प्रवक्ता न्यूज़ मोदी सरकार में शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने का एक सार्थक प्रयास

मोदी सरकार में शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने का एक सार्थक प्रयास

संसद में २०१७ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संसोधन विधेयक पारित कराकर ये लक्ष्य निर्धारित किया गया कि ३१ मार्च, २०१९ से पूर्व पूरे…

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कविता तब हर पल होली हो जाता है…

तब हर पल होली हो जाता है…

अरुण तिवारी जब घुप्प अमावस के द्वारे कुछ किरणें दस्तक देती हैं, सब संग मिल लोहा लेती हैं, कुछ शब्द, सूरज बन जाते हैं, तब…

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राजनीति लोकसभा चुनाव से जुड़ी रोचक जानकारियाँ

लोकसभा चुनाव से जुड़ी रोचक जानकारियाँ

राकेश कुमार आर्य भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है । अब जबकि हमारे देश में 17वीं लोकसभा के चुनाव हो रहे हैं तो विश्व…

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जन-जागरण सटीक सूचनाएं परोसिए समाचारी खिचड़ी नहीं

सटीक सूचनाएं परोसिए समाचारी खिचड़ी नहीं

विवेक कुमार पाठकरोज प्रतिपल गरजते टीवी चैनल देख लीजिए सोशल मीडिया पर दनादन पोस्ट देख लीजिए। इससे समय मिल जाए तो चैराहों, मोहल्लों, पार्कों और…

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कविता होली है

होली है

मेरे दिल का कोई कमरा तेरे रहने की खोली है, कहीं रहता मेरा बचपन कहीं बच्चों की टोली है। मचलते हैं कहीं बूढ़े गुलाबी खुश्बुएं…

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प्रवक्ता न्यूज़ टी बी है इंफर्टिलिटी का मुख्य कारण

टी बी है इंफर्टिलिटी का मुख्य कारण

डॉ.सागरिका अग्रवाल,आई वी एफ एक्स पर्ट,इंदिरा आईवीएफ हास्पिटल नई दिल्ली दुनिया में क्षयरोग (टीबी) से जुड़े 20 लाख से अधिक मामले हैं और इससे संबंधित…

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कविता कौन मिलेगा खाक में,और कौन आबाद।

कौन मिलेगा खाक में,और कौन आबाद।

कौन मिलेगा खाक में,और कौन आबाद। होगा इसका फैसला,थोड़े दिन के बाद।। किससे जनता खुश हुई,किससे है नाशाद। होगा इसका फैसला,थोड़े दिन के बाद॥ चमचों…

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राजनीति पाकिस्तान में अत्याचारों से जूझता हिन्दू…

पाकिस्तान में अत्याचारों से जूझता हिन्दू…

        यह कैसी विडंबना है कि बांग्लादेशी व म्याँमार के मुसलमानों के लिये सेक्युलर व मानवाधिकारवादी सहित देश-विदेश का मुस्लिम समाज एकजुट होकर उनके पक्ष…

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दोहे संस्कार की शुभ गति निरखि !

संस्कार की शुभ गति निरखि !

संस्कार की शुभ गति निरखि, आभोग को कबहू परखि; मम मन गया सहसा चहकि, कबहुक रहा था जो दहकि ! झिझके झुके झिड़के जगत, भिड़के भयानक युद्ध रत; हो गए जब संयत सतत, भव बहावों से हुए च्युत ! बाधा व्यथा तब ना रही, धुनि समर्पण की नित रही; चाहत कहाँ तब कोई रही, जो मिल गया भाया वही ! भावों में भुवनेश्वर रमा, ईशत्व में स्वर को समा; ऐश्वर्य में उर प्रस्फुरा, आलोक लख लुप्तित धरा ! घन-श्याम में हर लहर तकि, ब्रज धाम गोपी रस थिरकि; ‘मधु’ परसि प्राणों की झलक, प्रभु की धरा पाए कुहक !

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दोहे विश्वास ना निज स्वत्व में !

विश्वास ना निज स्वत्व में !

विश्वास ना निज स्वत्व में,  अस्तित्व के गन्तव्य में; ना भरोसा जाया है जो, ले जाएगा ले दिया जो !  बुद्धि वृथा ही लगा कर, आत्मा की बिन पहचान कर; ना नियंता को जानते, ना सृष्टि की गति चीन्हते ! आखेट वे करते फिरे, आक्रोश में झुलसे रहे; बिन बात दूजों को हने, वे स्वयं के भी कब रहे ! राहों को वे मुश्किल किए, राहत किसी को कब दिए; चाहत किसी की कहँ लखे, व्याहत हुए बिन रब तके ! ‘मधु’ की महक औ ठुमक में, रचना के रस की ललक में; वे सहज हो पाए नहीं, आ स्वयम्भू की गोद में !

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कविता होली में क्या क्या होना चाहिए

होली में क्या क्या होना चाहिए

होली में जब तक हलवाई ना हो |देशी घी की मिठाई बनाई ना हो ||गर्म गर्म भांग के पकोड़े ना हो |उन पर चटनी की…

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राजनीति कल तक वो रीना थी लेकिन आज “रेहाना” है

कल तक वो रीना थी लेकिन आज “रेहाना” है

दिन की शुरुआत अखबार में छपी खबरों से करना आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन कुछ खबरें सोचने के लिए मजबूर…

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