शख्सियत समाज पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस आर रंगानाथन August 14, 2016 / August 14, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी डॉ. यस आर रंगनाथन का प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा:- रंगनाथन का जन्म 12 अगस्त 1892 को शियाली, मद्रास वर्तमान चेन्नई मे हुआ था। रंगनाथ की शिक्षा शियाली के हिन्दू हाई स्कूल, मद्रास क्रिश्चयन कॉलेज मे (जहां उन्होने 1913 और 1916 मे गणित में बी ए और एम ए की उपाधि प्राप्त की) […] Read more » Dr. S. R. Ranganathan Featured डॉ. एस आर रंगानाथन पुस्तकालय विज्ञान पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस आर रंगानाथन
जन-जागरण टेक्नोलॉजी विविधा समाज सावधान ! शायद आप सेल्फीटिस की चपेट में हैं ? August 12, 2016 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment स्व-जागृति : बीती सदियों में जब इंसान सार्थक ज्ञान के सन्निकट पहुँच जाता था तो वह संसारिक झंझावातों से दूर हटकर स्वयं में लीन हो जाता था । जिसे सनातन धर्म में समाधि, जैन धर्म में कैवल्य और बौद्ध धर्म में निर्वाण कहा जाता है । मुख्यतः यह योग का अन्तिम पड़ाव होता है जिसमें […] Read more » Featured taking too much selfie सेल्फीटिस
शख्सियत समाज वीरता और साहस की मिसाल वीरांगना अवंतीबाई August 12, 2016 / August 12, 2016 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी जी की 185वीं जन्म-जयंती 16 अगस्त 2016 पर विशेष) भारत में पुरुषों के साथ आर्य ललनाओं ने भी देश, राज्य और धर्म, संस्कृति की रक्षा के लिए आवश्यकता पडने पर अपने प्राणों की बाजी लगाईं है। गोंडंवाने की रानी दुर्गावती और झाँसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई के चरण चिन्हों का अनुकरण […] Read more » Featured अवंतीबाई वीरांगना अवंतिबाई लोधी
जन-जागरण पर्व - त्यौहार समाज कहां गये वो लोग ? August 12, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य देश अपने 70वें स्वतंत्रता दिवस के रंग में रंग गया है। सचमुच यह पावन पर्व हमें अपने स्वतंत्रता सैनानियों और अमर बलिदानियों के उद्यम और पुरूषार्थ का स्मरण कराकर अपने देश के प्रति समर्पित भाव से जीने के लिए प्रेरित करता है। भारत की संस्कृति की महानता का राज ही यह है […] Read more » freedom fighters of india great freedom fighters ofIndia
समाज ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम….. August 11, 2016 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी पूरे विश्व में बावजूद इसके कि लगभग 250 विभिन्न धर्मों,आस्थाओं तथा विश्वासों के मानने वाले लोग रहते हैं। सभी की अपनी-अपनी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं, सबके अपने-अपने रीति-रिवाज हैं। इनमें कुछ धर्म तथा विश्वास तो ऐसे हैं जो रीति-रिवाज व मान्यताओं के अनुसार एक-दूसरे के काफी करीब दिखाई देते हैं जबकि कुछ ऐसे […] Read more » Featured अन्नपूर्णा ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम मरियम सिद्दीकी
समाज जातिवाद को लेकर सनातन हिंदू धर्म को बदनाम किए जाने का कुचक्र August 10, 2016 / August 10, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 3 Comments on जातिवाद को लेकर सनातन हिंदू धर्म को बदनाम किए जाने का कुचक्र डा. राधेश्याम द्विवेदी प्रत्येक धर्म और राष्ट्र में जातिवाद की तरह की बुराइयाँ पाई जाती है। सभी धर्म के लोगों में ऊँच-नीच की भावनाएँ होती है किंतु धर्म का इससे कोई संबंध नहीं होता। धर्म की गलत व्याखाओं का दौर प्राचीन समय से ही जारी है। जातिवाद को लेकर सनातन हिंदू धर्म को बदनाम किए […] Read more » Featured जातिवाद सनातन हिंदू धर्म को बदनाम किए जाने का कुचक्र
शख्सियत समाज स्मृति शेष लोक संस्कृति के चितेरे चित्तू टुडू August 10, 2016 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment कुमार कृष्णन बिहार के बांका जिले के जंगली पहाड़ी भूगोल पर आबाद साहूपोखर भी अन्य संथाली गांवों जैसा ही है- एक जैसी सामाजिक संरचना, एक जैसी संस्कृति, एक समान दिनचर्या, यानी मवेशी चराना, खेतों में हाड़ तोड़ मेहनत,थकान मिटाने के लिए पोचवई के घूंट या महुआ मद से प्यार और चैपाल में चूंटी में फूंक […] Read more » Featured चित्तू टुडू शेष लोक संस्कृति के चितेरे स्मृति
समाज मैकाले -मैक्समूलर के चिन्तन से भारतीय राष्ट्रीयता का क्षरण August 9, 2016 by मनोज ज्वाला | Leave a Comment मनोज ज्वाला भारत पर अपना औपनिवेशिक प्रभुत्व स्थापित कर लेने के बाद ब्रिटिश हूक्मरानों-चिंतकों व यूरोपियन दार्शनिकों ने भारत को नजदीक से देखने-समझने के बाद यह रहस्य जान लिया था कि इस राष्ट्र की शाश्वतता , इसकी संजीवनी शक्ति अर्थात संस्कृति में सन्निहित है और इसकी संस्कृति का संवाहक है यहां का विपुल साहित्य और […] Read more » Featured भारतीय राष्ट्रीयता का क्षरण मैकाले -मैक्समूलर
कला-संस्कृति समाज संकट में हैं महाभारतकालीन जलकुंड August 9, 2016 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment शिवपुरी में महाभारत कालीन ऐसे 52 कुंड हैं, जो जलराशि से तो बारह माह भरे ही रहते हैं, नवग्रह मंडल की सरंचना से भी जुड़े हुए थे। अब इन कुंडों में से 20 कुंड अस्तित्व में हैं, जबकि 32 कुंड लुप्त हो चुके हैं। हालांकि इन सभी कुंडों का अस्तित्व तीन किलोमीटर की लंबाई में […] Read more » Featured संकट में हैं महाभारतकालीन जलकुंड
समाज याद करो कुर्बानी August 8, 2016 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment ” शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा । कभी वह दिन भी आयेगा जब अपना राज देखेंगे जब अपनी ही जमीं होगी जब अपना आसमां होगा ।।” पंडित जगदम्बा प्रसाद मिश्र की इस कालजायी कविता के ये शब्द हमें उन दिनों में आज़ादी की […] Read more » Featured कुर्बानी
समाज रचा जा रहा है गुर्जरों को विदेशी सिद्घ करने का षडय़ंत्र August 8, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य गुर्जर जाति प्रारंभ से ही पराक्रमी देशभक्त और वैदिक संस्कृति के प्रति परम आस्थावान रही है। यह जाति भारत की वैदिक संस्कृति की रक्षार्थ सदा ही संघर्षशील रही है। यही कारण है कि इसने भारत पर आक्रमण करने वाले मुस्लिमों का देर तक और जमकर प्रतिरोध किया। यह गौरव केवल इसी जाति […] Read more » Featured the conspiracy to prove that gurjars were foreigners गुर्जरों को विदेशी सिद्घ करने का षडय़ंत्र
समाज क्या है मूलनिवासी अवधारणा ? August 8, 2016 by प्रवीण गुगनानी | 4 Comments on क्या है मूलनिवासी अवधारणा ? 9 अगस्त मूलनिवासी दिवस पर विशेष – भारतीय दलित व जनजातीय समाज में इन दिनों एक नया शब्द चल पड़ा है, – मूलनिवासी. इस मूलनिवासी शब्द के नाम पर एक प्राचीन षड्यंत्र को नए रूप, नए कलेवर और नए आवरण में बांधकर एक विद्रूप वातावरण उत्पन्न करनें का प्रयास किया जा रहा है. मुझे लगता […] Read more » Featured मूलनिवासी मूलनिवासी अवधारणा