थाईलैंड : मौत की गुफा से जब खिलखिलाती निकली जिंदगियां – – – !
Updated: July 11, 2018
प्रभुनाथ शुक्ल थाईलैंड में इंसानी जिंदगी बचाने का चमत्कारिक मिशन पूरा हो गया। थाईलैंड की थैम लुआंग गुफा में फंसे 12 जूनियर फुटवालर और कोच…
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टोंटी और टाइल्स पर सेंकी जायेगी सियासी रोटियां ?
Updated: July 11, 2018
परसमणि अग्रवाल चुनाव के आने की आहट मिलते ही राजनैतिक गलियारों में सियासत की आंधी चलना शुरू हो गई। रणनीति बनने लगी, गोंटें बिछने लगी।…
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बेहतर कल के लिए आज परिवार नियोजन
Updated: July 11, 2018
देवेंद्रराज सुथार अनियंत्रित गति से बढ़ रही जनसंख्या देश के विकास को बाधित करने के साथ ही हमारे आम जन जीवन को भी दिन-प्रतिदिन प्रभावित…
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विश्व गुरु को बना रहे हैं विश्व-चेला
Updated: July 11, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज दो खबरों ने मेरा ध्यान एक साथ खींचा। एक तो दक्षिण कोरिया के सहयोग से दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल फोन…
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“ऋषि दयानन्द के देश व मानवता के हित के अनेक कार्यों में एक कार्य वेदों का उद्धार”
Updated: July 11, 2018
मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने मानवता, समाज व देश हित के अगणित कार्य किये हैं। सब सुधारों का मूल वेदाध्ययन व वेदाचरण है।…
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मिशन 2019 से पहले 2018 की चुनौती कांग्रेस के लिये करो या मरो का सवाल
Updated: July 11, 2018
जावेद अनीस इस साल के अंत तक मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में चुनाव होने है. यह सही मायनों में 2019 में होने वाले देश…
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हरिद्वार में कवियों का सम्मेलन
Updated: July 10, 2018
डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज हरिद्वार में कवि-सम्मेलन नहीं, कवियों का सम्मेलन हुआ। कवि सम्मेलन में हजारों-लाखों श्रोता होते हैं। यहां सिर्फ कवि थे। सारे भारत…
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पिया की प्रतीक्षा में जगती रही
Updated: July 10, 2018
पिया की प्रतीक्षा में जगती रही रात भर करवटे बदलती रही स्वप्न भी हो गये अब स्वप्न जैसे कोई हो गया हो दफन कब आओगे…
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वर्षा जल संचयन से रोकें बारिश के पानी की बर्बादी
Updated: July 10, 2018
देवेंद्रराज सुथार मानसून का महीना हर किसी को आत्मिक आनंद से सराबोर करने वाला होता है। इस समय नील व्योम काली घटाओं के कैद में…
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आए रहे थे कोई यहाँ !
Updated: July 10, 2018
(मधुगीति १८०७०३ स) आए रहे थे कोई यहाँ, पथिक अजाने; गाए रहे थे वे ही जहान, अजब तराने ! बूझे थे कुछ न समझे, भाव उनके जो रहे; त्रैलोक्य की तरज़ के, नज़ारे थे वे रहे ! हर हिय को हूक दिए हुए, प्राय वे रहे; थे खुले चक्र जिनके रहे, वे ही पर सुने ! टेरे वे हेरे सबको रहे, बुलाना चहे; सब आन पाए मिल न पाए, परेखे रहे ! जो भाए पाए भव्य हुए, भव को वे जाने; ‘मधु’ उनसे मिल के जाने रहे, कैसे अजाने ! रचयिता: गोपाल बघेल ‘मधु’
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‘संसार में वेदों की प्रतिष्ठा ऋषि दयानन्द के अतिरिक्त अन्य कोई विद्वान कर नहीं पायाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय’
Updated: July 10, 2018
–मनमोहन कुमार आर्य, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के परिसर में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय गुरुकुल महासम्मेलन के समापन दिवस पर वेद एवं संस्कृति सम्मेलन का…
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एक हास्य व व्यंग कविता
Updated: July 9, 2018
पेट्रोल के दाम बढ़ रहे फिर भी वाहन चल रहे महंगाई भी रोजना बढ़ रही फिर भी लोग होटल में खा रहे सत्ता के सब…
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