राजनीति कंगाली के पचास दिन और देश का विश्वास  

कंगाली के पचास दिन और देश का विश्वास  

निरंजन परिहार लालू यादव भले ही देश को याद दिला रहे हो कि 31 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए किसी चौराहे का इंतजाम…

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खेल जगत कामयाबी से भरा रहा साल

कामयाबी से भरा रहा साल

साल 2016 में टीम इंडिया का प्रदर्शन साल 2016 टीम इंडिया के लिए शानदार रहा। टीम इंडिया ने इस दौरान इस एक भी टेस्ट मैच…

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साक्षात्‍कार विश्वविद्यालयों के लालरंग में दबा आम जनमानस का साहित्य

विश्वविद्यालयों के लालरंग में दबा आम जनमानस का साहित्य

साहित्य यूँ तो समाज का दर्पण कहा जाता है लेकिन क्या हो जब यह दर्पण किसी ख़ास विचारधारा का मुखपत्र भर बन कर रह जाये…

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प्रवक्ता न्यूज़ आगरा में यमुना निर्मलीकरण कार्य योजना

आगरा में यमुना निर्मलीकरण कार्य योजना

डा. राधेश्याम द्विवेदी प्राचीन सभ्यतायें नदियों के किनारे विकसितः-प्राचीन सभ्यताओं का जन्म एवं उदगम नदियों के तटों से प्रारम्भ हुआ है। आदिम युग तथा पौराणिक…

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कविता यादेँ व उम्मीद :-सौरभ चतुर्वेदी

यादेँ व उम्मीद :-सौरभ चतुर्वेदी

मयस्सर डोर से फिर एक मोती झड़ रहा है , तारीखों के जीने से दिसम्बर उतर रहा है | कुछ चेहरे घटे , चंद यादें…

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प्रवक्ता न्यूज़ Default Post Thumbnail

महर्षि नगर, (आई.आई.एम रोड, लखनऊ) में पिछले 20 साल से मूलभूत सुविधाओं की कमी. प्रशासन लापरवाह, कोई नहीं सुनता.

सेवा में श्रीमान संपादक महोदय जी,   विषय-महर्षि नगर, (आई.आई.एम रोड, लखनऊ)  में पिछले 20 साल से मूलभूत सुविधाओं की कमी. प्रशासन लापरवाह, कोई नहीं…

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राजनीति जेटली की जिंदगी का राजनीतिक मायाजाल

जेटली की जिंदगी का राजनीतिक मायाजाल

निरंजन परिहार- अरुण जेटली का अतीत दुनियादारी के अंदाज में काफी सफल रहा है। दिल्ली युनिवर्सिटी में जब वे पढ़ते थे, तब भले ही बस…

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शख्सियत कई उपेक्षाओं को झेलकर मुकाम पा सकी विद्या बालन

कई उपेक्षाओं को झेलकर मुकाम पा सकी विद्या बालन

-अनिल अनूप विद्या बालन का जन्म 1 जनवरी 1978 को केरल में हुआ था। उनके पिता का नाम पी. आर बालन हैं जोकि डीजीकेबल के…

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शख्सियत लेखक, निर्माता,अभिनेता के साथ कुशल समाजसेवक भी हैैं नाना पाटेकर

लेखक, निर्माता,अभिनेता के साथ कुशल समाजसेवक भी हैैं नाना पाटेकर

अनिल अनूप नाना पाटेकर भारतीय फिल्‍मों के अभिनेता हैंl वे लेखक और फिल्‍म निर्माता भी हैं lनाना हिन्‍दी फिल्‍मों के मशहूर अभिनेता माने जाते हैंl…

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समाज केवल पैसे और क्षणिक सुख के लिए पूरी पीढ़ी की बर्बादी कहां तक उचित है….

केवल पैसे और क्षणिक सुख के लिए पूरी पीढ़ी की बर्बादी कहां तक उचित है….

-अनिल अनूप मसाज पार्लर की राह हमारे युवा वर्ग को कहां तक ले जाएगी इसके बारे में अनुमान लगाना कठिन है. कहीं ये रास्ता उस…

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कविता ऐसा ही कुछ करना होगा

ऐसा ही कुछ करना होगा

लम्बे अर्से बीत चले हैं, इनसे कुछ सबक लेना होगा, उम्मीदों की सतत् कड़ी में, इस बार नया कुछ बुनना होगा, अपने समाज के अन्तिम…

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समाज शहर की चिंता में क़ाज़ी जी का दुबला होना

शहर की चिंता में क़ाज़ी जी का दुबला होना

ऐसा प्रतीत होता है कि आलोचना की आड़ में प्रसिद्धि कमाने की जुगत में लगे रहने वाले यह लोग भी मौका देखकर अपनी ज़हरीली आवाज़…

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