहीं […] Read more » क्यों बहाते हो मातृ कोख का खून
कविता जवानी January 29, 2021 / January 29, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment हो जाती है हर किसी सेकोई-ना-कोई नादानीआती है जब जीवन मेंखिलती हुई जवानी मोहब्बत भी लेती हैपहली बार अँगड़ाईछूती है जब प्यार सेजिस्म को तरुणाई पतझड़ का मौसम भीउसे लगता है सावनबहार बनकर आता हैजिस किसी पर यौवन हर पल होता है द्वंद्वदिल और दिमाग़ मेंजब जल रहा होता हैकोई जवानी की आग में ✍️ […] Read more » जवानी
कविता अच्छा इंसान January 28, 2021 / January 28, 2021 by आलोक कौशिक | Leave a Comment किसी देश का फ़ौजी होया हो कहीं का किसानयह ज़रूरी नहीं हैवह होगा अच्छा इंसान पेशे से नहीं बनतीइंसान की परिभाषाहर पुष्प की नहीं होतीएक जैसी अभिलाषा बेइमानों की जहान मेंमुश्किल है पहचानकिंतु सत्य यह भी हैसब नहीं एक समान इंसानियत जिसमें ज़िंदाजो संवेदनहीन नहींनेक हो जिसकी नीयतहै अच्छा इंसान वही Read more » अच्छा इंसान
कविता अल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा January 28, 2021 / January 28, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअल्लाह, ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा,आ मेरे मौला आ, संग-संग होली मना! राधा-कान्हा के संग में तुम भी आज रंग जाआ मेरे मौला आ,संग-संग होली मना! तेरे मिल्लत में हमने ईद की सेवईयां खाई,तुम भी होली उत्सव का थाली भर पुआ खा! अल्लाह,ईश्वर, रब, खुदा खुद एक हो जा!आ मेरे मौला […] Read more » अल्लाह ईश्वर रब
कविता तुम आदमी हो इसलिए आदमी से प्यार नही करते January 27, 2021 / January 27, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम आदमी हो इसलिए आदमी से प्यार नहीं करतेतुम आदमी हो इसलिए आदमी सेआदमी जैसा सद् व्यवहार नही करतेतुम आदमी हो इसलिएआदमी से घृणा और आदमी का संहार करते! तुम आदमी हो इसलिए हो गए कायरबेजुबान पशु पक्षी होते तो जटायु बनकरसीता की बेटियों; निर्भया,प्रियंका,पूजा भारतीऔर तमाम श्रद्धा-हौआ-मरियम मां सदेही कोनवरावण से अपहृत/बलात्कृत/मृत […] Read more » तुम आदमी हो इसलिए आदमी से प्यार नही करते
कविता तुम बेटा नहीं, बेटी ही हो January 26, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —–विनय कुमार विनायकबड़ा कठिन है एक पिता के लिएपुत्र और कन्या में अंतर जान पानाएक किसान की तरह पिता भीनिष्काम भाव से विसर्जित करता है बीजरजस्वला धरती में बिना विचारेकि कौन सा बीज नर है/कौन सा नारायणी! दूर सोरीघर से आती किहूं-किहूं की पुकार काफी हैएक पिता के पितृसुख पाने के लिएपिता; पुत्र या कि […] Read more » तुम बेटा नहीं बेटी ही हो