राजनीति बेहतर कल के लिए आज परिवार नियोजन

बेहतर कल के लिए आज परिवार नियोजन

देवेंद्रराज सुथार अनियंत्रित गति से बढ़ रही जनसंख्या देश के विकास को बाधित करने के साथ ही हमारे आम जन जीवन को भी दिन-प्रतिदिन प्रभावित…

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राजनीति विश्व गुरु को बना रहे हैं विश्व-चेला

विश्व गुरु को बना रहे हैं विश्व-चेला

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज दो खबरों ने मेरा ध्यान एक साथ खींचा। एक तो दक्षिण कोरिया के सहयोग से दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल फोन…

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धर्म-अध्यात्म “ऋषि दयानन्द के देश व मानवता के हित के अनेक कार्यों में एक कार्य वेदों का उद्धार”

“ऋषि दयानन्द के देश व मानवता के हित के अनेक कार्यों में एक कार्य वेदों का उद्धार”

  मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने मानवता, समाज व देश हित के अगणित कार्य किये हैं। सब सुधारों का मूल वेदाध्ययन व वेदाचरण है।…

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राजनीति मिशन 2019 से पहले 2018 की चुनौती  कांग्रेस के लिये करो या मरो का सवाल

मिशन 2019 से पहले 2018 की चुनौती  कांग्रेस के लिये करो या मरो का सवाल

जावेद अनीस इस साल के अंत तक मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में चुनाव होने है. यह सही मायनों में 2019 में होने वाले देश…

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समाज हरिद्वार में कवियों का सम्मेलन

हरिद्वार में कवियों का सम्मेलन

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज हरिद्वार में कवि-सम्मेलन नहीं, कवियों का सम्मेलन हुआ। कवि सम्मेलन में हजारों-लाखों श्रोता होते हैं। यहां सिर्फ कवि थे। सारे भारत…

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कविता पिया की प्रतीक्षा में जगती रही

पिया की प्रतीक्षा में जगती रही

पिया की प्रतीक्षा में जगती रही रात भर करवटे बदलती रही स्वप्न भी हो गये अब स्वप्न जैसे कोई हो गया हो  दफन कब आओगे…

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समाज  वर्षा जल संचयन से रोकें बारिश के पानी की बर्बादी 

 वर्षा जल संचयन से रोकें बारिश के पानी की बर्बादी 

देवेंद्रराज सुथार मानसून का महीना हर किसी को आत्मिक आनंद से सराबोर करने वाला होता है। इस समय नील व्योम काली घटाओं के कैद में…

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कविता आए रहे थे कोई यहाँ !

आए रहे थे कोई यहाँ !

(मधुगीति १८०७०३ स) आए रहे थे कोई यहाँ, पथिक अजाने; गाए रहे थे वे ही जहान, अजब तराने ! बूझे थे कुछ न समझे, भाव उनके जो रहे; त्रैलोक्य की तरज़ के, नज़ारे थे वे रहे ! हर हिय को हूक दिए हुए, प्राय वे रहे; थे खुले चक्र जिनके रहे, वे ही पर सुने ! टेरे वे हेरे सबको रहे, बुलाना चहे; सब आन पाए मिल न पाए, परेखे रहे ! जो भाए पाए भव्य हुए, भव को वे जाने; ‘मधु’ उनसे मिल के जाने रहे, कैसे अजाने ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’

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धर्म-अध्यात्म ‘संसार में वेदों की प्रतिष्ठा ऋषि दयानन्द के अतिरिक्त अन्य कोई विद्वान कर नहीं पायाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय’

‘संसार में वेदों की प्रतिष्ठा ऋषि दयानन्द के अतिरिक्त अन्य कोई विद्वान कर नहीं पायाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय’

–मनमोहन कुमार आर्य,  गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के परिसर में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय गुरुकुल महासम्मेलन के समापन दिवस पर वेद एवं संस्कृति सम्मेलन का…

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कविता एक हास्य व व्यंग कविता

एक हास्य व व्यंग कविता

पेट्रोल के दाम बढ़ रहे फिर भी वाहन चल रहे महंगाई भी रोजना बढ़ रही फिर भी लोग होटल में खा रहे सत्ता के सब…

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कविता अब तो आ जाओ सनम

अब तो आ जाओ सनम

दिन ढल चूका है,शाम हो गई है चिराग जल चुके है,रात हो गई है मिटाने जा रहे है, वे अपने गम न जाने कहाँ हो…

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धर्म-अध्यात्म ‘जिस स्थान पर यज्ञ होता है वहां की भूमि पवित्र हो जाती हैः स्वामी आनन्दवेश’

‘जिस स्थान पर यज्ञ होता है वहां की भूमि पवित्र हो जाती हैः स्वामी आनन्दवेश’

  मनमोहन कुमार आर्य, हरिद्वार में आयोजित तीन दिवसीय गुरुकुल महासम्मेलन का आज 8 जुलाई, 2018 को समापन दिवस था। हम देहरादून से प्रातः चलकर…

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