टेक्नोलॉजी समाज निगरानी प्रौद्योगिकी April 5, 2018 / April 6, 2018 by गंगानन्द झा | 2 Comments on निगरानी प्रौद्योगिकी एक प्रसिद्ध उक्ति है, “ जिस व्यक्ति को एकान्तता (Privacy) के प्रति सम्मान नहीं हो वह बर्वर होता है तथा जो अपने आचरण में गोपनीयता(secrecy) बनाए रखे वह खतरनाक होता है।“ अभी के सन्दर्भ में यह उक्ति प्रासंगिक हो गई है क्योंकि संकेत स्पष्ट हैं कि हमारे लिए एकान्तता और गोपनीयता बनाए रखना शायद मुमकिन […] Read more » Featured आधार इन्टरनेट कार्ड मोबाइल कैमरा डिजिटल तस्वीरें मोबाइल सोशल साइट्स
समाज शिक्षा अब रंजीता के रास्ते में बाधा है March 31, 2018 / March 31, 2018 by गौहर आसिफ | Leave a Comment गौहर आसिफ छत्तीसगढ के सरगुजा जिले के अम्बिकापुर ब्लाॅक के असोला गांव की रंजीता मुंडा ने जीवन के 30 बसंत देखे हैं। रंजीता ने कक्षा छह तक की शिक्षा हासिल की है। रंजीता विवाहित हैं व परिवार में कुल छह सदस्य हैं। इनका मायका अम्बिकापुर ब्लाक के वार्ड नमना का है। शादी के बाद रंजीता […] Read more » Education is now obstructing the path of Ranjita शिक्षा
समाज असंगठित विकास से श्रीनगर की स्थिरता को खतरा March 31, 2018 / March 31, 2018 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment अफ़साना रशीद धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर धीरे-धीरे अपनी खूबसूरती खोता जा रहा है। सालों भर पर्यटकों से गुलज़ार रहने वाले इस शहर की चमक फीकी होती जा रही है। इसके पीछे प्रकृति का कोई बदलाव नहीं बल्कि विकास के नाम पर समाज की बढ़ती महत्वाकांक्षा है। श्रीनगर को […] Read more » Featured Srinagar Threat to the stability unorganized development श्रीनगर
समाज खाध्य और खेती में चुनौंतियाँ सतत विकास के लक्ष्य में बाधा March 31, 2018 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment भारत डोगरा 2030 तक कृषि उत्पादन एवं आय को बढाने और भूख की भयावता को दूर करने के सतत विकास का लक्ष्य प्रशंसनीय है। लेकिन 12 वर्षों में इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत को बड़े पैमाने पर नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता है। यदि हम सतत विकास लक्ष्यों की अतिरिक्त आवश्यकताओं को ध्यान में […] Read more » drought farming challenges inhibit the goal sustainable development खाध्य खाध्य और खेती में चुनौंतियाँ
समाज पैरेण्टिंग( परवरिश) March 29, 2018 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गङ्गानन्द झा अमेरिकी शिक्षाविद एवम् बच्चों की कहानों के लेखक केट विगिन(1856-1923) की उक्ति है, “इस संसार में जन्मा हर बच्चा विधाता का एक नया विचार है, एक सतत अम्लान एवम् दीप्तिमान सम्भावना।” जरूरत है कि माँ-बाप विधाता के विचार की सांकेतिक लिपि को समझने की निष्ठा रख पाएँ ताकि वे उसके विकास में सार्थक […] Read more » Featured पैरेण्टिंग
शख्सियत समाज सरल नहीं है उपासने हो जाना March 28, 2018 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार एक पत्रकार से एक सम्पादक हो जाना बहुत कठिन नहीं है लेकिन एक सम्पादक से किसी महनीय विश्वविद्यालय का कुलपति हो जाना मुश्किल सा था. और इस मुश्किल को बड़ी ही सहजता से जिसने पाया उसका नाम है जगदीश उपासने. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति बनाये जाने पर […] Read more » Featured Jagdish Upasne उपासने जगदीश उपासने भोपाल माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
समाज ॥न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः॥ भा. (२) March 28, 2018 by डॉ. मधुसूदन | 5 Comments on ॥न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः॥ भा. (२) डॉ. मधुसूदन वृद्ध जनों का योगदान: भा. (२) भाग (१) से आगे– सारांश: *आदर्श परिवार का हरेक सदस्य अपनी न्य़ूनतम आवश्यकता के अनुपात में ले, और अपनी सर्वाधिक सामर्थ्य के अनुपात में योगदान करे.* *अंग्रेज़ी में, From each according his/her capacity to each according to his/her needs.* *अनुभवों के विश्वविद्यालय में पढी हुई ये नाना-दादा […] Read more » Featured वृद्ध जन वृद्ध जनों का योगदान
समाज दुनिया को बचाना है तो बच्चों को बचाइए March 27, 2018 by अनिल पांडेय | Leave a Comment अनिल पांडेय इक्कीसवीं सदी में विकास और आधुनिकता के तमाम दावों के बावजूद बच्चे सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं। जबकि दुनिया का भविष्य इन्हीं के कंधों पर है। बच्चों के लिए एक ऐसी दुनिया का निर्माण होना चाहिए जहां हर बच्चा आजादी के साथ एक गरिमापूर्ण जीवन जी सके। स्वतंत्र, सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित होकर बच्चों […] Read more » 100 मिलियन फॉर 100 मिलियन child labour Featured save the children save the world कैलाश सत्यार्थी दुनिया को बचाना है बच्चों को बचाइए बाल हिंसा लॉरीअट्स एंड लीडर्स सम्मिट फॉर चिल्ड्रेन
समाज न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः॥ March 22, 2018 by डॉ. मधुसूदन | 1 Comment on न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः॥ डॉ. मधुसूदन वृद्ध जनों का योगदान: भा. (१) डॉ. मधुसूदन सूचना: इसआलेख को *वे न दुखडा गाएंगे, न तुम अनुमान कर पाओगे* आलेख के बाद पढें. सारांश: * कोई प्रेम से चाय पिलाता है, तो चाय से अधिक पिलानेवाले का प्रेम व्यक्त होता है. मनुष्य जितना प्रेम का भूखा है; उतना उस चाय का नहीं.* […] Read more » Featured the contribution of old persons in our life वृद्ध जनों का योगदान
समाज जोखिमभरा बचपन सभ्य समाज की त्रासदी March 22, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- इक्कीसवीं सदी का सफर करते हुए तमाम तरह के विकास के वायदें तब खोखले साबित हो रहे हैं जब हम अपने बचपन को उपेक्षित होते एवं कई तरह के खतरों से जूझते देखते हैं। निश्चित रूप से यह चिंताजनक है और हमारी विकास-नीतियों पर सवाल भी उठाती है। बड़ा सवाल तो तब खड़ा […] Read more » child labour Civil Society The Tragedy of Childhood जोखिमभरा बचपन सभ्य समाज की त्रासदी
समाज पहचान और श्रम मूल्य के संकट से जूझती घरेलू कामगार महिलायें March 19, 2018 by उपासना बेहार | Leave a Comment उपासना बेहार घरेलू काम दुनिया के सबसे पुराने रोजगार के साधनों में से एक रहा है। सूखा, खेती में हानि, रोजगार के विकल्प का ना होना, विकास के नाम पर जमीन का अधिगृहण, विस्थापन, दलित वर्ग का उत्पीड़न, चिकित्सा, पानी इत्यादि मूलभूत सुविधाओं का अभाव जैसे विभिन्न कारणों के चलते गाँव से लोग शहर की ओर पलायन करने को मजबूर हो जाते […] Read more » Featured घरेलू कामगार महिलायें
समाज बकरी दीदी क्यों कहलाती हैं ये महिलाएं? March 18, 2018 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment उषा राय बकरियों की तीसरी बड़ी आबादी बिहार राज्य में पाई जाती है, यहां की कई महिलाएं पशु सखी और बकरी दीदी के नाम से भी प्रसिद्ध है, जो बकरी पालन के द्वारा अपने जीवन स्तर में सुधार ला रही हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की अधिकतर महिलाएं बकरी पालन के गुणों को सीख कर बकरियों की […] Read more » बकरी पालन