राजनीति आडवाणी बनाम मोदी

आडवाणी बनाम मोदी

2009 में एन.डी.ए. की ओर से प्रधानमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी, लगता है 2014 में भी अपनी प्रधानमंत्री पद की दावेदारी छोड़ने को…

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कविता मंदिर जाता भेड़िया

मंदिर जाता भेड़िया

शेर पूछता आजकल, दिया कौन यह घाव। लगता है वन में सुमन, होगा पुनः चुनाव।। गलबाँही अब देखिये, साँप नेवले बीच। गद्दी पाने को सुमन,…

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व्यंग्य शहर में लगे ‘कर्फ्यू’ की वजह…?

शहर में लगे ‘कर्फ्यू’ की वजह…?

शहर में ‘कर्फ्यू’ लग ही गया। ‘कर्फ्यू’ की अवधि में शहरवासियों का साँस लेना दूभर हो गया था। बूटो की खट खटाहट से शहर के…

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समाज माओवादी करतूत से उठते सवाल

माओवादी करतूत से उठते सवाल

मो. इफ्तेखार अहमद, छत्तीसगढ़ के जिरम घाटी से गुजरते हुए कांग्रेस पार्टी के काफिले पर 25 मई को हुए माओवादी हमले ने माओवादियों के सिद्धांतों…

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चुनाव कांग्रेस का प्रतिष्ठा का प्रश्न तो भाजपा का अनमनापन : मंडी उपचुनाव

कांग्रेस का प्रतिष्ठा का प्रश्न तो भाजपा का अनमनापन : मंडी उपचुनाव

विनायक शर्मा हिमाचल में मंडी संसदीय क्षेत्र से सांसद के रूप में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट के लिए उपचुनाव…

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विविधा देश में बढते  अपराध, बेलगाम होते अपराधी, जिम्मेवार कौन  ?

देश में बढते अपराध, बेलगाम होते अपराधी, जिम्मेवार कौन ?

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अपराधों का काला साया फैलता जा रहा है यह बहुत ही घातक व अशुभ संकेत है। विश्वगुरु के नाम से…

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कविता सोना हो चाहत अगर

सोना हो चाहत अगर

सोना हो चाहत अगर, सोना हुआ मुहाल। दोनो सोना कब मिले, पूछे सुमन सवाल।। खर्च करोगे कुछ सुमन, घटे सदा परिमाण। ज्ञान, प्रेम बढ़ते सदा,…

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व्यंग्य थानेदार ढिल-ढिल पाण्डेय का अपना स्टाइल

थानेदार ढिल-ढिल पाण्डेय का अपना स्टाइल

पुरानी बात है जिले के एक थाना क्षेत्र में चोरियों की बाढ़ आ गई थी। जिससे आम आदमी की नींद हराम हो गई थी। जिले…

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व्यंग्य सांप और सीढ़ी

सांप और सीढ़ी

परसों शर्मा जी के घर गया था। वहां उनसे गपशप का सुख तो मिलता ही है, कभी-कभी शर्मा मैडम के हाथ की गरम चाय भी…

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कविता सन्नाटा

सन्नाटा

कभी कभी एक सन्नाटा, छा जाता है,  भीतर ही भीतर, तब कोई आहट , कोई आवाज़, बेमानी सी हो जाती है। इस सन्नाटे से डरती…

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कविता छोटी- सी आशा

छोटी- सी आशा

जानता नहीं है कहाँ है उसका मुकाम । वह तो लगा रहता है बनाने में एक के बाद दूसरा बहुमंजिला  मकान । छोटे-से गाँव का…

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चिंतन पर्यावरण रक्षा सर्वोपरि फर्ज प्रकृति नहीं तो सब है बेकार

पर्यावरण रक्षा सर्वोपरि फर्ज प्रकृति नहीं तो सब है बेकार

हमारे पास सब कुछ है लेकिन पर्यावरणीय सौन्दर्य नहीं है तो सारे संसाधन, भौतिक संपदा और जीवन व्यवहार सब निरर्थक है। प्रकृति के खुले आँगन…

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