कविता काल व्यूह से लड़ना होगा !

काल व्यूह से लड़ना होगा !

यह पुण्य भूमि है ऋषियों की,जहां अभूतपूर्व वीरता त्याग की धारखंडित भारत आज खंड खंड ,दे रही चुनौती कर सहर्ष स्वीकार !दग्ध ज्वाल विकराल फैला,कर…

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कविता कब होगी सुख की भोर

कब होगी सुख की भोर

कह रहे है माता-पिता अब जीवन कितना बाकी है कब तक धड़केगा यह दिल और कितनी साॅसें बाकी है। बेटा बहू पोता नहीं आते ममता…

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राजनीति कुर्सी की राजनीति में उलझी पत्रकारिता का हुआ चीरहरण

कुर्सी की राजनीति में उलझी पत्रकारिता का हुआ चीरहरण

कौरवों की राजसभा में द्रौपदी को उसकी इच्छा के विरूद्घ लाया गया था जबकि वह रजस्वला थी और उसे परपुरूष द्वारा हाथ लगाना ही अपने…

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कविता ये पत्रकार बड़े है

ये पत्रकार बड़े है

शहर में इनकी खूब चर्चा है अतिक्रमण हटाने वाली टीम के अधिकारियों से चलता खर्चा है। ये शौकीनमिजाज है सभी जगह खबू चरते-फिरते है सांडों…

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कविता हम जो छले, छलते ही गये

हम जो छले, छलते ही गये

15 अगस्त की वह सुबह तो आयी थी जब विदेशी आंक्रान्ताओं से हमें शेष भारत की बागड़ोर मिली हम गुलाम थे, आजाद हुये आजादी के…

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राजनीति परिवारवाद और तुष्टीकरण तक सिमटी कांग्रेस

परिवारवाद और तुष्टीकरण तक सिमटी कांग्रेस

दुलीचंद कालीरमन भारतीय लोकतंत्र की सबसे प्राचीन पार्टी कांग्रेस में नेतृत्व की समृद्ध परंपरा रही है. लेकिन आज जब 2019 में कांग्रेस की 135 साल…

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लेख संजीवनी की तलाश में दिख रही भारतीय रेल!

संजीवनी की तलाश में दिख रही भारतीय रेल!

लिमटी खरे सरकारी व्यवस्थाओं का निजिकरण करना हुक्मरानों के लिए बहुत ही आसान काम है। इससे अपने किसी चहेते को लाभ पहुंचाने के मार्ग आसानी…

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राजनीति सत्ता की सवारी पर सोरेन सवार।

सत्ता की सवारी पर सोरेन सवार।

राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता राजनीति की प्रयोगशाला में यह एक बार फिर सत्य साबित हुआ। झारखण्ड के चुनाव में जिस प्रकार से…

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विश्ववार्ता देश बिलखता रहा; सोच बदलती रही

देश बिलखता रहा; सोच बदलती रही

अनिल अनूप हर रोज सुबह होने के बाद कैलेंडर की तारीख भी बदल जाती है। ऐसे ही दिन, हफ्ते, महीने और साल बीत जाते हैं।…

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व्यंग्य डर दा मामला है

डर दा मामला है

“सबसे विकट आत्मविश्वास मूर्खता का होता है ,हमें एक उम्र से मालूम है –हरिशंकर परसाई”। फिल्मों की “द फैक्ट्री “चलाने वाले निर्देशक राम गोपाल वर्मा…

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कविता संघातों में सदा अविचल होना !

संघातों में सदा अविचल होना !

तुम वीरता के दृढ़ प्रतिमान , कभी नहीं धीरज खोना ! कंटक राहें हों दुर्निवार , न भयभीत कहीं रुकना-झुकना ! तुम वीर प्रहरी पुण्यभूमि…

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कविता विनय

विनय

ईश्वर ! तुमने हमे दिया है सुंदर सा एक शरीर स्वस्थ सभी अंग दिए है ये अपनी जागीर हमको दो आँखे दी तुमने देख-भाल कर…

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