प्रवक्ता न्यूज़ चुनौतियों को अवसर में बदलते नरेंद्र मोदी

चुनौतियों को अवसर में बदलते नरेंद्र मोदी

डॉ. वेदप्रकाश          हाल ही में लंदन से प्रकाशित प्रतिष्ठित एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिका “द इकोनॉमिस्ट” की एक रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैश्विक चुनौतियों…

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मीडिया भरोसे एवं भारत की आवाज थे विरल पत्रकार मार्क टुली

भरोसे एवं भारत की आवाज थे विरल पत्रकार मार्क टुली

-ललित गर्ग- भारत की समकालीन इतिहास-यात्रा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल घटनाओं का वृत्तांत नहीं लिखते, बल्कि समय की चेतना में घुल-मिलकर…

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लेख गणतंत्र का गौरव और राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ

गणतंत्र का गौरव और राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ

77 वें गणतंत्र दिवस

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लेख राष्ट्रीय संकट के समय राजपथ से संघ ने दिया एकजुटता का संदेश

राष्ट्रीय संकट के समय राजपथ से संघ ने दिया एकजुटता का संदेश

आज भी हम 1962 के भारत-चीन युद्ध को भूल नहीं पाते हैं। चीन ने भारत के विश्वास का कत्ल किया था। ‘हिन्दी-चीनी, भाई-भाई’ के हमारे नारे को धुंए में

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लेख भारतीय संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 

भारतीय संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 

26 जनवरी गणतंत्र दिवस विवेक रंजन श्रीवास्तव  भारतीय संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संबंध लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा हुआ है। यह केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं…

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लेख संवैधानिक मूल्य : गणतंत्र की आत्मा और नागरिक दायित्व

संवैधानिक मूल्य : गणतंत्र की आत्मा और नागरिक दायित्व

26 जनवरी गणतंत्र दिवस बाबूलाल नागा    भारतीय संविधान केवल शासन चलाने का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन है जो देश की आत्मा, उसकी चेतना और दिशा—तीनों को परिभाषित करता है। संविधान की उद्देशिका में निहित स्वतंत्रता, समता, समानता, बंधुता, संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र जैसे मूल्य पूरे संविधान की वैचारिक रीढ़ हैं। ये मूल्य “हम भारत के लोग” द्वारा स्वयं को दी गई वह सामूहिक प्रतिबद्धता हैं जो प्रत्येक नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी निरंतर स्मरण कराती है। संविधान का सच्चा सम्मान केवल औपचारिक आयोजनों से नहीं, बल्कि इन मूल्यों को अपने व्यवहार और सार्वजनिक जीवन में उतारने से होता है।    भारत 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की 77वीं वर्षगांठ मना रहा है। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे…

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लेख गणतंत्र के सामने चुनौतियाँ : हमारा दायित्व

गणतंत्र के सामने चुनौतियाँ : हमारा दायित्व

शम्भू शरण सत्यार्थी गणतंत्र केवल शासन-प्रणाली का नाम नहीं है, यह एक जीवित चेतना है जो नागरिकों के आचरण, सोच और साहस से जीवित रहती…

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लेख ज्ञान-परंपरा से लौटती प्राचीन भारतीय गणतंत्र की गरिमा

ज्ञान-परंपरा से लौटती प्राचीन भारतीय गणतंत्र की गरिमा

संदर्भः गणतंत्र दिवस 26 जनवरी पर विशेष आलेख-प्रमोद भार्गवदुनिया के गणतंत्रों में भारत प्राचीन गणतंत्रों में से एक है। यहां के मथुरा, पद्मावती और त्रिपुरी…

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राजनीति वंदे मातरम पर बवाल क्यों ?

वंदे मातरम पर बवाल क्यों ?

वंदे मातरम पर बवाल क्यों ?

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लेख शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने

शिक्षा रोजगार का टिकट नहीं, जीवन का दर्शन बने

विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा…

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विश्ववार्ता गाजा बोर्ड ऑफ पीस पर वैश्विक कशमकश के मायने

गाजा बोर्ड ऑफ पीस पर वैश्विक कशमकश के मायने

गाजा बोर्ड ऑफ पीस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक महत्वाकांक्षी पहल है जो गाजा संघर्ष को सुलझाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना…

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राजनीति विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक गणतंत्र है भारत

विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक गणतंत्र है भारत

डा. विनोद बब्बर  गणतंत्र दिवस ‘गण’ और ‘तंत्र’ के सबंधों की पड़ताल करने का अवसर है। इस बात पर गर्व करने का अवसर भी कि…

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