कविता प्रकृति पर्यावरण रक्षण भी है ईश्वर की आराधना July 18, 2021 / July 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे मानव! जड़ व चेतन देवता की आराधना करो,सूर्य चन्द्र धरती जल वायु आकाश जड़ देवता हैं,जड़ देवता सृष्टि की रक्षा करते उनको शुद्ध रखो,इन जड़ देवताओं की शुद्धि हेतु यज्ञ-यजन करो! जड़ देवता के संयोग से हीं सृष्टि विकसित होती,सृष्टि संवर्धन हेतु सनातन पथ का संवरण करो! माता-पिता परम पूज्य चेतन देवी […] Read more » Nature protection is also the worship of God
कविता इस्लाम मजहब का उद्भव July 18, 2021 / July 18, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | 1 Comment on इस्लाम मजहब का उद्भव —विनय कुमार विनायकईस्वी सन् पाँच सौ सत्तर में जन्मेइस्लाम के जन्मदाता,हजरत मुहम्मद नाम उनकाघर अरब का मक्का! उनकी जाति कुरैशी थी अशिक्षित,अंधविश्वासी, मूर्ति पूजक कबिलाईकाबा के चौकोर प्रस्तर पूजन मेंनिहित थी उनकी भलाई! हज़रत मुहम्मद थे एक युग द्रष्टा,अपनी जाति-धर्म का सुधारकर्ता! उन्होंने ‘ला इलाह इल्लल्लाह’‘एको ब्रह्म दूजा नास्ति’ जैसाएक ईश्वर के सिवा कोई नहीं […] Read more » Origin of Islam religion इस्लाम मजहब का उद्भव
पर्यावरण लेख इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाए…. July 18, 2021 / July 18, 2021 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री Read more » सुंदर लाल बहुगुणा
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लेख जय जगदीश हरे आरति के रचयिता पण्डित श्रद्धाराम फिल्लौरी July 16, 2021 / July 16, 2021 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव भारतवर्ष ही नहीं अपितु देश-दुनिया में कई देशों के सनातन धर्मावलम्बियों, वैष्णवों, साधु-संतों व ईश्वर के प्रति उत्कट प्रेम करने वाले भक्तों के हृदयों को पण्डित श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा सन 1870 में 32 वर्ष की आयु में रचित आरति ’’ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे, भक्तजनों के संकट क्षण में […] Read more » पण्डित श्रद्धाराम फिल्लौरी
कविता बत्तियां गुल हैं July 16, 2021 / July 16, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment जल पड़ी ।सब और फ़ैलाने उजाला चल पड़ी ।डूबते वालों को तिनका मिल गया ।मन कमल सूखा हुआ था खिल गया। ढूंढ ली माचिस तुरत चिमनी जलाई। Read more » the lights are off बत्तियां गुल हैं
पर्यावरण लेख ग्लोबल वार्मिंग बढ़ा रही आकाशीय बिजली की तीव्रता और आवृत्ति July 16, 2021 / July 16, 2021 by निशान्त | Leave a Comment हाल ही में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) से कम से कम 74 लोगों की मौत हो गई। इनमें से 42 मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं, जिसमें प्रयागराज 16 मौतों के साथ चार्ट में सबसे ऊपर था। जयपुर के पास आमेर किले में बिजली गिरने से […] Read more » The intensity and frequency of lightning is increasing global warming आकाशीय बिजली की तीव्रता और आवृत्ति
महिला-जगत लेख समाज बेटी बोझ नहीं, बेटी बरक्कत का सबब July 16, 2021 / July 16, 2021 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमारमन के अंधियारे को दूर करने के लिए एक दीपक जलाना जरूरी होता है. और जब भारतीय समाज बेटी की बात करता है तो उसके मन में एक किस्म की निराशा और अवसाद होता है. बेटी यानि परिवार के लिए बोझ. यह किसी एक प्रदेश, एक शहर या एक समाज की कहानी नहीं है […] Read more » -लाडली लक्ष्मी योजना Daughter is not a burden daughter is the cause of prosperity बेटी बरक्कत का सबब
लेख सार्थक पहल स्टार्टअप के जरिए रोजगार सृजन कर रहे हैं युवा July 15, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सौम्या ज्योत्सना मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार हमेशा नये कदम उठाती है ताकि युवा अपना रोज़गार का सृजन स्वयं कर सकें। शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए भी केंद्र सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना की शुरुआत भी की थी ताकि वह अपने स्किल को […] Read more » स्टार्टअप के जरिए रोजगार सृजन
कविता मृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह July 14, 2021 / July 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह हींजीवित देह जीव के लिए दृश्यमान स्थिति,जबकि मृत्यु एक अदृश्य अवस्था है! लंबी उम्र जीनेवाले व्यक्ति कोअपने रक्त रिश्तेदारों की मौत कादारुण दुख झेलना व सहना पड़ता है! जबकि अल्प उम्र में मरने वालों की भीकम नहीं होती है भयानक मृत्यु की त्रासदी! जीवन मृत्यु के […] Read more » death is a state like life मृत्यु एक अवस्था है जीवन की तरह
कविता है कहर बाहर July 14, 2021 / July 14, 2021 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment क्यों घरों को छोड़कर बाहर निकलते।है कहर बाहर नहीं फिर क्यों संभलते। सड़क गलियों से अभी तक प्यार क्यों है।मिल रहीं बीमारियाँ जब राह चलते। हो गए बीमार तो फिर क्या करोगे?रोओगे रह जाओगे फिर हाथ मलते। भीड़ में जाना मुनासिब जब नहीं है,क्यों नहीं यह बात अब तक भी समझते। मास्क बांधो और छह […] Read more » है कहर बाहर
महिला-जगत लेख महिलाओं पर सवाल उठाने से पहले स्वयं में झांकने की ज़रूरत July 14, 2021 / July 14, 2021 by सोनम लववंशी | Leave a Comment एक तरफ हम चांद और मंगल पर जीवन बसाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। तो वही दूसरी तरफ हमारे समाज का एक बड़ा तबका महिलाओं के ‘ड्रेसकोड’ में ही उलझा हुआ है। अब हम इक्कीसवीं सदी में भले पहुँच गए हो, लेकिन महिलाओं के कपड़ो को लेकर राजनीति आम हो चली है और हो भी […] Read more » Before questioning women you need to look within yourself. महिलाओं पर सवाल उठाने से पहले
कविता तुम क्यों नहीं बनते विषपायी July 14, 2021 / July 14, 2021 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकतुम क्यों नहीं बनते विषपायी?सबके हिस्से का अमृत पी लेतेऔर दूसरों को गरल पिलाते हो,किन्तु बनते नहीं हो विषपायी! सृष्टि के सारे अवदान को तुम,निज गेह में छुपा लिया करते,बन जाते भोला-भाला तमाशाई,किन्तु बनते नहीं हो विषपायी! जब भी तुमको अवसर मिला,सबकुछ झपट लिया करते हो,दीन हीन की नही करते भलाई,किन्तु बनते नहीं […] Read more » why don't you become venomous तुम क्यों नहीं बनते विषपायी