काम करके काम का श्रेय लेना गलत कैसे?
Updated: May 29, 2018
-ललित गर्ग – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे चिलचिलाती धूप में रोड शो के साथ लोकार्पण किया जाना स्वागतयोग्य है।…
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लव जिहाद- एक सुनियाेजित इस्लामी षड्यंत्र
Updated: May 29, 2018
: डॉ मनोज चतुर्वेदी समाचार क्रमांक 1. (केरल) केरल की हादिया अर्थात् 25 साल की अखिला मां- पिता से अलग हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई…
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अपमान
Updated: May 29, 2018
डॉ मनोज चतुर्वेदी आकांक्षा को शाम से ही एक सौ तीन डिग्री बुखार था .उसके पापा जैसे ही घर आए, तो दादी ने उन्हें उसकी…
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रोहिंगिया मुसलमान और राष्ट्रीय एकता
Updated: May 29, 2018
डॉ.प्रेरणा चतुर्वेदी रोहिंग्या लोग ऐतिहासिक तौर पर अरकानी भारतीय के नाम पर पहचाने जाते हैं. म्यांमार देश के रखाइन राज्य और बांग्लादेश के चटगांव इलाके…
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पाश्चात्य समीक्षकों की दृष्टि में गीतांजलि
Updated: May 29, 2018
डॉ. छन्दा बैनर्जी सन् 1913 का वर्ष न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए आध्यात्मिक-ऐश्वर्य का अभूतपूर्व वर्ष था । इसी वर्ष…
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राजस्थान सरकार और महिला विकास की बयार
Updated: May 29, 2018
डॉ मनोज चतुर्वेदी राजस्थान ऐतिहासिक रूप से वीर महिलाओं की गाथाओं से भरा राज्य है. फिर भी वर्तमान संदर्भ में पितृसत्ता, सामंती मानसिकता और रुढ़िवादी…
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सामाजिक समरसता एवम् डॉ .भीमराव अांबेडकर
Updated: May 29, 2018
डॉ .प्रेरणा चतुर्वेदी भारतीय संस्कृति की आत्मा समरसता परिपूर्ण है .धर्म सापेक्षीकरण ,धर्म निरपेक्ष करण ,सर्वधर्म समभाव, मानवतावाद ,बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय, आदि अवधारणा सामाजिक…
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सुनो सुजाता : एक
Updated: May 29, 2018
सुनो सुजाता : एक सुनो सुजाता मैं नहीं जानता तुम्हारा समाज-सत्य। शब्दार्थ की रपटीली पगडंडियाँ यदि हैं,आपका सचेत चुनाव तो आओ, बैठो बातें करो। सुनो…
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लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप के शादी से लेकर , आडवाणी युग से जवानी युग में लौट रहे कुमार विश्वास
Updated: May 28, 2018
तेजप्रताप के शादी के बाद तेजस्वी के शादी में क्या मिलेगा बारातियों को ? केजरीवाल के बेवफाई के बाद कुमार को मिला भाजपा का विश्वास।…
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मेडिकल की पढ़ाई अब हिंदी में
Updated: May 28, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजकल मैं इंदौर में हूं। यहां के अखबारों में छपी एक खबर ऐसी है कि जिस पर पूरे देश का ध्यान जाना…
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समर्पण बढ़ रहा है प्रभु चरण में!
Updated: May 28, 2018
समर्पण बढ़ रहा है प्रभु चरण में, प्रकट गुरु लख रहे हैं तरंगों में; सृष्टि समरस हुई है समागम में, निगम आगम के इस सरोवर में ! शान्त हो स्वत: सत्व बढ़ जाता, निमंत्रण प्रकृति से है मिल जाता; सुकृति हो जाती विकृति कम होती, हृदय की वीणा विपुल स्वर बजती ! ठगा रह जाता नृत्य लख लेता, स्वयम्बर अम्बरों का तक लेता; प्राण वायु में श्वाँस उसकी ले, परश मैं उसका पा सिहर लेता ! वे ही आए सजाए जग लगते, संभाले लट ललाट लय ललके; साथ चल दूर रह उरहिं उझके, कबहु आनन्द की छटा छिटके ! कराएँगे न जाने क्या मगों में, दिखा क्या क्या न देंगे वे पलों में; जहान जादूगरी है झाँकते बस, मिला कर नयन ‘मधु’ उनके नयन में ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’
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स्तरहीन कवि सम्मेलनों से हो रहा हिन्दी की गरिमा पर आघात
Updated: May 28, 2018
डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ कवि सम्मेलनों का समृद्धशाली इतिहास लगभग सन १९२० माना जाता हैं । वो भी जन सामान्य को काव्य गरिमा के आलोक…
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