हिंदी दिवस हिन्दी देश को जोड़ने वाली भाषा है; इसे उसके अपने ही घर में मत तोड़ो

हिन्दी देश को जोड़ने वाली भाषा है; इसे उसके अपने ही घर में मत तोड़ो

हिन्दी देश को जोड़ने वाली भाषा है; इसे उसके अपने ही घर में मत तोड़ो प्रोफेसर महावीर सरन जैन स्वाधीनता के लिए जब जब आन्दोलन…

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समाज सांप्रदायिकता से कौन लड़ना चाहता है?

सांप्रदायिकता से कौन लड़ना चाहता है?

   यह सवाल आज फिर मौजूं हो उठा है कि आखिर सांप्रदायिकता से कौन लड़ना चाहता है? देश के तमाम इलाकों में घट रही घटनाएं…

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विविधा मोदी सरकार का मैंनेजमेंट तंत्र

मोदी सरकार का मैंनेजमेंट तंत्र

हिमांशु शेखर नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली नई सरकार कई तरह से अपने कामकाज को अलग दिखाने की कोशिश कर रही है। इन्हीं कोशिशों में…

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जन-जागरण कुदरत आखिर क्यों नाराज हुई ?

कुदरत आखिर क्यों नाराज हुई ?

16 जून 2013 का दिन उत्तराखंड के लिए विनाश का ऐसा काला समय था, जिसने हज़ारों की संख्या में लोगों की ज़िंदगियों को छीन लिया…

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कविता पीड़ा का पिंजरा

पीड़ा का पिंजरा

  पीड़ा के पिंजड़े की क़ैदी हूँ, पिंजड़े को तोडकर निकलना चाहती हूँ… पर सारी कोशिशें नाकाम हो रही हैं। जब भी ऐसा करने की…

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राजनीति जम्मू कश्मीर में बिछ रही चुनावी बिसात और भाजपा का +44 मिशन

जम्मू कश्मीर में बिछ रही चुनावी बिसात और भाजपा का +44 मिशन

 डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री जम्मू कश्मीर की वर्तमान विधान सभा के चुनाव २००८ में हुये थे । इसलिये क़ायदे से उसके चुनाव २०१३ में हो…

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टॉप स्टोरी फन फैलाता अलकायदा

फन फैलाता अलकायदा

अरविंद जयतिलक दुनिया के खूंखार आतंकी संगठन अलकायदा के सरगना अल जवाहिरी के ताजा विडियो में भारतीय उपमहाद्वीप में कायदात अल जिहाद बनाने, जिहाद का…

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समाज अधर्म है धर्म के नाम पर समाज को बांटना

अधर्म है धर्म के नाम पर समाज को बांटना

निर्मल रानी अच्छे दिन आने वाले हैं का ‘लॉलीपाप’ दिखाकर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी लोगों को दिखाए गए सपनों को पूरा करने के…

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कविता तौहिनी लगाती है-कविता

तौहिनी लगाती है-कविता

डॉ नन्द लाल भारती  बोध के समंदर से जब तक था दूर सच लगता था सारा जहां अपना ही है बोध समंदर में डुबकी क्या…

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कविता कविता-जातिवाद का नरपिशाच

कविता-जातिवाद का नरपिशाच

डॉ नन्द लाल भारती मै कोई पत्थर नहीं रखना चाहता इस धरती पर दोबारा लौटने की आस जगाने के लिए तुम्ही बताओ यार योग्यता और…

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जन-जागरण “कलियुग में भगवानों का जुलुस”

“कलियुग में भगवानों का जुलुस”

कलियुग में एक बार सभी भगवानों का जुलुस निकला। भगवानों के जुलुस में उनके साथ उनके श्रदालु, सेवक अपने अपने इष्ट देव के गुण गान…

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समाज यकीं मानिए-  दुनिया में सिर्फ दो-कौम हैं !

यकीं मानिए- दुनिया में सिर्फ दो-कौम हैं !

दुनिया में सिर्फ 2 कौम हैं ! अमीर-गरीब ! गर हिन्दुस्तान की बात करें तो टाटा-बिड़ला और अम्बानी-अडानी जैसों की अलग कौम और खून पसीने…

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