कविता साहित्य प्रतिभाओ को मत काटो, आरक्षण की तलवारो से April 3, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on प्रतिभाओ को मत काटो, आरक्षण की तलवारो से राजपूत भी मचल उठेंगे,भुजबल के हथियारों से प्रतिभाओ को काटो आरक्षण की तलवारो से निर्धन ब्राह्मण वंश,एक दिन परशुराम बन जायेगा अपने घर के दीपक से,अपना घर ही जल जायेगा भडक उठा अगर गृह युद्ध,भूकम्प भयानक आयेगा आरक्षण वादी नेताओ का,सर्वस्व मिटाके जायेगा अभी सभंल जाओ मित्रो,इस स्वार्थ भरे प्यार से प्रतिभाओ को मत काटो,आरक्षण […] Read more » Featured आरक्षण की तलवार प्रतिभाओ से मत काटो
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-82 April 3, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य    गीता का सोलहवां अध्याय गीता के 15वें अध्याय में प्रकृति, जीव तथा परमेश्वर का वर्णन किया गया है तो 16वें अध्याय में अब श्रीकृष्णजी मनुष्यों में पाई जाने वाली दैवी और आसुरी प्रकृतियों का वर्णन करने लगे हैं। इन प्रकृतियों के आधार पर मानव समाज को दैवीय मानव समाज […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-81 April 3, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य  गीता का पन्द्रहवां अध्याय गीता में ईश्वर का वर्णन गीता का मत है कि सूर्य में जो हमें तेज दिखायी देता है वह ईश्वर का ही तेज है। ‘गीताकार’ का कथन है कि जो तेज चन्द्रमा में और अग्नि में विद्यमान है, वह मेरा ही तेज है, ऐसा जान। किसी कवि […] Read more » Featured geeta karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग
लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-80 March 31, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का पंद्रहवां अध्याय और विश्व समाज जो लोग अपनी ज्ञान रूपी खडग़ से या तलवार से संसार वृक्ष की जड़ों को काट लेते हैं और विषयों के विशाल भ्रमचक्र से मुक्त हो जाते हैं- उनके लिए गीता कहती है कि ऐसे लोग अभिमान और मोह से मुक्त हो गये […] Read more » Featured karmayoga of geeta आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का पंद्रहवां अध्याय विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-79 March 31, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का पंद्रहवां अध्याय और विश्व समाज यह जो प्रकृति निर्मित भौतिक संसार हमें दिखायी देता है-यह नाशवान है। इसका नाश होना निश्चित है। यही कारण है कि गीता के पन्द्रहवें अध्याय में प्रकृति को ‘क्षर’ कहा गया है। इससे जो कुछ बनता है वह क्षरण को प्राप्त होता है। […] Read more » Featured आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का पंद्रहवां अध्याय विश्व समाज
कविता साहित्य पुन्य के नाम पर ढकोसले पर असली पुन्य क्या है समझो ? March 31, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment घर में माँ-बाप को झिडकी देते फिर भी वे तुमको आशीर्वाद देते मंदिर में मूर्ति के आगे गिड़गिड़ाते मूक है वे कुछ बोल नहीं पाते मंदिर के बाहर भिखारी खड़े है मंदिर के अंदर भक्त खड़े है फर्क है केवल तुम दोनों में भिखारी तुमसे,तुम भगवान से दोनों ही माँगने के लिए खड़े है ठण्ड […] Read more » ढकोसले
कविता अनेको ग्रह इस ब्रहमांड में March 31, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment अनेको ग्रह इस ब्रहमांड में,तब भी आपस में मिलकर रहते है इस पृथ्वी ग्रह के प्राणी,क्यों आपस में लड़ते झगड़ते है आपस में ये एक दूजे की परिक्रमा भी करते रहते है नहीं किसी से टकराते अपने रास्ते पर चलते रहते है नहीं शांति इस भू के प्राणी को,एटम बम बनाने में लगे हुए अपना […] Read more » ब्रहमांड
कविता साहित्य देखा नहीं अभी तक तुमको March 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment देखा नहीं अभी तक तुमको पर रोज तुमको याद करते तुम में क्या कशिश है जो रोज तुमको याद करते देखा नहीं हाथ अभी तुम्हारा पर उसकी रेखा हम पढ़ लेते स्पर्श नहीं किया बदन को पर उसकी सुगंध सूंघ लेते है कोई पूर्व जन्म का बंधन जो हम रोज ऐसा करते ये है दो […] Read more » देखा नहीं अभी तक तुमको
कविता मै बड़ा भई,मै बड़ा March 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मै बड़ा भई,मै बड़ा सब कहते है मै बड़ा इसी बात को लेकर देवताओ में युद्ध छिड़ा पहले सबसे पावन गंगा बोली, मै तो सबके पापो को धोती अपने जल से निर्मल बनाती गंगोत्री से गंगा सागर तक जाती उनके पापो को अपने संग ले जाती इसलिय मै तो सबसे बड़ी मेरे आगे कोई नही […] Read more » Featured मै बड़ा भई
कविता सुकुमार सी मोहन हँसी ! March 30, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment सुकुमार सी मोहन हँसी, है श्याम सखि जब दे चली; वसुधा की मृदुता मधुरता, उनके हृदय थी बस चली ! करि कृतार्थ परमार्थ चित, हो समाहित संयत विधृत; वह सौम्य आत्मा प्रमित गति, दे साधना की सुभग द्युति ! है झलक अप्रतिम दे गई, पलकों से मुस्काए गई; संवित सुशोभित मन रही, चेतन चितेरी च्युत रही ! भूलत न भोले कृष्ण मन, वह सहजपन अभिनव थिरन; बृह्मत्व की जैसे किरण, विकिरण किए रहती धरणि ! वह धवलता सुकुमारिता, ब्रज वालिका की गहनता; हर आत्म की सहभागिता, ‘मधु’ के प्रभु की ज्यों खुशी ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » Featured सुकुमार सी मोहन हँसी !
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-78 March 29, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य   गीता का चौदहवां अध्याय और विश्व समाज क्या है त्रिगुणातीत? जब श्रीकृष्णजी ने त्रिगुणों की चर्चा की और लगभग त्रिगुणातीत बनकर आत्म विजय के मार्ग को अपनाकर जीवन को उन्नत बनाने का प्रस्ताव अर्जुन के सामने रखा तो अर्जुन की जिज्ञासा मुखरित हो उठी। उसने अन्त:प्रेरणा से प्रेरित होकर श्रीकृष्णजी […] Read more » Featured आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का कर्मयोग और आज का विश्व त्रिगुणातीत विश्व समाज
लेख साहित्य गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-77 March 29, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गीता का चौदहवां अध्याय और विश्व समाज मलीन बस्तियों में रहने वाले लोगों को हमें उनके भाग्य भरोसे भी नहीं छोडऩा चाहिए। उनके उत्थान व कल्याण के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कार्य होते रहने चाहिएं। उनके विषय में हमने जो कुछ कहा है वह उनकी दयनीय अवस्था को ज्यों […] Read more » Featured आज का विश्व गीता गीता का कर्मयोग गीता का चौदहवां अध्याय विश्व समाज