कविता अनजान रिश्ते

अनजान रिश्ते

ना मैं पागल हूं, ना कोई दीवाना, फिर भी क्यों, प्यार करता हूं, ना कोई तम्मना, ना बुरा इरादा, फिर भी क्यों, इतंजार करता हूं,…

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राजनीति लिंगायत धर्म के आलोक में हिन्दु औऱ राहुल की कांग्रेस 

लिंगायत धर्म के आलोक में हिन्दु औऱ राहुल की कांग्रेस 

 कहाँ है कांग्रेस का थिंकटैंक????? डॉ अजय खेमरिया लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने सबंधी कर्नाटक सरकार की सिफारिश जिन आधारों पर की गई…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-74

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-74

राकेश कुमार आर्य    गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज संसार के जितने भर भी चमकते हुए पदार्थ हैं-उनमें वह परमपिता परमेश्वर…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-73

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-73

राकेश कुमार आर्य    गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज ब्रहमाण्ड का क्षेत्रज्ञ कौन है? अब श्रीकृष्णजी कहते हैं कि अर्जुन! अब…

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विविधा नरदेवता

नरदेवता

 हिन्दु मत में तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की बात कही गई है। इसकी हकीकत मेरी चेतना में उभड़ती है जब सोचता हूँ कि बिना संसाधन…

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कविता देश बड़ा है नारों से 

देश बड़ा है नारों से 

मोदी जी का नारा:- “बेटी बचाओ,बेटी पढाओ” लालू जी का नारा:- “एक नहीं,कम से कम दस बारह तो बनाओ उनको पढाओ,न पढाओ,राजनीति में तो लाओ…

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कविता श्री देवी के अंतिम वाक्य

श्री देवी के अंतिम वाक्य

संसार एक थियेटर घर है अनेको पात्र इसमें आते है अपना अपना रोल निभा कर अपने घरो को चले जाते है मैं भी इस थियेटर…

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प्रवक्ता न्यूज़ गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-72

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-72

राकेश कुमार आर्य   गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज इस प्रकार श्रीकृष्णजी ने इन चौबीस तत्वों से ब्रह्माण्ड तथा पिण्ड के क्षेत्र…

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लेख गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-71

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-71

राकेश कुमार आर्य   गीता का तेरहवां अध्याय और विश्व समाज जैसे एक खेत का स्वामी अपने खेत के कोने-कोने से परिचित होता है…

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मीडिया नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका

नीति नियोजन में मीडिया की भूमिका

अरुण तिवारी इण्डिया हैबिटेट सेंटर, लोदी रोड, नई दिल्ली में एक त्रिदिवसीय आयोजन (07-09 फरवरी, 2018) हुआ। इस त्रिदिवसीय ‘इवेलफेस्ट – 2018’ के दूसरे दिन…

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समाज पहचान और श्रम मूल्य के संकट से जूझती घरेलू कामगार महिलायें

पहचान और श्रम मूल्य के संकट से जूझती घरेलू कामगार महिलायें

उपासना बेहार घरेलू काम दुनिया के सबसे पुराने रोजगार के साधनों में से एक रहा है। सूखा, खेती में हानि, रोजगार के विकल्प का ना होना, विकास के…

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विविधा मनुष्य की आबादी बढ़ी , 60 फीसदी घटी गौरैया 

मनुष्य की आबादी बढ़ी , 60 फीसदी घटी गौरैया 

प्रभुनाथ शुक्ल गौरैया हमारी प्राकृतिक सहचरी है। कभी वह नीम के पेड़ के नीचे फूदकती और बिखेरे गए चावल या अनाज के दाने को चुगती।…

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