धर्म-अध्यात्म स्वाध्याययुक्त जीवन ईश्वर व सदाचार से जोड़ता तथा बन्धनों को हटाता है

स्वाध्याययुक्त जीवन ईश्वर व सदाचार से जोड़ता तथा बन्धनों को हटाता है

मनमोहन कुमार आर्य स्वाध्याय ‘स्व’ तथा ‘अध्याय’ दो शब्दों से मिलकर बना एक शब्द है। स्व हम स्वयं के लिए प्रयोग करते हैं और उसका…

Read more
विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-43

विश्वगुरू के रूप में भारत-43

राकेश कुमार आर्य  इस प्रकार मूर साहब को भी अपने परिश्रम में हार का मुंह देखना पड़ गया था। इसके उपरान्त भी भारत में…

Read more
कहानी पारिजात के फूल

पारिजात के फूल

भाग 1 – 1982 वह सर्दियों के दिन थे. मैं अपनी फैक्टरी से नाईट शिफ्ट करके बाहर निकला और पार्किंग से अपनी साइकिल उठाकर घर…

Read more
कला-संस्कृति दिवाली  13 अक्टूबर 2017  के  दिन हैं खरीदी का महामुहूर्त—-

दिवाली  13 अक्टूबर 2017  के  दिन हैं खरीदी का महामुहूर्त—-

इस वर्ष दिवाली 2017 पर खरीदी का सबसे बड़ा महामुहूर्त 13 अक्टूबर 2017 को है। इस दिन शुक्रवार होने से यह शुक्र पुष्य कहलाएगा। खरीदी…

Read more
व्यंग्य गुरुगिरी मिटती नहीं हमारी

गुरुगिरी मिटती नहीं हमारी

हमारा देश हमेशा से ज्ञान का उपासक रहा है और इस पर कभी किसी को कोई शक नहीं रहा है। ज्ञान के मामले में हम…

Read more
विविधा “आई एस आई” आतंकवाद का पोषक          

“आई एस आई” आतंकवाद का पोषक          

अधिक पीछे न जाते हुए केवल पिछले 2-3  वर्ष की गुप्तचर विभाग की सूचनाओँ में आईएसआई द्वारा हमारे देश में आतंकवादियों को उकसाने व भड़काने…

Read more
राजनीति एक साथ चुनाव से सुधरेगा देश

एक साथ चुनाव से सुधरेगा देश

सुरेश हिन्दुस्थानी वर्तमान देश में चुनाव के लिए कदम उठाए जाने लगे हैं। वैसे तो देश में जब से प्रधानमंत्री के रुप में नरेन्द्र मोदी…

Read more
विविधा विश्वगुरू के रूप में भारत-42

विश्वगुरू के रूप में भारत-42

राकेश कुमार आर्य  एलफिंस्टन का कहना है-”जावा का इतिहास कलिंग से आये हिन्दुओं की बहुत सी संस्थाओं के इतिहास से भरा पड़ा है। जिससे…

Read more
समाज सरकार के एड्स-मुक्त भारत का वादा सराहनीय, पर कैसे होगा यह सपना साकार?

सरकार के एड्स-मुक्त भारत का वादा सराहनीय, पर कैसे होगा यह सपना साकार?

शोभा शुक्ला, भारत समेत, 190 देशों से अधिक की सरकारों ने, 2030 तक एड्स-मुक्त होने का वादा तो किया है परन्तु वर्त्तमान के एड्स सम्बंधित आंकड़ों और…

Read more
कविता ज्वालामुखी

ज्वालामुखी

हर आदमी आज यहाँ, ज्वालामुखी बन चुका है। क्रोध कुंठा ईर्ष्या की आग भीतर ही भीतर सुलग रही है। कोई फटने को तैयार बैठा हैं, कोई आग को दबाये बैठा है, किसी के मन की भीतरी परत में, चिंगारियां लग चुकी हैं। कोई ज्वालामुखी सुप्त है, कोई कब फट पड़े कोई नहीं जानता। समाज की विद्रूपताओं का सामना करने वाले या उनको बदलने वाले अब नहीं रहे क्योंकि सब जल रहे हैं भीतर से और बाहर से. क्योंकि वो ज्वालामुखी बन चुके हैं। ज्वालामुखी का पूरा समूह फटता है , तो कई निर्दोष मरते है, जब बम फटते है, नाइन इलैवन या ट्वैनटी सिक्स इलैवन होता है। किसी बड़े ज्वालामुखी के फटने से प्रद्युम्न मरते है या निर्भया, गुड़िया,या किसी मीना की इज्जत पर डाके पड़ते है, फिर हाल बेहाल, वो कही सड़क पर कहीं फेंक चलते है। कभी कार मे छोटी सी खरोंच आनेपर चाकू छुरी या देसी कट्टे चलतेहैं क्योंकि वो आदमी नहीं है ज्वालामुखी बन चुके हैं…

Read more
व्यंग्य तो क्या हाथी निकलेगा ? 

तो क्या हाथी निकलेगा ? 

दुनिया में शाकाहारी अधिक हैं या मांसाहारी; शाकाहार अच्छा है या मांसाहार; फार्म हाउस के अंडे और घरेलू तालाब की छोटी मछली शाकाहार है या…

Read more
राजनीति अब राष्ट्रगान पर विवाद स्वीकार्य नहीं

अब राष्ट्रगान पर विवाद स्वीकार्य नहीं

ललित गर्ग हमारे देश में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर तथाकथित कट्टर ताकतें विरोधी स्वर उठाती रही है, इनके सार्वजनिक स्थलों पर गायन का दायरा…

Read more