Category: राजनीति

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भारत को अमेरिका बनाने के संकल्प का सत्य

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अमेरिका के कारोबारी दिग्गजों को संबोधित करते हुए मोदी ने भरोसा दिलाना चाहा कि भारत आर्थिक सुधारों की राह पर चल रहा है और भारत में निवेश करना तथा व्यापार करना पहले से कहीं आसान हो गया है, इसलिए भारत में पूंजी लगाने में वे तनिक न हिचकें। आर्थिक सुधारों की दिशा में अपनी सरकार के नए व बड़े कदम के रूप में उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी की चर्चा की। इसी के साथ उन्होंने भारत-अमेरिका का व्यापार कुछ ही बरसों में कई गुना बढ़ जाने की उम्मीद जताई। मोदी की इस अमेरिका यात्रा की अहमियत जाहिर है और इसे संभावनाभरा भी माना जा रहा है।

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भारत-अमेरिका के नए दौर के संबंध

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प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के पहले ही भारत को दो मोर्चों पर बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। दोनों को लेकर भारत सरकार लंबे समय से राजनयिक स्तर पर अमेरिका पर दबाव बना रही थी। जिसमें कि पहला यह कि अमेरिका ने भारत को 22 अमेरिकी ‘गार्जियन ड्रोन’ के सौदे को मंजूरी दे दी है। ये ड्रोन अभी सिर्फ अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है, जिसेकि प्राप्‍त करने के लिए भारत लम्‍बे समय से प्रयासरत था। इस सौदे को लेकर ट्रंप के पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन ने वादा भी किया था। किंतु अपने कार्यकाल के दौरान ओबामा अपना किया वादा पूरा नहीं कर पाए थे जो अब जाकर ट्रम्‍प काल में पूरा होने जा रहा है।

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राष्ट्रपति चुनावों में अब राम बनाम मीरा का मुकाबला

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 कोविंद की सबसे बड़ी विशेषता यह भी है कि वह बेहद सरल स्वभाव के मिलनसार और खुले दिल वाले तथा संविधान विशेषज्ञ भी है। भाजपा ने कोविंद को  राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर यह साबित कर दिया है कि अब भाजपा में उन्हीं लोगों का नाम आगे आया करेगा जो कि मीडिया की चर्चा से कोसों दूर रहा करेंगे । राष्ट्रपति पद के लिए मीडिया में तरह- तरह के नामों की चर्चा चल रही थी लेकिन पीरएम मोदी ने आखिरकार सभी को चौंका कर रख दिया।

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कोविंद अगर गुमनाम हैं, तो जिम्मेदार कौन है?

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अब हम सब जान चुके हैं कि रामनाथ कोविंद बिहार के राज्यपाल हैं। दो बार के राज्यसभा सांसद रह चुके कोविंद पहले उच्चतम न्यायालय में वकालत करते थे और पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के सहयोगी रह चुके हैं। वह पहले आईआईएम कोलकाता के बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। आजकल वो अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी हैं, जिसके अपने सरोकार होते हैं जो मीडिया-सोशल मीडिया के लोगों को ज्यादातर नहीं दिखते या वो देखना नहीं चाहते। यहां सवाल यह उठता है कि इतना सक्रिय राजनीतिक और सामाजिक जीवन होने के बावजूद वो हमें दिखाई क्यों नहीं दिए या ऐसे कहें कि हमारी मीडिया ने उन्हें क्यों नहीं दिखाया?

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कोविन्द को नीतीश के समर्थन से विपक्ष मौन

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विपक्षी राजनीतिक दलों में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर असहज की स्थिति पैदा हो गई है। जिस प्रकार एक एक करके विपक्षी दल राजग प्रत्याशी के समर्थन में आते जा रहे हैं। उससे यह तो तय हो ही गया है कि अब रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति बनना लगभग तय हो गया है। इसको तय करवाने में एक प्रकार से विपक्षी दलों का भी योगदान माना जा सकता है, क्योंकि रामनाथ कोविंद का नाम जैसे ही राजग की ओर से घोषित किया, वैसे ही विपक्ष और मीडिया ने उनको दलित कहना प्रचारित कर दिया, जिसका लाभ राजग को मिल रहा है।

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भाजपाई सोशल इंजीनियरिंग के शिल्प: कोविंद

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भारत में राष्ट्रपति चुनावों में प्रत्याशियों के चयन का बेहद उजला व प्रतिष्ठाजनक इतिहास रहा है तो वहीँ दूसरी ओर ग्यानी जैलसिंह व प्रतिभा पाटिल जैसे नाम भी रहें हैं जिन्होनें राष्ट्रपति भवन की गरिमा को दीर्घकालीन चोटिल किया है. ज्ञानी जैलसिंह सिंह ने तो सार्वजनिक रूप से कह दिया था कि मैं सार्वजनिक रूप से इंदिरा गांधी की चप्पलें भी उठा सकता हूँ. ठीक इसी भातिं प्रतिभा ताई पाटिल की सबसे बड़ी योग्यता “गांधी परिवार की वफादारी” मात्र ही थी.

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