कविता प्रकृति क्यों बदला लेती है ? April 10, 2019 / April 10, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment घनघोर घटायें घिर रही,घन भी घडघडाहट कर रहे |दामिनी दम दम दमक रही,ये दिन को रात कर रहे || ओलावृष्टि भी हो रही,धरती भी सफेद चादर ओढ़ रही |चारो और हाहाकार मचा,कैसी भू पर अनावृष्टि हो रही || चारो तरफ जीवन अस्त-वयस्त है,बिजली भी चली गयी |चारो तरफ अँधेरा छा गया ये कैसी हालत हमारी […] Read more »
लेख मराठा साम्राज्य के जनक छत्रपति शिवाजी महाराज April 10, 2019 / April 10, 2019 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अध्याय 1 राकेश कुमार आर्य शिवाजी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के देदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिनकी दीप्ति से भारत का समकालीन इतिहास आज भी दीप्तिमान है । शिवाजी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनके नाम से आज भी इस देश के युवा प्रेरणा लेते हैं । ऐसे महानायक को कुछ षड्यंत्रकारी इतिहासकारों ने बहुत ही संकीर्ण दृष्टिकोण से […] Read more » chatrapati shivaji maharaj shivaji maharaj छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य
कविता माँ ! अम्बे कैसे उतारू तेरी आरती ? April 8, 2019 / April 8, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment माँ ! अम्बे कैसे उतारू तेरी आरती ?जब संकट में पड़ी है मेरी माँ भारती || चारो तरफ जब चुनाव माहौल बना हुआ है |उजाले में भी चारो ओर अँधेरा बना हुआ है ||ये नेता जब कोरा झूठ बोल रहे है |वोटरों को हर तरह से ये छोल रहे है ||इनका कोई धर्म ईमान न […] Read more »
कविता नवरात्र में माँ फिर आईं हैं April 8, 2019 / April 8, 2019 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment नवरात्र में माँ फिर आईं हैं प्रकृति ने भी धरती सजाई है शाखों पर नए पत्ते शर्मा रहे हैं पेड़ों पर नए पुष्प इठला रहे है खेतों में नई फसलें लहलहा रही हैं चिड़ियाँ चहक रही हैं कोयल गा रही है सम्पूर्ण सृष्टि स्वागत गान गा रही है हे शक्ति की देवी समृद्धि की देवी […] Read more » chaiti navratra maa durga in chaitra maas नवरात्र
कविता नववर्ष मंगलमय हो ! April 3, 2019 / April 3, 2019 by आलोक पाण्डेय | Leave a Comment सत्य सनातन सभ्यता के रक्षक , हे उन्नत विचारों वाले , क्रुर , दु:सह दु:ख – जड़ता का विध्वंसक , हे उन्मत्त ! सुधारों वाले ! सत्यता की मलिन दशा क्यों हो गयी है आज , बन्धु लूटे खूब बान्धव को , है नहीं बची कुछ लाज ! लूट रही संपदा विविध , सर्वत्र लगी […] Read more » नववर्ष
लेख जलालशाह और मीरबाकी द्वारा कपटपूर्ण ढ़ंग से मस्ज्दि का निर्माण April 3, 2019 / April 3, 2019 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment राम जन्मभूमि मन्दिर का सच्चा इतिहासडा. राधेश्याम द्विवेदीवैदिक नगर वास्तु-परम्परा कालिदास के रघुवंश में चतुर्मुखी तोरण-धारिणी ब्रह्मा के रूप में प्राप्त है। ब्रिटिश और मुसलमानी अभिलेखों में भी इस स्थान को ‘रामजन्मभूमि’ या ‘जन्मभूमि’ या जन्मस्थान के रूप में उल्लेख है। इस स्थान के विवादित ढाँचे की रचना पूर्वकालिक विष्णु-हरि मन्दिर के ध्वंसावशेष का प्रयोग […] Read more » Babri Masjid ramjanambhoomi कपटपूर्ण ढ़ंग से मस्ज्दि का निर्माण जलालशाह मीरबाकी म जन्मभूमि मन्दिर का सच्चा इतिहास राम जन्मभूमि मन्दिर
लेख साहित्य यह सुधार समझौतों वाली मुझको भाती नहीं ठिठोली April 3, 2019 / April 3, 2019 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर विशेष(4 अप्रैल,1989) -प्रो. संजय द्विवेदी पं.माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसा नाम हैं, जिसे छोड़कर हम पूरे नहीं हो सकते। उनकी संपूर्ण जीवनयात्रा,आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ने वाले की यात्रा है। रचना और संघर्ष की भावभूमि पर समृद्ध हुयी उनकी लेखनी में अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध […] Read more » Makhan lal Pandit Makhan lal chaturvedi Pandit Makhan lal chaturvedi university of journalism पं.माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी पत्रकारिता माखनलाल जी
व्यंग्य चोरी का राष्ट्रीय उद्यम April 2, 2019 / April 2, 2019 by मोहन कुमार झा | Leave a Comment एक समय था जब चोरी करना या चोरी होना बहुत बड़ी घटना होती थी। मेरे गांव में जब चोरी होती थी तो महीनों तक चर्चा चलती रहती। जिस घर चोरी होती थी अक्सर उस घर की कोई बूढ़ी अपने बुढ़े मुंह से कई दिनों तक सुबह-शाम, दिन-दोपहर चोरों को दिव्य श्राप दिया करती। ये श्राप […] Read more » चोरी चोरी का राष्ट्रीय उद्यम
कविता बुरा मत मानिए कि देखिए इलेक्शन है।। April 2, 2019 / April 2, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment बुरा मत मानिए कि देखिए इलेक्शन है।। बदले है भेष और करते हैं द्वेष, मगर आते ही चुनाव बढ़ जाता परफेक्शन है। आशीष जो देते नही छूने लगे हैं पैर, बुरा मत मानिए कि देखिए इलेक्शन है।। जनता की जेब खाली उनकी गाड़ी ए०सी० वाली, एकाउन्ट में इनके तो अरबों का कलेक्शन है। मरने के […] Read more » इलेक्शन
कविता चुनाव का बाजार लगा हुआ है | April 2, 2019 / April 2, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment चुनाव का बाजार लगा हुआ है | देखो ! ये कितना सजा हुआ है || चारो तरफ पोस्टर लगे हुये है | बैनर और झंडे भी लगे हुये है || कोई नहीं यहाँ दुकान व सामान | बिक रहा है यहाँ धर्म व इमान || वोट व वोटर की कीमत यहाँ लगती | झूठे आश्वानो […] Read more » election market marketing in election चुनाव चुनाव का बाजार
व्यंग्य ‘अब जूते के दिन फिरे हैं April 1, 2019 / April 1, 2019 by मोहन कुमार झा | 1 Comment on ‘अब जूते के दिन फिरे हैं मोहन कुमार झा एक कहावत है कि हर किसी के दिन फिरते हैं। ‘अब जूते के दिन फिरे हैं।’ रामकथा में वर्णित है कि जब श्रीरामचन्द्र किसी प्रकार से वापस अयोध्या लौटने को तैयार नहीं हुए तो भरत जी ने अपने अग्रज भ्राता से उनकी “चरण पादुक” मांग ली और उसको राजसिंहासन पर रखकर चौदह […] Read more » जूते के दिन
कविता हर हर मोदी घर घर मोदी,मच रहा चारो तरफ शोर | April 1, 2019 / April 1, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment हर हर मोदी घर घर मोदी,मच रहा चारो तरफ शोर |राहुल भैया शोर मचा रहे ,देश का चोकीदार है चोर || कौन है चोर कौन है चोकीदार,ये तो समय ही बतायेगा |23 मई को जब रिजल्ट आयेगा,सबको पता चल जायेगा || जनता को मत बेवकूफ समझो,वह सब कुछ जानती है |बहुत दिनों तक बेवकूफ बनाया,वह […] Read more » मच रहा चारो तरफ शोर हर हर मोदी घर घर मोदी