कविता सच बतलाना

सच बतलाना

नहीं कहानी भूतों वाली कहना अम्मा, ना ही परियों वाला कोई गीत सुनाना| क्या सचमुच ही चंदा पर रहती है बुढ़िया, इस बारे में मुझको…

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बच्चों का पन्ना कड़क ठंड है

कड़क ठंड है

कितनी ज्यादा कड़क ठंड है करते सी-सी पापा, दादा कहते शीत लहर है कैसे कटे बुढ़ापा।   बरफ पड़ेगी मम्मी कहतीं ओढ़ रजाई सोओ, किसी…

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कविता चाहत-ऋषभ कुमार

चाहत-ऋषभ कुमार

भूमिका: कविता “चाहत” के माध्यम से पाठक का ध्यान उसकी अपनी “चाहत” (जीवन का लक्ष्य) की और आकर्षित करने का प्रयास किया गया है, जिसके…

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राजनीति पाकिस्तान : सेना की वर्दी में आतंकवादी

पाकिस्तान : सेना की वर्दी में आतंकवादी

प्रमोद भार्गव पाकिस्तानी फौजियों द्वारा भारतीय सीमा में घुसकर दो सैनिकों की हत्या स्तब्ध कर देने वाली घटना है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के…

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कविता अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना होगा ….!!

अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना होगा ….!!

{शहीदों को समर्पित – हितेश शुक्ल } रोज रोज का झंझट अब यह ख़त्म हमे करना होगा ! अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना…

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चिंतन ऊँचाइयां पाने की तमन्ना हो तो, अपने संस्कारों से नीचे न गिरें

ऊँचाइयां पाने की तमन्ना हो तो, अपने संस्कारों से नीचे न गिरें

डॉ. दीपक आचार्य जीवन के निर्माण में संस्कारों और आदर्शों का जितना महत्त्व है उतना और किसी का नहीं। अपनी आनुवंशिक परंपरा और पूर्वजों से…

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शख्सियत Default Post Thumbnail

हिंदुत्व के, एक योद्धा का महाप्रयाण|

  हिंदुत्व के, एक योद्धा का महाप्रयाण| —गौरांग वैष्णव जैसे जैसे विष्णुभाई पटेल जी के महाप्रयाण का समाचार मेरी अंतश्चेतना में उतरते गया, सोच में…

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गजल Default Post Thumbnail

जां देने लेने से शहादत नहीं मिलती….

इक़बाल हिंदुस्तानी फ़िर्क़ो का जाल सिर्फ़ ज़माने में रह गया, इंसान अब असल में फ़साने में रह गया।   बेचे उसूल लोगों ने दौलत कमा…

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इंसां हो दरिंदों को ना फिर मात दीजिये….

इक़बाल हिंदुस्तानी आया है नया साल नई बात कीजिये, फिर जिं़दगी की नई शुरूआत कीजिये।   ग़म की सियाह रातों से बाहर तो आइये, खु़शियों…

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आंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं….

इक़बाल हिंदुस्तानी कैसे वतन जला उन्हें आता नज़र कहीं, आंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं।   ज़ालिम है कौन हमको भी यह खूब…

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बच्चों का पन्ना आसमान में छेद कराते दादाजी

आसमान में छेद कराते दादाजी

कड़क चाय मुझको पिलवाते दादाजी| काजू या बादाम खिलाते दादाजी|   थाली में भर भर कर चंदा की किरणे, मुझे चांदनी में नहलाते दादाजी|  …

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बच्चों का पन्ना दादी बोली

दादी बोली

जितनी ज्यादा बूढ़ी दादी, दादा उससे ज्यादा| दादी कहती ‘मैं’ शहजादी, और दादा शह्जादा| दादी का यह गणित, नातियों पोतों को न भाता| बूढ़े लोगों…

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