विविधा विकास के नाम इतिहास बनते लोग ! October 19, 2015 / October 19, 2015 by अब्दुल रशीद | Leave a Comment अब्दुल रशीद जंगल आदिवासीयों के लिए और खेत किसानों के लिए न केवल उनके रोजीरोटी का साधन है बल्कि उनकी पहचान है. नए दौर में जो विकास कि गाथा लिखी जा रही है उसमें किसान और आदिवासी कहीं गुम होते जा रहें हैं. मूल बाशिंदो को विस्थापित कर नए को स्थापित करने का काम जिस […] Read more » इतिहास बनते लोग विकास के नाम
विविधा शख्सियत किस मिट्टी के थे भाखरे साहब October 18, 2015 by अनिल द्विवेदी | Leave a Comment 83 वर्षीय दिनकर केशव भाखरे, राष्ट्रवादी विचारधारा के आदर्श पत्रकार थे। स्वदेशी मन और कर्म ही उनकी पहचान रही। वे अपने परिवार से ज्यादा समाज के लिए जीए। घर में मात्र दो जून की रोटी के लिए ही ठहरते बाकी का समय संघ और उससे जुड़े संगठनों के लिए खपाते रहे। कैंसर परछाई की तरह […] Read more » Featured केशव भाखरे भाखरे साहब राष्ट्रवादी विचारधारा
टॉप स्टोरी विविधा बुद्धिजीवियों द्वारा अकादमी पुरस्कार वापस किए जाने के मायने October 18, 2015 / October 18, 2015 by अनिल कुमार पाण्डेय | Leave a Comment हाल ही में बुद्धिजीवियों द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कारों को लौटाये जाने का मामला सुर्खियों में है। बुद्धिजीवियों का ये तर्क है कि जब से नई सरकार ने अपना कार्य संभाला है तभी से सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। आपसी भाईचारे को छिन्न-भिन्न करने की साजिश की जा रही है। देश की कथित कट्टरपंथी […] Read more » Featured अकादमी पुरस्कार अकादमी पुरस्कार वापस किए जाने के मायने बुद्धिजीवियों द्वारा अकादमी पुरस्कार वापस किए जाने के मायने
विधि-कानून विविधा संविधान की हुई जीत। October 17, 2015 / October 17, 2015 by बी.आर.कौंडल | Leave a Comment बी. आर. कौण्डल सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक ठहरा कर यह साबित कर दिया कि इस देश में संविधान सर्वोपरि है न की विधायिका। भारतीय संविधान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रावधान किया गया है जिसकी सुरक्षा करना न्यायपालिका का धर्म है। हाल के फैसले में उच्चतम न्यायालय ने उस धर्म […] Read more » Featured संविधान
विधि-कानून विविधा सीबीआई की मिट्टी पलीत के बाद क्या? October 17, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment हमारे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जैसी मिट्टी अभी पलीत हुई है, वैसी पहले कभी नहीं हुई। एक विशेष अदालत ने फैसला दिया है कि इस ब्यूरो के उस अधिकारी की जांच होनी चाहिए, जिसने टेलिकॉम सचिव श्यामल घोष और तीन टेलिकॉम कंपनियों के विरुद्ध झूठा आरोप-पत्र बनाया और उन्हें किसी के इशारे पर बदनाम […] Read more » Featured सीबीआई की मिट्टी पलीत सीबीआई की मिट्टी पलीत के बाद क्या?
जन-जागरण टॉप स्टोरी विविधा पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति पर क्या कहती है अमरीकी विदेश विभाग की यह रिपोर्ट ? October 16, 2015 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर विगत दिनों अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख उम्मीदवार और सीनेटर मार्को रूबियो ने पाकिस्तान को “विशेष रूप से चिंताजनक देश Country of Particular Concern (CPC)” बताते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर […] Read more » Featured पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति
धर्म-अध्यात्म विविधा अखण्ड सत्तास्वरूपा विश्वमयी चेतना अदिति October 16, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” परमेश्वर के तीनों ही लिंगों में नाम हैं । स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सत्यार्थ प्रकाश के प्रथम सम्मुल्लास में कहा है कि, जितने ‘देव’ शब्द के अर्थ लिखे हाँ उतने ही ‘देवी’ शब्द के भी हैं l परमेश्वर के तीनों लिंगों में नाम हैं , जैसे – ब्रह्म चितिश्वरेश्चेति l जब ईश्वर का […] Read more » Featured अखण्ड सत्तास्वरूपा विश्वमयी चेतना अदिति
धर्म-अध्यात्म विविधा हम शास्त्रार्थ से सत्यार्थ, यथार्थ और तथ्यार्थ के उपासक बनें October 16, 2015 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment इस्लाम का दुष्प्रभाव इस्लाम ने भारत में पदार्पण किया तो उसने भारत की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर और ऐतिहासिक संपदा को विनष्ट करने में किसी प्रकार की कमी नही छोड़ी। उसने भारत पर अपने आतंक और अत्याचारों की काली छाया डालकर ‘मां भारती’ के वैभव को पूर्णत: मिटाने का प्रयास किया। इस प्रकार भारत पर इस्लाम […] Read more » Featured यथार्थ और तथ्यार्थ के उपासक बनें हम शास्त्रार्थ से सत्यार्थ
टॉप स्टोरी विविधा लेखकों का नपुंसक गुस्सा October 16, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दे दिया। अखलाक और गुलाम अली दोनों के साथ हुई घटनाओं को उन्होंने ‘अवांछित और दुर्भाग्यपूर्ण’ कह दिया। अब बताइए, हमारे साहित्यकार मित्र क्या करेंगे? मोदी ने उन्हें असमंजस में डाल दिया। अब वे क्या अपने सम्मान या पुरस्कार वापस मांगेंगे? मोदी ने बड़ी चालाकी से काम लिया। पहले सब […] Read more » Featured लेखकों का नपुंसक गुस्सा
विविधा लिखिए जोर से लिखिए, किसने रोका है भाई! October 16, 2015 by संजय द्विवेदी | Leave a Comment संजय द्विवेदी देश में बढ़ती तथाकथित सांप्रदायिकता से संतप्त बुद्धिजीवियों और लेखकों द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का सिलसिला वास्तव में प्रभावित करने वाला है। यह कितना सुंदर है कि एक लेखक अपने समाज के प्रति कितना संवेदनशील है, कि वह यहां घट रही घटनाओं से उद्वेलित होकर अपने सम्मान लौटा रहा है। कुछ ने […] Read more » Featured लिखिए जोर से लिखिए साहित्य अकादमी पुरस्कार
पर्यावरण विविधा सूख रही हैं धरती की धमनियाँ October 15, 2015 by सरिता अरगरे | Leave a Comment सरिता अरगरे धरती की धमनियाँ सूख रही हैं। अपने अस्तित्व को बचाने के लिए तरह-तरह से संकेत दे रही हैं। कभी बाढ़ के माध्यम आगाह कर रहती हैं, तो कहीं सूरज की तपन से सकुचा कर गर्मी की दस्तक सुनते ही अपना दामन समेट लेती हैं। भारत की सनातनी परम्परा ने सदियों से सलिलाओं को […] Read more » Featured सूख रही हैं धरती की धमनियाँ
कला-संस्कृति विविधा ब्राह्मणवाद व श्रमणवाद October 15, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment राम पुनियानी (लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।) हिंदू धर्म और विशेषकर ब्राह्मणवाद व श्रमणवाद के साथ उसके रिश्तों के संबंध में कई भ्रांतियां हैं। ‘हिंदुत्व’शब्द ने इस भ्रांति में इज़ाफा ही किया है। हिंदुत्व, धर्म के नाम पर की जा रही राजनीति का […] Read more » Featured ब्राह्मणवाद ब्राह्मणवाद व श्रमणवाद श्रमणवाद