राजनीति जानिये कैसे राहुल और शिवराज के लिए मध्यप्रदेश का यह चुनाव टर्निग पॉइंट है?

जानिये कैसे राहुल और शिवराज के लिए मध्यप्रदेश का यह चुनाव टर्निग पॉइंट है?

जावेद अनीस क्या 16 मई 2014 के बाद 11 दिसबंर 2018 की तारीख भारतीय राजनीति के लिये बहुत अहम् साबित होने वाली है ? ऐसा…

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समाज बाल मजदूरी की हकीकत और हम

बाल मजदूरी की हकीकत और हम

अनिल अनूप यह माना जाता है कि भारत में 14 साल के बच्चों की आबादी पूरी अमेरिकी आबादी से भी ज़्यादा है. भारत में कुल…

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धर्म-अध्यात्म “यज्ञ-स्वाध्याय-सत्संग आदि के प्रेरक महात्मा दयानन्द वानप्रस्थ”

“यज्ञ-स्वाध्याय-सत्संग आदि के प्रेरक महात्मा दयानन्द वानप्रस्थ”

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                 महात्मा दयाननन्द जी वानप्रस्थ वैदिक साधन आश्रम तपोवन में दीर्घकाल तक रहे और यहां रहकर साधकों को साधना का प्रशिक्षण…

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समाज प्यार ने दिलाई धंधे से मुक्ति

प्यार ने दिलाई धंधे से मुक्ति

अनिल अनूप “पहले तो वो कभी-कभी कोठे पर आता था. कभी मेरे साथ तो कभी किसी और लड़की के साथ बैठता था…”“लेकिन धीरे-धीरे जैसे वो…

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समाज शब्दों के जरिए सांस्कृतिक फासले भरने की कोशिश

शब्दों के जरिए सांस्कृतिक फासले भरने की कोशिश

अनिल अनूप लुधियाना में बिहारी प्रवासी मजदूर हर काम में नहीं हैं. जैसे यहाँ के साइकिल उद्योग में उनका अनुपात उतना नहीं है जितना हौजरी…

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महिला-जगत दर्द दर्द में फर्क तो है…. .

दर्द दर्द में फर्क तो है…. .

अनिल अनूप ऑनलाइन ब्रिटिश अख़बार ‘द इंडीपेंडेंट’ में बीते दिनों एक लेख प्रकाशित हुआ जो यह तथ्य रेखांकित करता था कि महिलाओं में मासिक धर्म…

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मनोरंजन फिल्मी यौन क्रांति की पहली महिला “रेहाना”

फिल्मी यौन क्रांति की पहली महिला “रेहाना”

फिल्मी यौन क्रांति की पहली महिला “रेहाना”“मैंने इतने नंगे मर्द देखे हैं कि मुझे अब कपड़े पहने हुए पुरुषों से नफ़रत होने लगी है.” साल…

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कविता आज का आदमी

आज का आदमी

आज का आदमी,आदमी कहाँ रह गया है वह तो आज की,चकाचोंध में बह गया हैअगर आज, आदमी,आदमी होता तो वह आज की चकाचोंध में न बहता  आज…

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समाज मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का

मानवाधिकार दिवस समय है आत्ममंथन करने का

डॉ नीलम महेंद्रद्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सम्पूर्ण विश्व में मानव समाज एक बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। यह वो समय था जब मानव…

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धर्म-अध्यात्म “क्या हमारे प्रचारकों का जीवन ऋषि दयानन्द  व स्वामी श्रद्धानन्द आदि के समान हैं”

“क्या हमारे प्रचारकों का जीवन ऋषि दयानन्द व स्वामी श्रद्धानन्द आदि के समान हैं”

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                 आर्यसमाज का उद्देश्य वेदों के सिद्धान्तों, मान्यताओं व विचारधारा का जन-जन में प्रचार करना है। यह कार्य आर्यसमाज के अनुयायी…

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साहित्‍य बनारसी गुरु और बांसुरी : जिनका सिर्फ इतना परिचय ही काफी है

बनारसी गुरु और बांसुरी : जिनका सिर्फ इतना परिचय ही काफी है

अनिल अनूप अगर कोई आपसे कहे कि रन-मशीन को एक शब्द में परिभाषित करें तो आप तुरंत कहेंगे सचिन तेंडुलकर। ऐसे ही अगर कोई कहे…

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समाज स्वस्थ यौन संबंध और आपका परिवार

स्वस्थ यौन संबंध और आपका परिवार

अनाल अनूपआज भी भारत में सेक्स को वर्जना की तरह देखा जाता है। जबकि हमारे देश में खजुराहो से लेकर वात्सायन के कामसूत्र जैसी कृतियों…

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