विविधा राजनीति पर गैर सरकारी स्वैच्छिक संगठनों का विदेशी नागपाश October 9, 2011 / December 5, 2011 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment हरिकृष्ण निगम क्या आज का भारत स्वैच्छिक और गैर-सरकारी संगठनों अथवा सिविल सोसायटी कहलाने वाले संगठनों के नागपाश द्वारा विदेशी सूत्रधारों या कुछ देशविरोधी अंतर्राष्ट्रीय लॉबियों का अखाड़ा बन चुका है? देश में सक्रिय इन एन.जी.ओ. अथवा सी. एस. ओ. ने अपनी अंदरूनी प्रतिद्वंदिता और राजनीति द्वारा वर्तमान व्यवस्था को गंभीर चुनौति ही नहीं दी […] Read more » non government politics गैर सरकारी राजनीति
विविधा हिन्दी किसकी है October 9, 2011 / December 5, 2011 by बीनू भटनागर | 6 Comments on हिन्दी किसकी है बीनू भटनागर अजीब सा शीर्षक है,अजीब सा प्रश्न है कि हिन्दी किसकी है। पूरे भारत की,सभी हिन्दी भाषियों की या फिर हिन्दी के गिने चुने विद्वानों की। इसी प्रश्न का उत्तर सोचते सोचते मै अपने विचार लिखने का प्रयास कर रही हूँ। स्वतन्त्रता प्राप्त हुए 64 वर्ष हो चुके हैं,परन्तु हिन्दी को वह सम्मान नहीं […] Read more » hindi हिंदी
विविधा ग्लोबलाइजेशन : एक समसामयिक मूल्यांकन October 6, 2011 / December 5, 2011 by मीनाक्षी मीणा | 8 Comments on ग्लोबलाइजेशन : एक समसामयिक मूल्यांकन मीनाक्षी मीणा आज का युग संचार व प्रौद्योगिकी का युग है, जहां पर एल.पी.जी. (उदारीकरण, निजीकरण, ग्लोबलाइजेशन) की हवा बह रही है। एल.पी.जी. की इसी हवा में ग्लोबलाइजेशन अपनी पूरी सक्रियता के साथ पूरे विश्व में विस्तारित होता जा रहा है और इसी ग्लोबलाइजेशन के कारण आज पूरा विश्व एक छोटी सी दुनिया में सिमट […] Read more » Globalisation ग्लोबलाइजेशन वैश्वीकरण
विविधा अस्तित्व के संकट से जुझ रहे विश्व को संबल देता है गांधी दर्शन October 2, 2011 / December 5, 2011 by समन्वय नंद | 1 Comment on अस्तित्व के संकट से जुझ रहे विश्व को संबल देता है गांधी दर्शन गांधी जयंती (2 अक्टूबर) पर विशेष समन्वय नंद विश्व आज अनेक समस्याओं से दो- चार हो रहा है, और इनके कारण उनके अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं । तापमान बढने व ओजोन में छेद होने के कारण इस प्लैनेट पर जीवन के अस्तित्व ही खतरे में पड गया है अब ऐसा […] Read more » Mahatma Gandhi महात्मा गांधी
विविधा दिल्ली धमाके: फिर मानवता हुई लहूलुहान September 27, 2011 / December 6, 2011 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री महानगर मुबई में गत् 12 जुलाई को हुए सीरियल बलास्ट की गूंज अभी खत्म भी नहीं हई थी कि मानवता के दुश्मन आतंकवादियों ने एक बार फिर देश की शांतिप्रिय राजधानी दिल्ली को अपने निशाने पर ले लिया। आमतौर पर देश में बुधवार के दिन होने वाले बम धमाकों की ही तरह पिछला […] Read more » terrorism आतंकवाद
विविधा हृदय प्रदेश कब होगा औद्योगिक रूप से समृद्ध! September 26, 2011 / December 6, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे देश के हृदय प्रदेश में उद्योगों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। एक के बाद एक उद्योग धंधों की सांसे फूल रहीं हैं। शिवराज सिंह चौहान द्वारा जनता के गाढ़े पसीने से कमाए गए राजस्व को दोनों हाथों से निवेशकों को आमंत्रित करने में लुटाया जा रहा है। निवेशक आते हैं पर […] Read more » Madhya pradesh मध्य प्रदेश
विविधा हमारे पैसों से ही भारत में आतंक बरपा रही है आईएसआई September 26, 2011 / December 6, 2011 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे अपने नापाक इरादों के साथा भारत गणराज्य में आतंक बरपाकर अस्थिरता पैदा करने के अनेक आरोप पाकिस्तान पर लगते रहे हैं। एक के बाद एक सबूत पेश करने के बाद भी वहां की हुकूमत भारत में आतंक फैलाने की बात नकारती आई है। दुनिया के चौधरी अमेरिका के सामने भारत के नेता घुटनों […] Read more » terrorism आतंकवाद लिमटी खरे
विविधा आज आइए खान मार्केट, सायं 5 बजे पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में September 25, 2011 / January 23, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on आज आइए खान मार्केट, सायं 5 बजे पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में डॉ. मुकर्जी स्मृति न्यास द्वारा प्रकाशित पाक्षिक ‘कमल संदेश’ राष्ट्रवादी विचारधारा को पल्लवित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही है। विगत वर्षों में हमने ‘अंत्योदय’, ’21वीं सदी-भारत की सदी’, ‘चुनौतियां, ‘समाधान’, ‘संकल्प’ और ‘विकल्प’ विशेषांक प्रकाशित कर राष्ट्रीय मुद्दों पर राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से बहस छेड़ने की कोशिश की है। 25 सितम्बर हमारे वैचारिक पुरोधा पं. दीनदयाल […] Read more » Khan Market
विविधा आंकड़ों में उलझी गरीबों की जिंदगी September 25, 2011 / December 6, 2011 by हिमकर श्याम | 1 Comment on आंकड़ों में उलझी गरीबों की जिंदगी हिमकर श्याम दशकों से गरीबी, देश की सबसे बड़ी चुनौती है। यह चुनौती लगातार गंभीर और व्यापक होती गयी पर, सत्ता पक्ष-विपक्ष किसी ने इसके कारगर उपाय के लिए अपनी पूरी ताकत नहीं झोंकी। गरीबी और गरीबी रेखा का इस्तेमाल हमेशा से ही राजनैतिक फायदे के लिए किया गया। गरीब होने का अर्थ है अभाव […] Read more » poverty गरीबी
विविधा भ्रष्टाचार व लोकपाल के भंवर में फंसा भारतीय लोकतंत्र September 19, 2011 / December 6, 2011 by कुन्दन पाण्डेय | 8 Comments on भ्रष्टाचार व लोकपाल के भंवर में फंसा भारतीय लोकतंत्र कुन्दन पाण्डेय अन्ना के आन्दोलन से एक बात देश का हर नागरिक स्पष्ट रूप से जान गया कि भारतीय संविधान में प्रधानमंत्री एक ऐसा अघोषित पद बना दिया गया है कि उस (पीएम) पर, पद पर बने रहते आरोप लगाया जा सकता है, उंगली उठाई जा सकती है, परन्तु जांच नहीं की जा सकती। जन-जन […] Read more » Corruption अन्ना हजारे भ्रष्टाचार लोकपाल
विविधा देश को एक खतरनाक कानून से बचाएं September 19, 2011 / December 6, 2011 by विनोद बंसल | 1 Comment on देश को एक खतरनाक कानून से बचाएं विनोद बंसल किसी भी देश के लिए उसके नागरिक एक अमूल्य निधि होते हैं तथा उनके अधिकारों की रक्षा राज्य सत्ता का परम धर्म होता है। प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा तथा उसके मूलाधिकारों की रक्षा की गारंटी सुनिश्चित करते हुए सरकार को यह भी ध्यान रखना होता है कि सभी नागरिकों को अपनी प्रगति के […] Read more » dangerous law
महत्वपूर्ण लेख विविधा हिन्दू वल्गैरिटी पर अज्ञेय September 17, 2011 / December 6, 2011 by शंकर शरण | 10 Comments on हिन्दू वल्गैरिटी पर अज्ञेय शंकर शरण सार्वजनिक आयोजनों में यह दृश्य सब देखते हैं। दीप प्रज्जवलन, महापुरुषों की तस्वीरों पर माल्यार्पण अथवा मुख्य अतिथि का औपचारिक स्वागत – प्रत्येक कार्य को फोटो उतरवाने की दृष्टि से रोका या दुहराया जाता है। यह दृश्य देखने वाले किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को महसूस होता है कि उस प्रक्रिया में दीप-प्रज्जवलन, माल्यार्पण […] Read more » अज्ञेय हिन्दू वल्गैरिटी