कला-संस्कृति करवा चौथ

करवा चौथ

आजकल त्यौहारों का मौसम है। एक के बाद एक त्यौहार… इस कड़ी में अब करवा चौथ आने वाली है। हर त्यौहार की तरह इस त्यौहार…

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शख्सियत दृढ़ और सौम्य राजनेता: राजमाता विजयाराजे सिंधिया

दृढ़ और सौम्य राजनेता: राजमाता विजयाराजे सिंधिया

राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 100वीं जयंती पर स्मरण आलेख विवेक कुमार पाठक राष्ट्रवादी विचारधारा से लेकर जनसंघ से जन्मी और राजमाता द्वारा पाली पोसी गई…

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विश्ववार्ता स्वेच्छा से ही घटेगा प्लास्टिक का उपयोग

स्वेच्छा से ही घटेगा प्लास्टिक का उपयोग

– योगेश कुमार गोयल             केन्द्र सरकार द्वारा प्रदूषण पर रोकथाम तथा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अभी ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ (एकल उपयोग वाली…

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आर्थिकी मनमानी अब और नहीं

मनमानी अब और नहीं

                                                                               इ. राजेश पाठक                                                                                           सन २००८ में अमेरिका एक आर्थिक मंदी के दौर से गुजर चुका है. अपनी बहुचर्चित किताब, ‘मुद्रा की माया:विश्व का…

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धर्म-अध्यात्म वैदिक धर्म क्यों महान है?

वैदिक धर्म क्यों महान है?

–मनमोहन कुमार आर्य,                संसार में अनेक मत-मतान्तर प्रचलित हैं जो विगत पांच सौ से पांच हजार वर्षों में उत्पन्न हुए हैं। इन मतों ने…

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राजनीति विजय-उद्बोधन के विजयी स्वर

विजय-उद्बोधन के विजयी स्वर

 ललित गर्ग अस्तित्व को पहचानने, दूसरे अस्तित्वों से जुड़ने, राष्ट्रीय पहचान बनाने और अपने अस्तित्व को राष्ट्र एवं समाज के लिये उपयोगी बनाने के लिये…

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धर्म-अध्यात्म निराकार ईश्वर की उपासना, अवैदिक मूर्तिपूजा और काशी शास्त्रार्थ

निराकार ईश्वर की उपासना, अवैदिक मूर्तिपूजा और काशी शास्त्रार्थ

–मनमोहन कुमार आर्य                वेद सृष्टि की आदि में ईश्वर द्वारा चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य तथा अंगिरा को दिया गया ज्ञान है जो सब…

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गजल नेत्र जब नवजात का झाँका किया!

नेत्र जब नवजात का झाँका किया!

नेत्र जब नवजात का झाँका किया, शिशु जब था समय को समझा किया; पात्र की जब विविधता भाँपा किया, देश की जब भिन्नता आँका किया ! हर घड़ी जब प्रकृति कृति देखा किया, हर कड़ी की तरन्नुम ताका किया; आँख जब हर जीव की परखा किया, भाव की भव लहरियाँ तरजा किया ! रहा द्रष्टा पूर्व हर जग दरमियाँ, बाद में वह स्वयं को निरखा किया; देह मन अपना कभी वह तक लिया, विलग हो आभास मैं पन का किया ! महत से आकर अहं को छू लिया, चित्त को करवट बदलते लख लिया; पुरुष जो भीतर छिपा प्रकटा किया, परम- पित की पात्रता खोजा किया ! प्रश्न जब प्रति घड़ी जिज्ञासु किया, निगम आगम का समाँ बाँधा किया; ‘मधु’ उसमें प्रभु अपना पा लिया, प्राण के अपरूप का दर्शन किया !  ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’ 

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लेख अगर रावण ने विभीषण को भगाया न होता |

अगर रावण ने विभीषण को भगाया न होता |

अगर रावण ने विभीषण को भगाया न होता | तो रावण के कुल का इतना विनाश न होता | अगर लक्ष्मण राम का सदा साथ…

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राजनीति भारत में न्याय और राम मंदिर

भारत में न्याय और राम मंदिर

भारत का सर्वोच्च न्यायालय विश्व के सशक्त न्यायालयों में गिना जाता है । इसने स्वतंत्रता उपरांत के बीते 72 वर्षों में अनेकों बार कार्यपालिका का…

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महत्वपूर्ण लेख हिन्दूराष्ट्र स्वप्नद्रष्टा : वीर बंदा बैरागी

हिन्दूराष्ट्र स्वप्नद्रष्टा : वीर बंदा बैरागी

——————————————–– अध्याय —— 3 गुरु तेग बहादुर जी और उनका बलिदान त्याग और बलिदान की मिलती अनुपम सीख ।देश धर्म के वास्ते पैदा की नई…

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कविता दशहरा

दशहरा

अधर्म पर धर्म की , असत्य पर सत्य की , बुराई पर अच्छाई की , पाप पर पुण्य की , अज्ञान पर ज्ञान की, अत्याचार…

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