राजनीति यह सशक्तीकरण है जनाब,तुृष्टीकरण नहीं…

यह सशक्तीकरण है जनाब,तुृष्टीकरण नहीं…

भारतीय राजनीति में अल्पसंखयकों को दरकिनार कर बहुसंयवाद की राजनीति करने के आरोपों का सामना करने वाली भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार ने पिछले…

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कविता ये है वर्तमान परिवेश

ये है वर्तमान परिवेश

ये है वर्तमान परिवेश, ये है वर्तमान परिवेश।। दम तोड़ती है इन्सानियत,इन्सान बचा है शेष कोई है अधकचरा शिक्षक, नेतागीरी करता गपशप छोटी सी भी…

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राजनीति जनजातीय जीवन की उम्मीद है अर्जुन मुंडा

जनजातीय जीवन की उम्मीद है अर्जुन मुंडा

-ललित गर्ग – नरेन्द्र मोदी सरकार के कद्दावर मंत्रियों की बात होती है तो एक नाम है अर्जुन मुंडा का। उन्होंने राजनीतिक जिजीविषा एवं प्रशासनिक…

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कविता आज के दफ्तरों पर एक कुण्डली

आज के दफ्तरों पर एक कुण्डली

अफसर करे न अफसरी,बाबू करे न काम | चपरासी भी सो रहा,लेकर कुर्सी है थाम ||लेकर कुर्सी है थाम,अब कैसे काम चलेगा |रिश्वत देने वाला आये,पूरा…

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राजनीति ममता की नुसरत संसद की बनी नूर

ममता की नुसरत संसद की बनी नूर

 इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा।  लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ।।              …

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कविता झूठ बोलते बोलते,सच को झुठलाते गये

झूठ बोलते बोलते,सच को झुठलाते गये

झूठ बोलते बोलते,सच को झुठलाते गये |क्योकि लोगो की जवां पर ताले पड गये || थक गये राहो में,चलना है मुश्किल |क्योकि उनके पाँवो में…

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विधि-कानून यूपी में पुलिस से ज्यादा खतरनाक हैं उसके ‘लठैत’

यूपी में पुलिस से ज्यादा खतरनाक हैं उसके ‘लठैत’

संजय सक्सेना,लखनऊ लखनऊ। अगर आप उत्तर प्रदेश में हैं या फिर किसी काम से आ रहे हैं तो यूपी पुलिस ही नहीं उसके ‘लठैतों’ से…

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समाज बिहार: दुर्व्यवस्था के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करना बना अपराध?

बिहार: दुर्व्यवस्था के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करना बना अपराध?

निर्मल रानी   ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लोकतंत्र की परिभाषा शायद अब बदलने लगी है। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहे जाने वाले भारतवर्ष…

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गजल हिंदी गजल

हिंदी गजल

बिगड़ी हुई आदतें पलती गईं, अहबाब को सुधारने का शुक्रिया। कोना कोना करकट बिखरा हुआ, अँगनाई को झाड़ने का शुक्रिया। नियाइश की आज तो उम्मीद…

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धर्म-अध्यात्म “पूजा किसकी, क्यों व कैसे करें?”

“पूजा किसकी, क्यों व कैसे करें?”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। पूजा शब्द का प्रयोग मूर्तिपूजा अथवा देवपूजा आदि के सन्दर्भ में किया जाता है। पूजा का अर्थ यथायोग्य आदर, सत्कार व…

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कविता बारिश हो इतनी,कि सब नफरते धुल जाये

बारिश हो इतनी,कि सब नफरते धुल जाये

बारिश हो इतनी,कि सब नफरते धुल जाये |आपस के हमारे सब गिले-शिकवे धुल जाये || इन्सानियत तरस गयी है,अब मोहब्बत के शैलाब को |मन-मुटाव को…

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लेख आज तक भटकती ये जाति

आज तक भटकती ये जाति

अनिल अनूप हिंदुस्तान की एक बड़ी आबादी के बीच एक तबक़ा ऐसा भी है, जिसे आज़ादी के अरसे बाद भी मुजरिमों की तरह पुलिस थानों…

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