कविता डरता है मन मेरा

डरता है मन मेरा

डरता है मन मेरा कहीं हो न जाए तेरे भी जीवन में अंधेरा नाजों से पली थी मैं अपनी बगिया की कली थी एक दिन…

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धर्म-अध्यात्म  ‘जाने चले जाते हैं कहां दुनियां से जाने वाले’ का वैदिक समाधान

 ‘जाने चले जाते हैं कहां दुनियां से जाने वाले’ का वैदिक समाधान

जाने चले जाते हैं कहां? दुनियां से जाने वाले’ प्रश्न का उत्तर केवल वैदिक साहित्य में ही सुलभ होता है। ऐसा ही एक प्रश्न यह…

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विविधा शुभ व सत कर्म होने से मोदी जी का कालेधन पर प्रहार सफल होगा

शुभ व सत कर्म होने से मोदी जी का कालेधन पर प्रहार सफल होगा

विश्व में लोकप्रिय एवं आदरणीय भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने ढाई वर्षों के स्वल्प शासन काल में ऐसे अनेक कार्य किये…

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प्रवक्ता न्यूज़ लोकमंथन भोपाल – अमृत की खोज में एक महा आयोजन

लोकमंथन भोपाल – अमृत की खोज में एक महा आयोजन

भोपाल में आयोजित त्रिदिवसीय आयोजन लोकमंथन की अवधारणा, आकार, आवेग और अनुवर्तन की दिशा तब ही स्पष्ट हो गई थी जब इस आयोजन के एक…

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विविधा एक नए भारत का सृजन 

एक नए भारत का सृजन 

न्द्र सरकार द्वारा पुराने 500 और 1000 के नोटों का चलन बन्द करने एवं नए 2000 के नोटों के चलन से पूरे देश में थोड़ी…

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आर्थिकी कालेधन के खिलाफ ऐतिहासक जंग

कालेधन के खिलाफ ऐतिहासक जंग

मृत्युंजय दीक्षित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विगत 8 नवंबर को टी. वी. पर देश को संबोधित करते हुए जब 500 व एक हजार के नोट…

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विविधा लाला लाजपतराय बलिदान दिवस-17 नवम्बर

लाला लाजपतराय बलिदान दिवस-17 नवम्बर

लाला लाजपत राय को भारत के महान क्रांतिकारियों में गिना जाता है। आजीवन ब्रिटिश राजशक्ति का सामना करते हुए अपने प्राणों की परवाह न करने…

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आर्थिकी प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का काले धन पर प्रहार और हमारा देश

प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का काले धन पर प्रहार और हमारा देश

मोदी जी के इस निर्णय के कारण पाकिस्तान में छपने वाली फेक करंसी का प्रचलन सर्वथा समाप्त हो जाने के कारण पाकिस्तान सहित सभी आतंकवादी,…

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व्यंग्य पप्पू गिरी

पप्पू गिरी

खबरियों के लिए खबर थी और मनचलों के लिए सेल्फी लेने का एक मौका पप्पू महज़ ४००० हज़ार के गाँधी बैंक में बदलने जा पहुंचे…

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साक्षात्‍कार स्वास्थ्य मौलिक अधिकार बने

स्वास्थ्य मौलिक अधिकार बने

प्रभांशु ओझा मजरूह सुल्तानपुरी का बड़ा प्रसिद्ध शेर है कि –मै तो अकेला ही चला था ज़निबे मंजिल मगर ,लोग मिलते गए और कारवां बनता…

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लेख खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी : रानी लक्ष्मीबाई

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी : रानी लक्ष्मीबाई

(रानी लक्ष्मीबाई के  181वें जन्मदिवस 19 नवंबर  2016 पर विशेष) 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त् रता संग्राम में अहम् भूमिका नि भाने वाली झाँसी की रानी लक्ष् मीबाई का जन्म मोरोपन्त तांबे औ र भागीरथीबाई के घर वाराणसी जि ले के भदैनी में 19 नवम्बर  1935 को हुआ था। रानी लक्ष्मीबा ई के बचपन का नाम मणिकर्णिका था । परन्तु प्यार से लोग उसे मनु  कहकर पुकारते थे। रानी लक्ष्मी बाई जब 4 साल की थी तब उनकी माँ  भागीरथीबाई का देहांत हो गया।    इसलिए मणिकर्णिका का बचपन अपने पिता मोरोपन्त तांबे की देखरेख  में बीता। मनु ने बचपन में शा स्त्रों की शिक्षा ग्रहण की। मणि कर्णिका बचपन में ही तलबार, धनुष सहित अन्य शस्त्र चलाने में नि पुण हो गयीं थी। और छोटी सी उम्र में ही घुड़सवारी करने लगी थीं । मोरोपन्त मराठी मूल के थे और  मराठा बाजीराव द्वितीय की सेवा  में रहते थे। माँ की मृत्यु के  बाद घर में मणिकर्णिका की देखभाल के लिये कोई नहीं था। इसलिए पिता मोरोपन्त मणिकर्णिका को अपने  साथ बाजीराव के दरबार में ले जा…

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आर्थिकी कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत

भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़…

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