प्रवक्ता न्यूज़ बस यूं ही दिल से…

बस यूं ही दिल से…

-लक्ष्मी जायसवाल- कुछ अनजाने से ख्वाब अब इन आंखों में बसने लगे हैं। किसके अरमान हैं ये जो अब मेरे दिल में पलने लगे हैं।।…

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प्रवक्ता न्यूज़ दुआ है कि ये जीवन सहल हो जाए सबके लिए

दुआ है कि ये जीवन सहल हो जाए सबके लिए

-जावेद उस्मानी- ख्वाबों के तिजारती आज पीरे शाह तख्त है देखेंगे तमाशा अभी तो हम सदाए बेवक्त है अंदाजे बागवां वही, रिवाजे गुलसितां वही गर्दिशे…

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प्रवक्ता न्यूज़ “वर्धा हिन्दी शब्दकोश के बहाने से हिन्दी के विकास के संबंध में विचार”

“वर्धा हिन्दी शब्दकोश के बहाने से हिन्दी के विकास के संबंध में विचार”

-डॉ. मधुसूदन- प्रो. महावीरजी जैन का आलेख पढ़ने पर, उसी आलेख के एक बिंदू पर ही लक्ष्य़ केंद्रित कर, यह अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता हूं।…

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प्रवक्ता न्यूज़ आखिर कब बदलेगी देश की यह ‘सूरत’

आखिर कब बदलेगी देश की यह ‘सूरत’

रमेश पाण्डेय 16 मई 2014 को देश में मोदी सरकार सत्ता में आई तो बड़ा सुकून हुआ। लगता है देश के अधिकांश लोगों को ऐसा…

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प्रवक्ता न्यूज़ मोदी ने साकार किया अटल का सपना

मोदी ने साकार किया अटल का सपना

-रमेश पाण्डेय- आइएनएस विक्रमादित्य को राष्ट्र को समर्पित हो गया। सबसे बड़े विमानवाहक पोत को राष्ट्र को समर्पित करने के दौरान नौसैनिकों को संबोधित करते…

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विविधा प्रेम क्या है तथा जीवों में प्रेम की उत्पत्ति किस तरह होती है?

प्रेम क्या है तथा जीवों में प्रेम की उत्पत्ति किस तरह होती है?

-मनमोहन कुमार आर्य- दिल्ली के एक पाठक ने हमें लिखा कि ‘हमें आपका लेख ‘विवाह और इसकी कुछ विकृतियां’ हमें बहुत अच्छा लगा। हम अपने…

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कविता रोटी मिली पसीने की

रोटी मिली पसीने की

-श्यामल सुमन- इक हिसाब है मेरी जिन्दगी सालों साल महीने की लेकिन वे दिन याद सभी जब रोटी मिली पसीने की लोग हजारों आसपास में…

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कला-संस्कृति विवाह और इसकी कुछ विकृतियां

विवाह और इसकी कुछ विकृतियां

-मनमोहन कुमार आर्य- वैदिक व्यवस्था में मनुष्य के जीवन को चार आश्रमों में समयोजित किया गया है। यह आश्रम हैं, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास…

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कविता ईंधन का बवाल‌

ईंधन का बवाल‌

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव- मुझको मिले मुसद्दीलाल, लगे सुनाने अपने हाल| बोले कल लखनऊ में था, अभी-अभी आया भोपाल| करते-करते बात तभी, आया उनमें तेज उबाल| इस…

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कला-संस्कृति फादर्स-डे : माता-पिता को अपने नहीं, उन्हीं के नजरिये से समझें

फादर्स-डे : माता-पिता को अपने नहीं, उन्हीं के नजरिये से समझें

-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’- 15 जून को आधुनिक पीढ़ी का फादर्स-डे अर्थात् पितृ दिवस है। बहुत सारी दुकानें पिताओं को दिये जाने वाले रंग-बिरंगे सुन्दर…

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विविधा मेरे सपनों का बिहार, मेरे अपनों का बिहार

मेरे सपनों का बिहार, मेरे अपनों का बिहार

-फख़रे आलम- मैंने कभी भी बिहार को इतना खुशहाल, सम्पन्न नहीं देखा, जितना प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास बिहार को आर्थिक प्रशासनिक और संस्कृति रूप से…

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विविधा भावुकता के क्षण… सत्य क्या है ?

भावुकता के क्षण… सत्य क्या है ?

-बीएन गोयल- एक छोर – 26 मई 2014 को मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद विशिष्ठ अतिथियों को जलपान आदि के लिए राष्ट्रपति…

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