टेलिविज़न युवाओं की भूमिका पर ‘मन की बात’

युवाओं की भूमिका पर ‘मन की बात’

– ललित गर्ग- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देश की युवापीढ़ी के मन को समझने एवं समझाने की कोशिश की।…

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विश्ववार्ता तनाव है तो होने दे, इसमें बुरा क्या है?

तनाव है तो होने दे, इसमें बुरा क्या है?

स्ट्रेस यानी तनाव।  पहले इसके बारे में यदा कदा ही सुनने को मिलता था। लेकिन आज भारत समेत सम्पूर्ण विश्व के लगभग सभी देशों में यह किस कदर तेज़ी से…

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राजनीति बदलते राजनीतिक दृश्यों में उथल-पुथल के संकेत

बदलते राजनीतिक दृश्यों में उथल-पुथल के संकेत

– ललित गर्ग-आज जब नववर्ष प्रारम्भ हो रहा है या यूं कहूं कि इक्कीसवीं शताब्दी का ट्वींटी-ट्वींटी प्रारम्भ हो रहा है, तब इसकी पूर्व संध्या…

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राजनीति झारखंड : – – – – अंजामे गुलिस्तां क्या होगा ?

झारखंड : – – – – अंजामे गुलिस्तां क्या होगा ?

ईसाइयत की मार झेलते हुए झारखंड ने अपना निर्णय दे दिया है । देश के कई लोगों के लिए यह खुशी का विषय है कि…

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लेख सेना को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाएंगे सेना प्रमुख नरवणे

सेना को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाएंगे सेना प्रमुख नरवणे

– योगेश कुमार गोयल             नए साल के ठीक एक दिन पहले 31 दिसम्बर को देश के 28वें थलसेना अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने…

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जन-जागरण पर्यावरण  संतुलन बिगाड़ने में इंटरनेट की भूमिका!

पर्यावरण संतुलन बिगाड़ने में इंटरनेट की भूमिका!

लिमटी खरे ट्वंटी ट्वंटी यानी सन 2020 आरंभ हो गया है। विजन 2020 को लेकर न जाने कितने सपने दिखाए गए थे इक्कीसवीं सदी के…

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विश्ववार्ता देश में अमनचैन भाईचारा और तरक्की के नये आयाम स्थापित करने वाला हो अंग्रेजी नववर्ष 2020

देश में अमनचैन भाईचारा और तरक्की के नये आयाम स्थापित करने वाला हो अंग्रेजी नववर्ष 2020

दीपक कुमार त्यागीआज अंग्रेजी नववर्ष 2020 का आगमन है, पिछले कुछ दिनों से  हर किसी को नववर्ष का बेहद बेसब्री इंतजार है। लोग कड़ाके की…

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लेख राधेश्याम शर्मा होने का मतलब

राधेश्याम शर्मा होने का मतलब

एक ध्येयनिष्ठ पत्रकार, संवेदनशील मनुष्य के रूप में याद किया जाएगा उन्हें -प्रो. संजय द्विवेदी      इस साल का दिसंबर महीना जाते-जाते एक ऐसा आघात…

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कविता कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष

कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष

शिक्षा से रहे ना कोई वंचित संग सभी के व्यवहार उचित रहे ना किसी से कोई कर्ष कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष भले भरत…

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कविता क्यों हुये डाक्टर लुटेरा एक समान

क्यों हुये डाक्टर लुटेरा एक समान

ओ नाच जमूरे छमा-छम, सुना बात पते की एकदम हाथपैर में हड़कन होती है, सर में गोले फूटे धमा-धम आं छी जुकाम हुआ या सीने…

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विश्ववार्ता नये वर्ष में भारत को नया रंग दें

नये वर्ष में भारत को नया रंग दें

ललित गर्ग जीवन में मौसम ही नहीं बदलता माहौल, मकसद, मूल्य और मूड सभी कुछ परिस्थिति और परिवेश के परिप्रेक्ष्य में बदलता है। और ये बदलते…

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व्यंग्य ब्रज नही बचो कान्हा के समय जैसों

ब्रज नही बचो कान्हा के समय जैसों

(ब्रजदर्शन के बाद ) जे वृन्दावन धाम नहीं है वैसो, कान्हा के समय रहो थो जैसो समय बदलते सब बदले हाल वृन्दावन हुओ अब बेहाल।…

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