चुनावी खुशबू ‘आप’ को समझा गई चुप्पी हानिकारक है ?
Updated: June 18, 2018
पारसमणि अग्रवाल चुनावी दस्तक होते ही राजनैतिक दलों में हलचल मच जाती है। गोटें बिछने का दौर शुरू हो जाता है और सियाशी रोटियां सिकने…
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कश्मीर पर आई तथाकथित यूएन की रिपोर्ट एक साजिश है
Updated: June 18, 2018
डॉ मनीष कुमार कश्मीर पर UN की ‘रिपोर्ट’ आई तो वामपंथी गैंग के चेहरे पर मुस्कान आ गई क्योंकि इनकी हिंदुस्तान को बदनाम करने की…
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कश्मीरः सीज़फ़ायर बना ‘आतंकियों की ईद’?
Updated: June 18, 2018
तनवीर जाफ़री पिछले महीने जम्मू-कश्मीर राज्य की पीडीपी-भाजपा संयुक्त सरकार की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती द्वारा माह-ए-रमज़ान शुरु होने से पहले राज्य में भारतीय सेना…
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२७ बार रक्तदान कर आदर्श उपस्थित करने वाले आदर्श व्यक्ति-“आर्यसमाज धामावाला- डा. विनीत कुमार”
Updated: June 18, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज धामावाला-देहरादून ऋषि दयानन्द के कर कमलों से स्थापित आर्यसमाज है। विश्व में किसी मुस्लिम बन्धु की उसके पूरे परिवार सहित पहली…
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“सत्य को मानना व मनवाना हमारा कर्तव्य, धर्म एवं यज्ञ है
Updated: June 18, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि दयानन्द (1825-1883) ने वेद व उसकी मान्यताओं और सिद्धान्तों पर आधारित धर्म के प्रचार व प्रसार के लिए 10 अप्रैल, सन्…
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कब तक शहादत देते रहेगे हम,अपने वीर जवानो की
Updated: June 17, 2018
कब तक शहादत देते रहेंगे हम अपने वीर जवानो की उठो जवानो अब देर करो मत,कसम तुम्हे अपनी जवानी की काट लाओ धड सहित सर…
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भारत की खाप पंचायतों के तालिबानी फरमान
Updated: June 17, 2018
राकेश कुमार आर्य  भारत में प्रचलित खाप पंचायतों के विरुद्ध शिक्षित वर्ग और देश के न्यायालयों की कड़ी आपत्ति समय-समय पर आती रही है।…
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फ़ादर्स डे बनाम तर्पण
Updated: June 16, 2018
मनोज कुमार रिश्ते में हम तेरे बाप लगते हैं, तब लगता है कि बाप कोई बड़ी चीज होता है लेकिन बाज़ार ने ‘फादर्स डे’ कहकर…
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जीवन जीने की कला है योग
Updated: June 16, 2018
डॉ नीलम महेन्द्र योग के विषय में कोई भी बात करने से पहले जान लेना आवश्यक है कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि…
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आज आया लाँघता मैं ! आज की अभी की
Updated: June 16, 2018
गोपाल बघेल ‘मधु’ आज आया लाँघता मैं, ज़िन्दगी में कुछ दीवारें ; खोलता मैं कुछ किबाड़ें, झाँकता जग की कगारें ! मिले थे कितने नज़ारे, पास कितने आए द्वारे; डोलती नैया किनारे, बैठ पाते कुछ ही प्यारे ! खोजते सब हैं सहारे, रहे हैं जगती निहारे; देख पर कब पा रहे हैं, वे खड़े द्रष्टि पसारे ! क्षुब्ध क्यों हैं रुद्ध क्यों हैं, व्यर्थ ही उद्विग्न क्यों हैं; प्रणेता की प्रीति पावन, परश क्यों ना पा रहे हैं ! जा रहे औ आ रहे हैं, जन्म ले भरमा रहे हैं; ‘मधु’ घृत पी पा रहे हैं, नयन उनके खो रहे हैं ! ’
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“ऋषि दयानन्द का उद्देश्य सद्ज्ञान देकर आत्माओं को परमात्मा से मिलाना था”
Updated: June 16, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, महाभारत के बाद ऋषि दयानन्द ने भारत ही नहीं अपितु विश्व के इतिहास में वह कार्य किया है जो संसार में अन्य…
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बुखारी और दानव अधिकार आयोग
Updated: June 16, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की निर्मम हत्या का अर्थ क्या है ? यह हत्या उस समय की गई है जबकि…
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