विविधा कल्याणकारी योजनाओं में आधार का पेंच

कल्याणकारी योजनाओं में आधार का पेंच

जावेद अनीस 2007 में शुरू की गई मिड डे मील भारत की सबसे सफल सामाजिक नीतियों में से एक है, जिससे होने वाले लाभों को…

Read more
कविता ‘आज’ का क्या करूं मै

‘आज’ का क्या करूं मै

वो शाम चुलबुली सी रातें खिली खिली सी वक़्त के समंदर में वो वक़्त ही घुल गया है। अब शांत सी शामें हैं, चादर में…

Read more
कविता मैं मैं हूँ मैं ही रहूँगी

मैं मैं हूँ मैं ही रहूँगी

मै नहीं राधा बनूंगी, मेरी प्रेम कहानी में, किसी और का पति हो, रुक्मिनी की आँख की किरकिरी मैं क्यों बनूंगी मै नहीं राधा बनूँगी।…

Read more
समाज जिम्मेदारी का घड़ा और स्वच्छता की पहल

जिम्मेदारी का घड़ा और स्वच्छता की पहल

मनोज कुमार गर्मी की तपन बढऩे के साथ ही अनुपम मिश्र की याद आ गयी. उनके लिखे को एक बार फिर पढऩे का मन किया.…

Read more
राजनीति कांग्रेस का एक ही गलती को बार-बार दोहराना ?

कांग्रेस का एक ही गलती को बार-बार दोहराना ?

कांग्रेस की नई राजनीतिक अलोचना की शुरूआत यहीं से होती है। जब भाजपा एवं अन्‍य राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने इस विषय को लेकर कांग्रेस को घेरा…

Read more
समाज मुचकुंद दूबे के लालन शाह

मुचकुंद दूबे के लालन शाह

प्रो. मुचकुंद दूबे ने हिंदी में वह काम कर दिखाया है, जो रवीन्द्रनाथ टैगोर ने लालन शाह फकीर के लिए बांग्ला में किया था। लालन…

Read more
समाज जानिए की आखिर क्यों अशुभ हैं फटी हुई जींस पहनना..???

जानिए की आखिर क्यों अशुभ हैं फटी हुई जींस पहनना..???

इस तरह के कपड़े पहनकर आप अपने फ्रेंड्स के बीच भले ही अच्छे लगें लेकिन ये आपके गुड लक को बैड लक में बदल सकता…

Read more
पर्यावरण पर्यावरण और विकास

पर्यावरण और विकास

05 जून – विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष पर्यावरणीय समृद्धि की चाहत, जीवन का विकास करती है, विकास की चाहत, सभ्यताओं का। सभ्यता को अग्रणी…

Read more
विविधा भ्रष्टाचार विरोध यानी मौत को दावत?

भ्रष्टाचार विरोध यानी मौत को दावत?

तनवीर जाफ़री हम भारतवासियों के दोहरे चरित्र को उजागर करने वाली यह कहावत पूरे देश में बेहद प्रचलित है कि-‘सौ में से नब्बे बेईमान फिर…

Read more
समाज धार्मिक आस्था पर आघात की घृणित राजनीति

धार्मिक आस्था पर आघात की घृणित राजनीति

भारतीय संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट करके भूमि पुत्र बहुसंख्यक हिंदुओं की आस्थाओं पर निरंतर प्रहार करते रहने की मुगलकालीन परंपरा अभी जीवित है। आज केंद्र में…

Read more
परिचर्चा  पर्यावरण से छेड़छाड़ के बिना ही मिलने लगा भरपूर पानी

 पर्यावरण से छेड़छाड़ के बिना ही मिलने लगा भरपूर पानी

“जब मैं छोटा था बहुत बारिश और बर्फ होती थी। मई के अंत तक पहाड़ बिल्कुल सफेद रहते थे। लेकिन अब बर्फ बहुत ही कम…

Read more
धर्म-अध्यात्म बटुक भैरव जयंती 2017

बटुक भैरव जयंती 2017

।।ॐ ह्रीं वां बटुकाये क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये कुरु कुरु बटुकाये ह्रीं बटुकाये स्वाहा।। उक्त मंत्र की प्रतिदिन 11 माला 21 मंगल तक जप करें। मंत्र…

Read more