बच्चों का पन्ना चूहों की चतुराई

चूहों की चतुराई

देखे जब दो दर्जन चूहे, कंडेक्टर घबराया| सारे थे बस में सवार, पर टिकिट एक कटवाया|   बोला दो दर्जन हो तुम सब, सबको टिकिट…

Read more
कला-संस्कृति कुम्भ पर्व का आगाज, मध्य रात्रि के बाद शुरू हुआ मकर संक्रान्ति का स्नान

कुम्भ पर्व का आगाज, मध्य रात्रि के बाद शुरू हुआ मकर संक्रान्ति का स्नान

अवनीश सिंह माघ मकरगत रवि जब होइ, तीरथ पतिहिः आव सब कोइ। सोमवार को मध्य रात्रि के बाद तीर्थराज प्रयाग में पवित्र संगम के किनारे…

Read more
व्यंग्य गुड बाय! टेक केयर!!

गुड बाय! टेक केयर!!

सुबह सुबह फिटनेस के बहाने सरोजनी नगर की पटड़ी पर ताक झांक करने निकला था कि डिपो के पास के मंदिर के बाहर समान बांधे…

Read more
पर्व - त्यौहार सामाजिक उल्लास का पर्व पोंगल

सामाजिक उल्लास का पर्व पोंगल

लोक, परिवेश और प्रकृति भी नहाती है उत्सवी धाराओं में अनिता महेचा उत्सव प्रियाः मानवाः यानि मानव उत्सव प्रिय होते हैं। महाकवि कालिदास का यह…

Read more
राजनीति भूतपूर्व लौहपुरुष के तेवर हो गए लाल

भूतपूर्व लौहपुरुष के तेवर हो गए लाल

निरंजन परिहार बीजेपी में हड़कंप है। लालकृष्ण आडवाणी अड़ गए हैं। नितिन गड़करी नहीं चलेंगे। संघ परिवार बहुत कोशिश कर रहा है। कोशिश यह कि…

Read more
कविता वियोग –  विजय निकोर

वियोग – विजय निकोर

सोचता हूँ, चबूतरे पर बैठी अभी भी क्रोशिए से तुम कोई नाम बुनती हो क्या ? ….इसका मतलब ?   तो, “क्या” नाम बुनती होगी…

Read more
टॉप स्टोरी ‘भागवत पुराण’: निगाहें कहीं पर, निशाना कहीं

‘भागवत पुराण’: निगाहें कहीं पर, निशाना कहीं

तनवीर जाफ़री राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने महिलाओं के साथ होने वाले दुराचार व बलात्कार के परिपेक्ष्य में पिछले दिनों अपनी यह…

Read more
आलोचना हिन्दी के मार्क्सवादी आलोचक औैर बुद्धिजीवी

हिन्दी के मार्क्सवादी आलोचक औैर बुद्धिजीवी

पाण्डेय शशिभूषण ‘शीतांशु’  हिन्दी में मार्क्सवादी आलोचकों ने पिछले पचास वर्षों में साहित्य की भावनक्षमता और पाठकीय संवेदनशीलता को कुंठित-अवरोधित ही किया है। इन सब…

Read more
व्यंग्य पुस्तक लोकार्पण संस्कार

पुस्तक लोकार्पण संस्कार

पंडित सुरेश नीरव किताब से जिसका इतना-सा भी संबंध हो जितना कि एक बच्चे का चूसनी से तो वह समझदार व्यक्ति पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम…

Read more
व्यंग्य कैंडील मार्च करा लो…

कैंडील मार्च करा लो…

पंडित सुरेश नीरव कभी रहा होगा भारत कृषि प्रधान देश। इक्सवींसदी में तो यह बाकायदा विश्व का टॉप मोमबत्ती प्रधान देश बन चुका है। जो…

Read more
मीडिया उपेक्षित है ग्रामीण पत्रकारिता

उपेक्षित है ग्रामीण पत्रकारिता

डॉ. आशीष वशिष्ठ ग्रामीण परिवेश तथा ग्रामीण जन के प्रति भारतीय जनमानस में गहरी संवेदनाएं हैं. प्रेमचंद, रेणु, शरतचंद्र, नागार्जुन जैसे मूर्धन्य साहित्यकारों ने ग्रामीण…

Read more
आर्थिकी मंहगा हुआ रेल सफर का विरोध क्यों ?

मंहगा हुआ रेल सफर का विरोध क्यों ?

रवि शंकर नए वित्तीय साल से पहले केंद्र सरकार ने आम आदमी को मंहगाई का एक और झटका दिया है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के…

Read more