व्यंग्य हास्य व्यंग्य : षष्टिपूर्ति बनाम शोक सभा November 9, 2010 / December 20, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य व्यंग्य : षष्टिपूर्ति बनाम शोक सभा – पं. सुरेश नीरव और साहब बेचारे प्रेमीजी आखिर बाकायदा सठिया ही गए। मतलब ये हुआ कि जीवन के पूरे साठ पतझड़ झेलकर भी वे अभी तक नाटआउट हैं। लोग खुश हैं कि इतनी दरिद्रता भोगने के बाद भी प्रेमीजी मरे नहीं हैं। वे कुछ दिन और कष्ट भोगें उनकी यही अखंड अमंगल कामनाएं हैं। […] Read more » vyangya व्यंग्य
कविता बैठ कुऐं की मुंडेर पे November 8, 2010 / December 20, 2011 by संजय कुमार फरवाहा | 3 Comments on बैठ कुऐं की मुंडेर पे सहेली आ बैठ मेरे पास मनं की दो बातें कर लूँ फीर भर के घड़ा पानी का अपने घर को चल दूँ सहेली आ बैठ मेरे पास मनं की दो बातें कर लूँ फीर भर के घड़ा पानी का अपने घर को चल दूँ सुबह से सोच रही थी कब , भरने पानी मैं जाऊं […] Read more » Sit बैठ
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य : माल बनाम इज्जत – इज्जत बनाम माल November 8, 2010 / December 20, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | Leave a Comment एक समय था हमारे देश में, जब लोग इज्जतदार हुआ करते थे। आजकल लोग मालदार होते हैं। इज्जत उन्हें बतौर गिफ्ट-हैंपर माल के साथ फ्री मिल जाती है। इसलिए लोग अब माल के पीछे भागते हैं। इज्जत के पीछे नहीं। आज के चलन में जब बेचारी इज्जत खुद ही पीछे रह गई हो तो उसके […] Read more » vyangya पंडित सुरेश नीरव हास्य-व्यंग्य
व्यंग्य गठन मुर्दा-संसाधन मंत्रालय का.. November 6, 2010 / December 20, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on गठन मुर्दा-संसाधन मंत्रालय का.. पंडित सुरेश नीरव इंडिया को विकसित देशों की कतार में जल्दी-से जल्दी कैसे लाया जाए,इस विषय पर अभी हाल में ही एक पांच सितारा चिंतन गोष्ठी आयोजित की गई। दो-दो-तीन-तीन पीढ़ियों से देशसेवा में लगे राष्ट्र सेवा के अभ्यासी परिवारों के रोशन चिराग अपनी खानदानी परंपरा के अनुसार स्वदेश प्रेम की भावना से लैस होकर […] Read more » Ministry मंत्रालय
कविता कविता: आ भैया तुझे तिलक लगाऊ November 6, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता: आ भैया तुझे तिलक लगाऊ भाई दूज का पावन पर्व मैं मनाऊं सनेह भरी अभिव्यक्ति देकर तेरी खुशहाली के मंगल गीत मैं गाऊ आ भैया तुझे तिलक लगाऊं कितना पावन दिन यह आया जिसने भाई बहन को फिर से मिलाया मनं मैं बहती स्नेह की गंगा ख़ुशी के अश्रुँ को मैं कैसे छुपाऊं आ भैया तुझे तिलक लगाऊ भाई दूज […] Read more » bhai dooj भैया दूज
कविता कविता: जब तिमिर बढ़ने लगे तो November 4, 2010 / December 20, 2011 by गिरीश पंकज | 9 Comments on कविता: जब तिमिर बढ़ने लगे तो जब तिमिर बढ़ने लगे तो दीप को जलना पड़ेगा दैत्य हुंकारें अगर तो देव को हँसना पड़ेगा दीप है मिट्टी का लेकिन हौसला इस्पात-सा हमको भी इसके अनोखे रूप में ढलना पड़ेगा रौशनी के गीत गायें हम सभी मिल कर यहाँ प्यार की गंगा बहाने प्यार से बहना पड़ेगा सूर्य-चन्दा हैं सभी के रौशनी सबके […] Read more » Diwali दीपावली
कविता कविता : चलो अरुंधती राय बन जाएँ November 4, 2010 / December 20, 2011 by शिखा वार्ष्णेय | 15 Comments on कविता : चलो अरुंधती राय बन जाएँ -शिखा वार्ष्णेय भूखे नंगों का देश है भारत, खोखली महाशक्ति है , कश्मीर से अलग हो जाना चाहिए उसे .और भी ना जाने क्या क्या विष वमन…पर क्या ये विष वमन अपने ही नागरिक द्वारा भारत के अलावा कोई और देश बर्दाश्त करता ? क्या भारत जैसे लोकतंत्र को गाली देने वाले कहीं भी किसी […] Read more » kashmir अरुधंती राय कश्मीर
व्यंग्य हास्य-व्यंग्य/उल्लुं शरणं गच्छामि November 4, 2010 / December 20, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on हास्य-व्यंग्य/उल्लुं शरणं गच्छामि -पंडित सुरेश नीरव जी हां जनाब बात ही है ये रोने की। कि ऐसी लागी नजर कुटिल जादू-टोने की। कि हमारा देश जो कभी चिड़या थी सोने की,उसे डकार गया उल्लू राजनीति का और अब दूर-दूर तक दिखाई नहीं पड़ती, उस सुनहरी चिड़िया की निशानी। अब तो गांव,शहर, प्रदेश में,संपूर्ण देश के परिवेश में भाजपा,सपा,बसपा […] Read more » Owl उल्लू
साहित्य अंग्रेजी में संस्कृत स्रोत November 4, 2010 / December 20, 2011 by डॉ. मधुसूदन | 4 Comments on अंग्रेजी में संस्कृत स्रोत -डॉ. मधुसूदन ‘सप्तांबर, अष्टांबर, नवाम्बर, दशाम्बर’ आपके मनमें, कभी प्रश्न उठा होगा कि अंग्रेज़ी महीनों के नाम जैसे कि, सप्टेम्बर, ऑक्टोबर, नोह्वेम्बर, डिसेम्बर कहीं, संस्कृत सप्ताम्बर, अष्टाम्बर, नवाम्बर, दशाम्बर जैसे शुद्ध संस्कृत रूपोंसे मिलते क्यों प्रतीत होते हैं? विश्व की और विशेषतः युरप की भाषाओं में संस्कृत शब्दों के स्रोत माने जाते हैं। इस विषय […] Read more » English अंग्रेजी कैलेंडर संस्कृत
साहित्य मियाँ कबीर, तुम क्यों रोने लगे? November 3, 2010 / December 20, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | Leave a Comment -जगदीश्वर चतुर्वेदी मेरे एक दोस्त हैं सीताराम सिंह वे हमारे साथ जेएनयू में पढ़ते थे,वे रूसी भाषा में थे और मैं हिन्दी में था। वे स्वभाव से बागी और बेहद क्रिएटिव हैं। अभी फेसबुक पर मिले और बोले कि पुरूषोत्तम अग्रवाल की किताब पढ़ रहा हूँ कबीर पर। मुझे उनकी बात पढ़कर एक बात याद […] Read more » Kabir कबीर पुरुषोत्तम अग्रवाल
कविता एंड्रीनी रिच की चार कविताएं November 2, 2010 / December 20, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment 1. जीत भीतरी तहों में कुछ पसर रहा है, हमसे अनकहा त्वचा के अंदर भी उसकी उपस्थिति अघोषित है जीवन के समस्त रूप-प्रत्यय नाटकीय स्वार्थों की सघन झाड़ियों में उलझे मशीनी देवताओं से संवाद नहीं करना चाहते, स्पष्टत: कटे-छँटे शरणार्थी प्राचीन या अनित्य ग्रामों से हमारे अवसरवादी चाहनाओं में फँसे पगलाकर ढूँढ़ रहे हैं एक […] Read more » poem एंड्रीनी रिच
कविता मधुसूदनजी की कविता: मास्को में बारिश, मुंबई में छाता November 2, 2010 / December 20, 2011 by डॉ. मधुसूदन | 5 Comments on मधुसूदनजी की कविता: मास्को में बारिश, मुंबई में छाता बिन बादल, बिन बरसात, बिना धूप, सर पर छाता! एक लाल मित्र मुम्बई में मिले। पूछा, भाई छाता क्यों, पकडे हो? बारिश तो है नहीं? तो बोले, वाह जी, मुम्बई में बारिश हो, या ना हो, क्या फर्क? मास्को में तो, बारिश हो रही है। १० साल बाद। जब मास्को से भी कम्युनिज़्म निष्कासित है। […] Read more » communism कम्युनिज्म वामपंथ