विधि-कानून विविधा शिक्षा में सामाजिक न्याय की पहल August 23, 2015 / August 23, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भः इलाहाबाद हाईकोर्ट का सरकारी स्कूलों में पढ़ें नौकरशाहों के बच्चे:- प्रमोद भार्गव सरकारी शिक्षा में सुधार के तमाम प्रयोगों की असफलता के तारतंभ में इलाहाबाद उच्चन्यायालय का शिक्षा में बुनियादी सुधार से संबंधी अहम् फैसला आया है। बशर्तें इसे बहाने बनाकर टाला न जाए। शिव कुमार पाठक द्वारा दायर जनहित याचिका पर फैसला सुनाते […] Read more »
विविधा सिनेमा साहस को पहाड़ से ऊंचा दिखाती है ‘मांझी- द माउंटेन मैन’ August 22, 2015 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | 2 Comments on साहस को पहाड़ से ऊंचा दिखाती है ‘मांझी- द माउंटेन मैन’ कलाकार: नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राधिका आप्टे, तिग्मांशु धूलिया, गौरव द्विवेदी, प्रशांत नारायण निर्माता: नीना लथ गुप्ता, दीपा साही निर्देशक: केतन मेहता लेखक: केतन, अंजुम रजबअली, महेन्द्र जाखड़ संगीत: संदेश शांडिल्य, हितेश सोनिक स्टार: 4 अपने मुख्यमंत्री रहते जीतन राम मांझी ने जब यह स्वीकार किया था कि वे मुहसर जाति से हैं और अपनी गरीबी में […] Read more » मांझी- द माउंटेन मैन साहस को पहाड़ से ऊंचा दिखाती है
बच्चों का पन्ना विविधा गाँव चलें हम August 22, 2015 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment चलो पिताजी गांव चलें हम , दादाजी के पास | बहुत दिनों से दादाजी का, नहीं मिला है साथ | वरद हस्त सिर पर हो उनका , भीतर मेरे साध | पता नहीं क्यों ह्रृदय व्यथित है, मन है बहुत उदास | दादी के हाथों की रोटी, का आ जाता ख्याल | लकड़ी से चूल्हे […] Read more » गाँव चलें हम
जन-जागरण विविधा श्रीकृष्ण-जन्मभूमि August 22, 2015 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment पुण्य नगरी मथुरा में चार दिवसीय प्रवास के बाद मैं कल ही बनारस लौटा. प्रवास अत्यन्त आनन्दायक था. मेरी प्रबल इच्छा थी कि अपने नवीनतम पौराणिक उपन्यास ‘यशोदानन्दन’ की पाण्डुलिपि श्रीकृष्ण-जन्मभूमि में जाकर उनके श्रीचरणों में अर्पित करने के बाद ही प्रकाशक को भेजूं। मैं अपने अभियान में सफल रहा। मैं वहां अपने परम […] Read more » श्रीकृष्ण-जन्मभूमि
विधि-कानून विविधा समाज भारतीय भाषाएँ और छात्रों के मानवीय अधिकारों का प्रश्न- डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री August 21, 2015 / August 21, 2015 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 1 Comment on भारतीय भाषाएँ और छात्रों के मानवीय अधिकारों का प्रश्न- डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री पिछले दिनों उत्तराखंड के नगर रुड़की में स्थित आई.आई.टी (भारतीय प्राद्यौगिकी संस्थान ) ने अपने पचास से भी ज़्यादा छात्रों को बाहर का दरवाज़ा दिखा दिया । संस्थान का कहना है कि ये छात्र पढ़ाई लिखाई में बहुत पिछड़े हुये हैं । यहाँ का कोर्स पूरा कर पाना इन छात्रों के बस का काम […] Read more »
टेक्नोलॉजी विविधा कंप्युटर का भाषाई पिछड़ापन August 21, 2015 by प्रमोद भार्गव | 1 Comment on कंप्युटर का भाषाई पिछड़ापन प्रमोद भार्गव महाभारत में जलाशय के समीप खड़े यक्ष बने धर्म ने युधिष्ठिर से पूछा था कि दुनिया में सबसे तेज दौड़ने वाली चीज क्या है ? तब धर्मराज युधिष्ठिर ने उत्तर दिया,कि सबसे तेज गति में दौड़ने वाला होता है,हमारा ‘मन‘। यह हमें पलक झपकते ही यहां से वहां और वहां से और कहीं […] Read more » कंप्युटर भाषाई पिछड़ापन
विविधा समाज लाइवलीहुड कॉलेज अर्थात कौशल उन्नयन August 20, 2015 / August 21, 2015 by मनोज कुमार | 1 Comment on लाइवलीहुड कॉलेज अर्थात कौशल उन्नयन -मनोज कुमार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से निकल कर धुर नक्सली जिला कांकेर के रास्ते में लाइवलीहुड कॉलेज का नाम लिखा पढ़ा तो एकबारगी समझ में ही नहीं आया कि यह कौन सा कॉलेज है और किस प्रकार की पढ़ाई होती है। कार अपनी र$फ्तार से चल रही थी और मन में जिज्ञासा उससे […] Read more » कौशल उन्नयन लाइवलीहुड कॉलेज
विविधा हिंदी दिवस हिन्दी की विकास यात्रा किस ओर……… August 20, 2015 by बीनू भटनागर | 6 Comments on हिन्दी की विकास यात्रा किस ओर……… कोई भी भाषा सदैव एक सी नहीं रहती बदलावों को ग्रहण करके ही आगे बढती है, इस यात्रा मे देश के इतिहास की भी अहम भूमिका होती है, वहाँ कहाँ कहाँ से आकर लोग बसे, उनकी भाषा क्या थी, इन सब बातों का भाषा की विकास यात्रा पर बहुत असर पड़ता है।हिन्दी मे मुसलमानो […] Read more » हिन्दी की विकास यात्रा
विविधा व्यंग्य सर का शौर्य, साहब का शोक….!! August 20, 2015 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा आज का अखबार पढ़ा तो दो परस्पर विरोधाभासी खबरें मानों एक दूसरे को मुंह चिढ़ा रही थी। पहली खबर में एक बड़ा राजनेता अपनी बिरादरी का दुख – दर्द बयां कर रहा था। उसे दुख था कि जनता के लिए रात – दिन खटने वाले राजनेताओं को लोग धूर्त और बेईमान समझते […] Read more » सर का शौर्य साहब का शोक
विविधा शख्सियत आनंदीसहाय शुक्ल: टूट गया सांसों का इकतारा August 20, 2015 / August 20, 2015 by गिरीश पंकज | Leave a Comment गिरीश पंकज पं.आनंदी सहाय शुक्ल हम सब को रोता बिलखता छोड़ कर चले गए। उनके निधन की खबर सुनते ही मुझे उनकी ही कविता याद आ गई, जिसमें वे कहते हैं उधो सांसों का इकतारा बजता रहे तार मत टूटे गाता मन बंजारा बाणों की शैया पर लेटा, फिर भी मत्यु न चाहे इस इच्छा इस आकर्षण […] Read more » आनंदीसहाय शुक्ल
कविता विविधा मेरा सब कुछ अब तू ही मेरे मौला August 19, 2015 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment मुझे अपने रंग में ; रंग दे ,मेरे मौला मुझे भी अपने संग ले ले ,मेरे मौला जब हर कोई मेरा साथ छोड़ दे , दुनिया के भीड़ में तन्हा छोड़ दे तब ज़िन्दगी की तन्हाइयों में एक तेरा ही तो साया ; मेरे साथ होता है मेरे मौला मेरा सब कुछ अब तू […] Read more » मेरा सब कुछ अब तू ही मेरे मौला
कविता विविधा स्वामी विवेकानंद August 19, 2015 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment आज भी परिभाषित है उसकी ओज भरी वाणी से निकले हुए वचन ; जिसका नाम था विवेकानंद ! उठो ,जागो , सिंहो ; यही कहा था कई सदियाँ पहले उस महान साधू ने , जिसका नाम था विवेकानंद ! तब तक न रुको , जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो … कहा था […] Read more » स्वामी विवेकानंद