जीवंत और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण
Updated: March 6, 2018
(अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस 08 मार्च पर विशेष आलेख) हम विश्व में लगातार कई वर्षों से अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाते आ रहे हैं, महिलाओं के सम्मान…
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एक देश एक चुनाव, कितने व्यावहारिक ?
Updated: March 6, 2018
परिवर्तन की बात करना राजनेताओं और समाजसेवियों में प्रचलित एक फैशन है। इन दिनों ‘एक देश एक चुनाव’ की चर्चा गरम हैं। कुछ लोग इसके…
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धर्मगुरुओं की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं से मुक्ति मिले
Updated: March 6, 2018
ललित गर्ग- आज धर्म एवं धर्मगरुओं का व्यवहार एवं जीवनशैली न केवल विवादास्पद बल्कि धर्म के सिद्धान्तों के विपरीत हो गयी है। नैतिक एवं चरित्रसम्पन्न…
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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-64
Updated: March 6, 2018
राकेश कुमार आर्य गीता का ग्यारह अध्याय और विश्व समाज अर्जुन कह रहा है कि मैं जो कुछ देख रहा हूं उसकी शक्ति अनन्त है,…
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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-63
Updated: March 6, 2018
राकेश कुमार आर्य   गीता का आठवां अध्याय और विश्व समाज स्वामी चिन्मयानन्द जी की बात में बहुत बल है। आज के वैज्ञानिकों ने…
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गुजरात में आदिवासी आन्दोलन क्यों?
Updated: March 6, 2018
ललित गर्गः- असंवैधाानिक एवं गलत आधार पर गैर-आदिवासी को आदिवासी सूची में शामिल किये जाने एवं उन्हें लाभ पहुंचाने की गुजरात की वर्तमान एवं पूर्व…
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मृत्यु होने पर जीवात्मा की स्थिति व गति पर विचार
Updated: March 6, 2018
-मनमोहन कुमार आर्य हमें अपने एक विभागीय अधिकारी के परिवारजन की मृत्यु होने पर अन्त्येष्टि में सम्मिलित होने श्मशान घाट जाना पड़ा। वहां हमारे अनेक…
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स्वच्छ सुन्दर पथ सँवारे !
Updated: March 6, 2018
स्वच्छ सुन्दर पथ सँवारे, गा रही हिम रागिनी; छा रही आल्ह्वादिनी उर, छिटकती है चाँदनी ! वन तड़ागों बृक्ष ऊपर, राजती सज रजत सी; घास की शैया विराजी, लग रही है विदूषी ! रैन आए दिवस जाए, रूप ना वह बदलती; रूपसी पर धूप चखके, मन मसोसे पिघलती ! वारिशों में रिस रसा कर, धूलि से तन तरजती; त्राण को तैयार बैठी, प्राण को नित धारती ! धवलता से जग सजाए, सहजता प्रतिपालती; ‘मधु’ को मोहित किए वह, वारती मन योगिनी ! स्वर स्वप्न की गति को तके…
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लगाये कितने क़यास !
Updated: March 6, 2018
लगाये कितने क़यास, जानने अपना सकाश; उड़ने आकाँक्षा का आकाश, अथवा पाने कुछ अवकाश ! जानने निज इतिहास, पहचानने मृदु हास; करने कभी अट्टहास, जानने अपना अहसास ! आम्र मुकुल का सुहास, भ्रमर का बढ़ता साहस; करा देता कुछ प्रयास, दिखा देता आत्म प्रकाश ! आशाओं से भरा सन्देश, आलोकित होजाता अनायास; आलोक का लोक आवास, लोकातीत को दे जाता सुवास ! उद्घोष से उत्प्रेरित श्वाँस, बदल जाती शरीर का लिवास; ‘मधु’ का बढ़ जाता विश्वास, त्रिलोकी में हो जाता निवास !
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ईश्वर मनुष्यादि प्राणियों के सभी शुभाशुभ कर्मों का द्रष्टा व फलप्रदाता है
Updated: March 4, 2018
मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। यह समस्त दृश्यमान जगत ईश्वर ने बनाया है और वही इसका पालन कर रहा है। इस सृष्टि का इसकी अवधि पूरी…
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साहसी वीर देशभक्त अमर शहीद पं. चन्द्रशेखर आजाद
Updated: March 4, 2018
मनमोहन कुमार आर्य आज भारत माता के वीर, निर्भय साहसी और अद्भुद देशभक्त शहीद पं. चन्द्रशेखर आजाद जी का बलिदान दिवस है। चन्द्रशेखर आजाद जी…
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चीनी भाषा अध्ययन है, कठोर परिश्रम: भा. (१)
Updated: March 3, 2018
डॉ. मधुसूदन: मौलिक सारांश: संसार की कठिनतम भाषा है चीनी. कठोर परिश्रम से ही, चीनी अपनी भाषा सीखते हैं. शालेय शिक्षा के दस वर्ष प्रति-दिन…
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