कला-संस्कृति महिला-जगत समाज भारतीय संस्कृति में नारी कल, आज और कल March 4, 2016 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment डॉ.सौरभ मालवीय ‘नारी’ इस शब्द में इतनी ऊर्जा है कि इसका उच्चारण ही मन-मस्तक को झंकृत कर देता है, इसके पर्यायी शब्द स्त्री, भामिनी, कान्ता आदि है,इसका पूर्ण स्वरूप मातृत्व में विलसित होता है। नारी, मानव की ही नहीं अपितु मानवता की भी जन्मदात्री है, क्योंकि मानवता के आधार रूप में प्रतिष्ठित सम्पूर्ण गुणों की वही […] Read more » Featured women in Indian culture भारतीय संस्कृति में नारी
समाज हम नज़रबन्द हो गये हैं ! March 4, 2016 by कीर्ति दीक्षित | Leave a Comment कीर्ति दीक्षित वो बेधड़क हंसी! वो मुहल्लों की चुगलियां ! वो आपसी संवाद ! सब आश्चर्यसूचक चिन्ह के भीतर के कथन हो गये हैं । खासकर शहरी जीवन में, अब दिल्ली को ही ले लीजिए कभी आप मेट्रो में यात्र कीजिए तो उम्र कुछ भी हो लेकिन तनाव में डूबे चेहरे और टच फोन पर […] Read more » Featured हम नज़रबन्द हो गये हैं !
समाज उर की बात March 4, 2016 / March 4, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment अच्छा है कि समाचार पत्रों या जालपत्र समूहों पर हम लोग एक द्रष्टा या मुसाफ़िर के रूप में रहें व आत्म निरीक्षण करते हुए विश्व द्रष्टि से देखें या लिखें । प्रश्न स्वयं से पूछें दूसरों से नहीं । आप अपने विचार लिखें । जिस की कुछ बोलने की इच्छा होगी बोल देगा । पूछना […] Read more » Featured उर की बात
समाज मोहन भागवत की तो सुनो! February 26, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 2 Comments on मोहन भागवत की तो सुनो! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संचालक मोहन भागवत की दाद देनी पड़ेगी। लगता है कि देश के सार्वजनिक जीवन में वे ही मर्द हैं, जो ईमान की बात खुलकर कह रहे हैं। उन्होंने अभी फिर कहा है कि देश आरक्षण पर दुबारा विचार करे। स्वयं बाबा साहेब आंबेडकर ने भी कहा था कि यह आरक्षण […] Read more » Featured Mohan Bhagwat opinion on reservation मोहन भागवत की तो सुनो!
समाज आश्रम व्यवस्था और साम्यवाद February 24, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अब सारे कार्यों के लिए लोग राज्य की ओर टकटकी लगाये रहकर देखते रहते हैं। अधिकार प्रेमी लोग प्रमादी होते हैं और कम्युनिस्टों ने ऐसे ही समाज का निर्माण किया है। जबकि भारत की आश्रम-व्यवस्था का तो शाब्दिक अर्थ भी आश्रम=श्रम से परिपूर्ण है। ब्रहमचर्याश्रम में विद्याध्ययन का श्रम है, गृहस्थ में गृहस्थी को चलाने […] Read more » Featured आश्रम व्यवस्था और साम्यवाद
विधि-कानून विविधा समाज उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता February 23, 2016 by प्रो. एस. के. सिंह | 1 Comment on उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता अभी हाल ही में तेलंगाना सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर कुलपति की नियुक्ति के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित योग्यताओं में परिवर्तन किया है। विश्वविद्यालय प्रणाली में प्रोफेसर अथवा ख्याति प्राप्त शोध/अकादमिक प्रशासनिक संगठन में समतुल्य पद पर 10 वर्ष केअनुभव के स्थान पर तेलंगाना सरकार ने यह 5 वर्ष कर दिया […] Read more » Featured उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता
कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार समाज सिंहस्थ : धर्म, विज्ञान एवं दर्शन का अनुष्ठान February 23, 2016 / February 23, 2016 by मनोज कुमार | Leave a Comment मनोज कुमार सनातन काल से स्वयमेव आयोजित होने वाला सिंहस्थ एक बार फिर पूरी दुनिया को आमंत्रित कर रहा है। सिंहस्थ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है अपितु यह दर्शन, विज्ञान एवं संस्कृति का वह अनुष्ठान है जिसमें समय काल के गुजरने के साथ-साथ नए तत्व एवं संदर्भों की तलाश की जाती है। विज्ञान ने समय […] Read more » Featured धर्म विज्ञान एवं दर्शन का अनुष्ठान सिंहस्थ सिंहस्थ महाकुंभ महापर्व
जन-जागरण समाज आरक्षण आंदोलन : राष्ट्रीय प्रगति में बाधक February 23, 2016 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानी किसी भी देश की प्रगति में प्रतिभा विकास का बहुत बड़ा योगदान रहता है। अगर प्रतिभा का विकास का कोई कार्यक्रम नहीं रहता तो उस देश की प्रगति रुक जाएगी, यह निश्चित है। भारत में आरक्षण की प्रक्रिया प्रतिभा विकास में बहुत बड़ा अवरोधक है। वास्तव में होना यह चाहिए कि जिस प्रकार […] Read more » Featured gujjar arakshan in rajasthan jat arakshan in haryana kapu arakshan in andhra pradesh आरक्षण आंदोलन राष्ट्रीय प्रगति में बाधक
प्रवक्ता न्यूज़ शख्सियत समाज संत रविदास February 22, 2016 / February 23, 2016 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment 22 फर. माघ पूर्णिमा, संत रविदास जयंती पर विशेष – संत रैदास: वेद धर्म छोडूं नहीं चाहे गले चले कटार भारतीय समाज में आजकल धर्मांतरण और हिन्दू धर्म में घर वापसी एक बड़ा विषय चर्चित और उल्लेखनीय हो चला है. यह विषय राजनैतिक कारणों से चर्चित भले ही अब हो रहा हो कि किन्तु सामाजिक […] Read more » Featured संत रविदास
शख्सियत समाज सामाजिक समरसता के प्रेरक संत रविदास February 21, 2016 by मृत्युंजय दीक्षित | 1 Comment on सामाजिक समरसता के प्रेरक संत रविदास 22 फरवरी पर विशेषः- मृत्युंजय दीक्षित हिंदू समाज को छुआछूत जैसी घृणित परम्परा से मुक्ति दिलाने वाले महान संत रविदास का जन्म धर्मनगरी काशी के निकट मंडुआडीह में संवत 1433 की पूर्णिमा को हुआ था। संत रविदास के पिता का नाम राघव व माता का नाम करमा था। जिस दिन उनका जन्म हुआ उस दिन […] Read more » Featured sant ravidas सामाजिक समरसता के प्रेरक संत रविदास
शख्सियत समाज दारा शिकोह व्यक्तित्व और कृतित्व February 21, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी सामान्य परिचयः-मुगल बादशाह शाहजहां जब 67वर्ष का हो चुका तो उसे अपने उत्तराधिकारी की चिन्ता सताने लगी थी। उसके तथा मुमताज महल के चार जीवित पुत्र थे। सभी व्यस्क थे तथा सभी को अलग-अलग प्रान्तों के सेनाओं के नायकत्व का अनुभव था। उनमें भाईचारे का कोई भाव नहीं था। सब एक दूसरे […] Read more » Dara Shikoh feartured दारा शिकोह
शख्सियत समाज संत कुलभूषण कवि गुरु रविदास February 21, 2016 / February 21, 2016 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” प्राचीन काल से ही भारत विभिन्न धर्मों तथा मतों के अनुयायियों का निवास स्थल रहा है। इन सबमें मेल-जोल और आपसी भाईचारा बढ़ाने के लिए संतों ने समय-समय पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे संतों में समाज सुधारक व कवि रविदास अर्थात रैदास (1398-1518) का नाम अग्रगण्य है। गुरु स्वामी रामानन्द के शिष्य […] Read more » Featured संत कुलभूषण कवि गुरु रविदास संत रविदास