“ईश्वर-मनुष्य संबंध व्याप्य-व्यापक, स्वामी-सेवक और पिता-पुत्र का है”
Updated: October 1, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, ईश्वर इस संसार की रचना करने वाले, पालन करने वाले तथा सृष्टि की अवधि पूरी होने पर इसकी प्रलय करने वाली सच्चिदानन्दस्वरूप,…
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श्राद्ध , श्रद्धा है या आडम्बर
Updated: October 1, 2018
जीवन में अजीब अचम्भा देखा जीते जी आदमी को भूखा देखा मरने के बाद उसको खाते देखा सदियों से चलती इस रीति को देखा श्राद्ध…
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पाकिस्तान में शरीफ भैंस
Updated: September 29, 2018
– विजय कुमार, किसी समय दूध का अर्थ था, जंगल में चरने वाली देसी गाय का दूध; पर समय बदला, तो दूध कई तरह का…
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व्यभिचार को सामाजिक स्वीकृति मिलना असंभव
Updated: September 29, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक स्त्री-पुरुष संबंधों के बारे में सर्वोच्च न्यायालय ने जो फैसला दिया है, ज्यादातर लोग उसकी तारीफ कर रहे हैं। उसे क्रांतिकारी बता…
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“क्या हमारा वर्तमान का जन्म पिछले जन्म का पुनर्जन्म नहीं है?”
Updated: September 29, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, वेद और वैदिक परम्परा में ईश्वर व जीवात्मा को सनातन, अजन्मा, अमर, अविनाशी, जन्म व मरण के बन्धन में बन्धा हुआ और…
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जीवन की राह: शांति की चाह
Updated: September 29, 2018
ललित गर्ग – आज हर व्यक्ति चाहता है – हर दिन मेरे लिये शुभ, शांतिपूर्ण एवं मंगलकारी हो। संसार में सात अरब मनुष्यों में कोई…
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महिला के हक और सम्मान के प्रति सजग हैं रिया
Updated: September 28, 2018
अनिल अनूप मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, जिन्हें “जलेबी” फिल्म में देखा जाएगा, कहते हैं कि भारत और देश जैसे पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की…
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श्राद्ध पर कुंडलिया
Updated: September 28, 2018
जब तक श्रद्धा न हो,श्राद्ध करना है बेकार किसी ने हाल न पुछा,जब था बाँप बीमार जब था बीमार,किसी ने दवाई को न पूछा मर…
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विवादों का खरीदार बिग बॉस
Updated: September 29, 2018
विवेक कुमार पाठक बिग बॉस टेलीविजन शो का 12 वां संस्करण दर्शकों के सामने परोसा जा रहा है। ये शो एक अजब गजब शो है।…
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कीटाणुओं पर प्रहार करेगा अदालत से सीधा प्रसारण
Updated: September 28, 2018
विवेक पाठक पारदर्शिता हमेशा पर्दे और कोनों में छिपी बुराइयों पर प्रहार करती है। दुनिया की तमाम बुराइयां पारदर्शिता के अभाव में पनपती हैं। हमें…
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विकृति को बढ़ावा देनेवाले फैसले
Updated: September 28, 2018
बिपिन किशोर सिंहा सुप्रीम कोर्ट देश का सर्वोच्च न्यायालय है। इसके फैसले कानून बन जाते हैं। अतः जिस फैसले से समाज का स्वस्थ तानाबाना तार-तार…
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दर्द भी दिया अपनों ने
Updated: September 28, 2018
डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ भी दिया अपनों ने उम्मीद भी अपनों से जाएँ कहा बिना उनके अपने तो अपने होते हैं। वो दूर चले गए कितने या हम पास न रह पाए कहने को तो बहुत है पर अपने तो अपने होते हैं। गिला-शिकवा अपनों से आस लगा के छोड़ देना आख़िर भुलाएँ तो कैसे अपने तो अपने होते हैं।
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