कविता हुनरमंद है वो 

हुनरमंद है वो 

विनोद सिल्ला वो भिगो लेता है शब्दों को स्वार्थ की चाशनी में रंग जाता है अक्सर अवसरवादिता के रंग में वो धार लेता है मौकाप्रसती…

Read more
धर्म-अध्यात्म “मनुष्य वही है जो सदा सत्य का आचरण करता है”

“मनुष्य वही है जो सदा सत्य का आचरण करता है”

मनमोहन कुमार आर्य,  मनुष्य क्या वास्तव में मनुष्य है? यह प्रश्न इसलिये करना पड़ रहा है कि किसी देश व समाज के जो नियम होते…

Read more
राजनीति थम नहीं रहा सैनिकों के साथ बर्बरता का सिलसिला

थम नहीं रहा सैनिकों के साथ बर्बरता का सिलसिला

प्रमोद भार्गव इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि अब पाकिस्तान के रुख में बदलाव आएगा…

Read more
राजनीति राफेल डील : राहुल गांधी सौ जूते भी खाएंगे और सौ प्याज़ भी?

राफेल डील : राहुल गांधी सौ जूते भी खाएंगे और सौ प्याज़ भी?

डॉ मनीष कुमार एक पुरानी कहावत है सौ जूते भी खाया और सौ प्याज भी खाए. लेकिन बहुत कम लोग इस कहावत के पीछे की…

Read more
राजनीति तभी भारत आयुष्मान बन सकेगा! 

तभी भारत आयुष्मान बन सकेगा! 

 ललित गर्ग  आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा की धरती रांची से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘आयुष्मान भारत’ के नाम से जिस आरोग्य योजना को शुरु किया…

Read more
राजनीति सवालों के घेरे में राफेल ?

सवालों के घेरे में राफेल ?

प्रमोद भार्गव लड़ाकू विमान राफेल की खरीद में जिस तरह के वाद-विवाद सामने आ रहे हैं, उससे लगता है, दाल में कुछ काला संभव है।…

Read more
कविता माँ का स्थान  कोई नहीं ले सकता —

माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता —

आर के रस्तोगी  माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता माँ का ऋण कोई चुका नहीं सकता कितने भी लाख करो दान व तीर्थ माँ…

Read more
गजल  यकीं का यूँ बारबां टूटना  

 यकीं का यूँ बारबां टूटना  

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ यकीं का यूँ बारबां टूटना आबो-हवा ख़राब है मरसिम निभाता रहूँगा यही मिरा जवाब है मुनाफ़िक़ों की भीड़ में कुछ नया न मिलेगा ग़ैरतमन्दों में नाम गिना जाए यही ख़्वाब है दफ़्तरों की खाक छानी बाज़ारों में लुटा पिटा रिवायतों में फँसा ज़िंदगी का यही हिसाब है हार कर जुदा, जीत कर भी कोई तड़पता रहा नुमाइशी हाथों से फूट गया झूँठ का हबाब है धड़कता है दिल सोच के हँस लेता हूँ कई बार  तब्दील हो गया शहर मुर्दों में जीना अज़ाब है ये लहू, ये जख़्म, ये आह, फिर चीखो-मातम तू हुआ न मिरा पल भर इंसानियत सराब है  फ़िकरों की सहूलियत में आदमियत तबाह हुई  पता हुआ ‘राहत’ जहाँ का यही लुब्बे-लुबाब है  

Read more
धर्म-अध्यात्म “अग्निहोत्र-यज्ञ क्यों करें?”

“अग्निहोत्र-यज्ञ क्यों करें?”

–मनमोहन कुमार आर्य,  सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य व अंगिरा को वेदों का भाषा व उनके अर्थ सहित ज्ञान…

Read more
कविता सबसे अच्छा खिलौना 

सबसे अच्छा खिलौना 

विनोद सिल्ला बचपन में मेरे मित्र थोड़ी सी अनबन होने पर दुखाने के लिए मेरा दिल मेरे मिट्टी के खेल-खिलौने तोड़ देते थे लेकिन आजकल…

Read more
कविता हिंदी की मुहावरे,बड़े ही बावरे है

हिंदी की मुहावरे,बड़े ही बावरे है

हिन्दी के मुहावरे,बड़े ही खरे है खाने पीने की चीजो से भरे है कही पर फल है कही पर आटा दाले है कही पर मिठाई…

Read more
कविता जीवन के कुछ कटु अनुभव

जीवन के कुछ कटु अनुभव

पैर की मोच और छोटी सोच हमे आगे बढ़ने नहीं देती टूटी कलम दूसरो से जलन खुद को लिखने नहीं देती आलस्य और पैसो का…

Read more