लेख “देश में भारी वर्षा से बाढ़ की स्थिति पर मनुष्य का वश नहीं”

“देश में भारी वर्षा से बाढ़ की स्थिति पर मनुष्य का वश नहीं”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। आजकल वर्षा ऋतु चल रही है। देश भर में वर्षा हो रही है और देश के अधिकांश भागों में वर्षा से…

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लेख छोटे मुंह से बड़ी बड़ी बातें ?

छोटे मुंह से बड़ी बड़ी बातें ?

तनवीर जाफ़री बुज़र्गों से एक कहावत बचपन से ही सुनते आ रहे हैं कि “पहले तोलो फिर बोलो”। इस कहावत का अर्थ यह है कि किसी…

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कविता तन्हाइयां

तन्हाइयां

चाहूं मैं तुम साथ हो, जब पास हो तन्हाइयां कोई भी न साथ दे तब साथ हो तन्हाइयां मेरी हस्ती देख करके सब बिषैले हो…

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कविता आधे-अधूरे हम

आधे-अधूरे हम

एक वे हैं जो केवल , अधिकारों की हमेशा करते हैं मांग। अधिकारों के शोर में, भूल जाते है कर्तव्यों को । एक वे हैं,…

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कविता व्यर्थ ही चिन्ता किए क्यों जाते !

व्यर्थ ही चिन्ता किए क्यों जाते !

(मधुगीति १९०८११ अकासा) व्यर्थ ही चिन्ता किए क्यों जाते, छोड़ क्यों उनके लिए ना देते; करने कुछ उनको क्यों नहीं देते, समर्पण करके क्यों न ख़ुश होते ! कहाँ हर प्राण सहज गति है रहा, जटिलता भरा विश्व विचरा किया; ज़रूरी उनसे योग उसका है, समर्पित उसको उन्हें करना है ! कार्य जो कर सको उसे कर लो, शेष सब उनके हवाले कर दो; उचित विधि उसको लिए जावेंगे, क्षीण संस्कार करा भेजेंगे ! किए रचना जगत में धाया करो, सोच ना विचित्रों को लाया करो; चित्र जो बन रहे बना लो तुम, इत्र उनको भी कुछ छिड़कने दो ! पाएँगे कर वे कुछ ज्यों छोड़ोगे, किसी रस और में वे बोरेंगे; ‘मधु’ कुछ छोड़ भी जगत देते, प्रभु औ प्रकृति द्युति लखे चलते !  ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’

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कविता दोषी ना प्राणी कोई जग होता !

दोषी ना प्राणी कोई जग होता !

(मधुगीति १९०८१० सकारा) दोषी ना प्राणी कोई जग होता,  सृष्टि परवश है वह पला होता; कहाँ वश उसके सब रहा होता, लिया गुण- धर्म परिस्थिति होता ! बोध कब बालपन रहा होता, खिलाता जो कोई है खा लेता; बताता जैसा कोई वह करता, धर्म जो सिखाता वो अपनाता ! विवेक अपना पनप जब जाता, समझ कुछ तत्व विश्व में पाता; ज्ञान सापेक्ष जितना हो पाता, बदल वह स्वयं को है कुछ लेता ! कहाँ सम्भव है बदलना फुरना, कहाँ आसान है प्रकृति पुनि रचना; कहाँ जीवन की राह सब मिलता, कहाँ जाती है ग्लानि सकुचाना ! साधना समर्पण है जब होता, मुक्ति रस पान प्रचुर जब होता; ‘मधु’ को प्रभु का भान तब होता, फिर कहाँ भेद दृष्टि रह पाता ! ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’

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महत्वपूर्ण लेख पहलू खान की हत्या किसी ने नहीं की

पहलू खान की हत्या किसी ने नहीं की

डॉ. वेदप्रताप वैदिक पहलू खान की हत्या 1 अप्रैल 2017 को अलवर में हुई थी। उसे गायों की तस्करी करने के शक में 6 लोगों…

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चिंतन “सत्यार्थप्रकाश सद्धर्म का प्रकाशक ग्रन्थ”

“सत्यार्थप्रकाश सद्धर्म का प्रकाशक ग्रन्थ”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। मनुष्य एक चेतन प्राणी है। चेतन का स्वभाव गुण व कर्म की क्षमता से युक्त होना है। न केवल मनुष्य अपितु…

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राजनीति उत्तर प्रदेश के धर्म स्थलों को गिराकर मुस्लिम इमारतों का निर्माण

उत्तर प्रदेश के धर्म स्थलों को गिराकर मुस्लिम इमारतों का निर्माण

उत्तर प्रदेश के धर्म स्थलों को गिराकर मुस्लिम इमारतों का निर्माण मूल लेखक : सीताराम गोयल हिन्दी लेखन : डा. राधेश्याम द्विवेदी इस सूची में…

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लेख काजी नजरुल इस्लाम

काजी नजरुल इस्लाम

गङ्गानन्द झा काजी नजरुल इस्लाम मूलतः विद्रोही कवि के रुप में परिचित हैं. लेकिन उनके श्यामासंगीत और इस्लामी भक्ति मूलक कलाम भी उत्कृष्ट कोटि के…

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लेख दुनिया को चाहिए मानवता का प्रकाश

दुनिया को चाहिए मानवता का प्रकाश

-ललित गर्ग- विश्व मानवीय दिवस प्रत्येक वर्ष 19 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिवस पर उन लोगों को याद किया जाता है, जिन्होंने मानवीय…

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राजनीति राजनीति में शुचिता व समन्वय के पर्याय अटल बिहारी वाजपेयी

राजनीति में शुचिता व समन्वय के पर्याय अटल बिहारी वाजपेयी

 बृजनन्दन राजू  देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रथम पुण्यतिथि पर हर कोई उन्हें अपने तरीके से याद कर रहा है।…

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