डरता है मन मेरा
Updated: November 17, 2016
डरता है मन मेरा कहीं हो न जाए तेरे भी जीवन में अंधेरा नाजों से पली थी मैं अपनी बगिया की कली थी एक दिन…
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‘जाने चले जाते हैं कहां दुनियां से जाने वाले’ का वैदिक समाधान
Updated: November 17, 2016
जाने चले जाते हैं कहां? दुनियां से जाने वाले’ प्रश्न का उत्तर केवल वैदिक साहित्य में ही सुलभ होता है। ऐसा ही एक प्रश्न यह…
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शुभ व सत कर्म होने से मोदी जी का कालेधन पर प्रहार सफल होगा
Updated: November 17, 2016
विश्व में लोकप्रिय एवं आदरणीय भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने ढाई वर्षों के स्वल्प शासन काल में ऐसे अनेक कार्य किये…
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लोकमंथन भोपाल – अमृत की खोज में एक महा आयोजन
Updated: November 17, 2016
भोपाल में आयोजित त्रिदिवसीय आयोजन लोकमंथन की अवधारणा, आकार, आवेग और अनुवर्तन की दिशा तब ही स्पष्ट हो गई थी जब इस आयोजन के एक…
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एक नए भारत का सृजन
Updated: November 17, 2016
न्द्र सरकार द्वारा पुराने 500 और 1000 के नोटों का चलन बन्द करने एवं नए 2000 के नोटों के चलन से पूरे देश में थोड़ी…
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कालेधन के खिलाफ ऐतिहासक जंग
Updated: November 16, 2016
मृत्युंजय दीक्षित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विगत 8 नवंबर को टी. वी. पर देश को संबोधित करते हुए जब 500 व एक हजार के नोट…
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लाला लाजपतराय बलिदान दिवस-17 नवम्बर
Updated: November 16, 2016
लाला लाजपत राय को भारत के महान क्रांतिकारियों में गिना जाता है। आजीवन ब्रिटिश राजशक्ति का सामना करते हुए अपने प्राणों की परवाह न करने…
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प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का काले धन पर प्रहार और हमारा देश
Updated: November 16, 2016
मोदी जी के इस निर्णय के कारण पाकिस्तान में छपने वाली फेक करंसी का प्रचलन सर्वथा समाप्त हो जाने के कारण पाकिस्तान सहित सभी आतंकवादी,…
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पप्पू गिरी
Updated: November 16, 2016
खबरियों के लिए खबर थी और मनचलों के लिए सेल्फी लेने का एक मौका पप्पू महज़ ४००० हज़ार के गाँधी बैंक में बदलने जा पहुंचे…
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स्वास्थ्य मौलिक अधिकार बने
Updated: November 16, 2016
प्रभांशु ओझा मजरूह सुल्तानपुरी का बड़ा प्रसिद्ध शेर है कि –मै तो अकेला ही चला था ज़निबे मंजिल मगर ,लोग मिलते गए और कारवां बनता…
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खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी : रानी लक्ष्मीबाई
Updated: November 16, 2016
(रानी लक्ष्मीबाई के 181वें जन्मदिवस 19 नवंबर 2016 पर विशेष) 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त् रता संग्राम में अहम् भूमिका नि भाने वाली झाँसी की रानी लक्ष् मीबाई का जन्म मोरोपन्त तांबे औ र भागीरथीबाई के घर वाराणसी जि ले के भदैनी में 19 नवम्बर 1935 को हुआ था। रानी लक्ष्मीबा ई के बचपन का नाम मणिकर्णिका था । परन्तु प्यार से लोग उसे मनु कहकर पुकारते थे। रानी लक्ष्मी बाई जब 4 साल की थी तब उनकी माँ भागीरथीबाई का देहांत हो गया। इसलिए मणिकर्णिका का बचपन अपने पिता मोरोपन्त तांबे की देखरेख में बीता। मनु ने बचपन में शा स्त्रों की शिक्षा ग्रहण की। मणि कर्णिका बचपन में ही तलबार, धनुष सहित अन्य शस्त्र चलाने में नि पुण हो गयीं थी। और छोटी सी उम्र में ही घुड़सवारी करने लगी थीं । मोरोपन्त मराठी मूल के थे और मराठा बाजीराव द्वितीय की सेवा में रहते थे। माँ की मृत्यु के बाद घर में मणिकर्णिका की देखभाल के लिये कोई नहीं था। इसलिए पिता मोरोपन्त मणिकर्णिका को अपने साथ बाजीराव के दरबार में ले जा…
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कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत
Updated: November 16, 2016
भारत के लोग नयी चीजों को देर से अपनाते हैं लेकिन जब अपनाते हैं तो फिर पीछे नहीं देखते! आज देश में लगभग १०५ करोड़…
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