कविता शिव अराधना July 6, 2020 / July 6, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मिलता है सच्चा सुख केवल,शिव जी तुम्हारे ही चरणों में।रहे कृपा सदा तुम्हारी हम पर,और ध्यान रहे तुम्हारे चरणों में।। चाहे मौत गले का हार बने,चाहे बैरी सारा संसार बने।हम डिगे नहीं सच्चे पथ से,ये जीवन का संस्कार बने।। करे नित्य नियम से तेरी पूजा,कर्तव्यों को समझे तेरी पूजा।करे नहीं किसी का तिरस्कार,तभी सफल होगी […] Read more »
कविता ईट का ज़बाब,पत्थर से देना जानते है July 4, 2020 / July 4, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ईट का ज़बाब,पत्थर से देना जानते है,चीन तेरे घर में,घुस कर मारना जानते है।मत दिखा अपनी हैंकड़ी,चीन अब तू हमें,तेरी हैकडी भी हम निकालना जानते हैं।।++++++++++++++++++++ शौर्य देख चीन दांतो तले,उंगलियां चबा बैठा,पाक भी डरकर,चीन की गोद में जा बैठा।सुन कर गर्जना,छप्पन इंची सीने वाले की, चीन सारी गलवान घाटी खाली कर बैठा।। चीन ज्यादा […] Read more » ईट का ज़बाब पत्थर से देना जानते है
कविता गलवान घाटी July 2, 2020 / July 2, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चीन अनेकों चाल चल रहा है,गलवान घाटी को कब्जाने को।कोई बात न करो उससे अबछोड़ो उसे अब समझाने को।। दो कदम पीछे हटता है वहचार कदम आगे बढ़ जाता हैउसकी नीयत में खोट भरा हैजो चाहता है वह करता है।। बचाव नीति अब छोड़ो तुम,आक्रमक नीति अपनाओ तुम।अगर चार कदम बढ़ता है वोआठ कदम बढ़ […] Read more » Galvan Valley गलवान घाटी
कविता ख़यालों के स्वेटर June 29, 2020 / June 29, 2020 by अभिषेक कुमार अम्बर | Leave a Comment कवि अभिषेक कुमार अम्बर घटाएं आज बढ़ती जा रही हैंदिखाने पर्बतों को रोब अपनाहवाओं को भी साथ अपने लिया है।खड़े हैं तान कर सीने को पर्वतएक दूसरे का हाथ थामेकि अब घेराव पूरा हो गया हैगरजने लग गई है काली बदलीसुनहरे पर्वतों के रंग फीके पढ़ गये हैंमटमैली हुई जाती है उजली उजली पिंडरवही कुछ […] Read more » ख़यालों के स्वेटर
कविता मेरा भारत महान June 29, 2020 / June 29, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मिल जाए लिखी अच्छी बाते,उस पर अम्ल होना चाहिए।भले ही मेरा भारत महान नहीं,उसे हमेशा महान कहना चाहिए।। करना चाहती है वे देह व्यापार,पर उसे वैश्या कहना न चाहिए।अच्छा है उनको फिल्म इंडस्ट्री में,अच्छी हीरोइन बन जाना चाहिए। बोलता रहे झूठ भरी अदालत में,पर उसे सजा न मिलनी चाहिए।अच्छा है किसी शहर में जाकर,बड़ा वकील […] Read more » ”मेरा भारत महान्“
कविता भारत व चीन की फौज June 27, 2020 / June 27, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment भारत की फौज देखकर,चीन अब LAC से हटने लगा है।अभी तो रूस से जहाज आए नहीं,पहले से ही डरने लगा है।। भारत ने अभी कुछ कहा नहीं,चीन अभी से घुटने टेकने लगा है।अभी तो तोपो का मुंह खोला नहीं,अभी से वह डरने लगा है।। भारत ने अभी तोप दागी नहीं,चीन पहले से ही मिम्याने लगा […] Read more » भारत व चीन की फौज
कविता मां बाप और औलाद June 26, 2020 / June 26, 2020 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on मां बाप और औलाद धूप में बाप और चूल्हे पर मां,औलाद के लिए है जलती ।तब कहीं जाकर औलाद मां बाप से है पलती ।। निकाल देती है औलाद जब मां बाप को घर से बाहर।यहीं औलाद बुढ़ापे में मां बाप को है खलती।। औलाद की तरक्की देख कर दुनिया है जलती।मां बाप की दुआए औलाद को हमेशा है […] Read more » मां बाप और औलाद
कविता जर जमीन जोरू ना होते June 24, 2020 / June 24, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जर जमीन जोरू ना होते,इतने लड़ाई झगड़े ना होते।भगवान इनको बनाकर पछतायादुनिया में इतने मसले ना होते।। जरूरत न होती तो इजाद ना होतेइजाद पर इतने खर्च ना होते।अगर दुनिया में दोनों ना होते,हम सब इतने दुखी ना होते।। शादी न होती बच्चे ना होते,बीवी से लड़ाई झगड़े ना होते।बंदा शादी करके है पछताया,शादी के […] Read more » जर जमीन जोरू ना होते
कविता चीन न होता तो कोरोना न होता June 23, 2020 / June 23, 2020 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on चीन न होता तो कोरोना न होता पेट न होता तो ये भूख ना होती,आंखे न होती तो ये शर्म ना होती।अगर ये भगवान ना बनाए होते,किसी से किसी की बात ना होती।। आंखे न होती तो ये आंसू ना होते,दिल न होता तो ये दर्द ना होता।अगर ये भगवान ना बनाए होतेकोई भी किसी का आज ना होता इंसान न होता […] Read more »
कविता पिता दिवस June 21, 2020 / June 21, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पिता परमेश्वर तो नहीं,पर परिवार का तो पालक है।करता है दिन रात परिश्रम,वहीं घर का चालक है।। पिता ही पत्नी का पति है,उससे ही सारे रिश्ते बनते है।चाचा ताऊ नाना मामा,परिवार के रिश्ते इससे बनते है।। पिता ही मां का श्रंगार है,बच्चो का वह संसार कहलाता है।पिता ही घर की छत दीवार है,वह ही सबको […] Read more » पिता दिवस
कविता खेलने खाने दो उनको ! June 21, 2020 / June 21, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment खेलने खाने दो उनको,टहल कर आने दो उनको;ज़रा गुम जाने दो उनको,ढूँढ ख़ुद आने दो उनको ! नहीं कोई कहीं जाता,बना इस विश्व में रहता;स्वार्थ में रम कभी जाता,तभी परमार्थ चख पाता ! प्रयोगी प्रभु उसे करते,जगत बिच स्वयं ले जाते;हनन संस्कार करवाते,ध्यान तब उनका लगवाते ! बाल वत विचर सब चलते,प्रौढ़ होते समय लेते;प्रकृति […] Read more » खेलने खाने दो उनको
कविता बाबूजी का थैला June 20, 2020 / June 20, 2020 by डॉ. सदानंद पॉल | Leave a Comment ■ डॉ. सदानंद पॉल होश सँभालने से अबतक,थैले ढो रहे हैं बाबूजी;बचपन में स्लेट व पोथी लिएथैले ढोये थे बाबूजी;कुछ बड़े हुए, तो उसी थैले मेंटिकोले चुनते थे बाबूजी;उमर बढ़े, उसी थैले में मिट्टी खिलौने भरबेचने, मेले जाते थे बाबूजी;कुम्हारगिरी से गुजारे नहीं, तो दर्ज़ीगिरी लिएउसी थैले में कपड़े लाते थे बाबूजी;फिर टेलीफून भरकर उसी […] Read more » बाबूजी का थैला