सच बतलाना
Updated: January 16, 2013
नहीं कहानी भूतों वाली कहना अम्मा, ना ही परियों वाला कोई गीत सुनाना| क्या सचमुच ही चंदा पर रहती है बुढ़िया, इस बारे में मुझको…
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कड़क ठंड है
Updated: January 16, 2013
कितनी ज्यादा कड़क ठंड है करते सी-सी पापा, दादा कहते शीत लहर है कैसे कटे बुढ़ापा। बरफ पड़ेगी मम्मी कहतीं ओढ़ रजाई सोओ, किसी…
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चाहत-ऋषभ कुमार
Updated: March 5, 2013
भूमिका: कविता “चाहत” के माध्यम से पाठक का ध्यान उसकी अपनी “चाहत” (जीवन का लक्ष्य) की और आकर्षित करने का प्रयास किया गया है, जिसके…
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पाकिस्तान : सेना की वर्दी में आतंकवादी
Updated: January 16, 2013
प्रमोद भार्गव पाकिस्तानी फौजियों द्वारा भारतीय सीमा में घुसकर दो सैनिकों की हत्या स्तब्ध कर देने वाली घटना है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के…
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अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना होगा ….!!
Updated: January 16, 2013
{शहीदों को समर्पित – हितेश शुक्ल } रोज रोज का झंझट अब यह ख़त्म हमे करना होगा ! अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना…
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ऊँचाइयां पाने की तमन्ना हो तो, अपने संस्कारों से नीचे न गिरें
Updated: January 15, 2013
डॉ. दीपक आचार्य जीवन के निर्माण में संस्कारों और आदर्शों का जितना महत्त्व है उतना और किसी का नहीं। अपनी आनुवंशिक परंपरा और पूर्वजों से…
Read moreहिंदुत्व के, एक योद्धा का महाप्रयाण|
Updated: September 25, 2018
हिंदुत्व के, एक योद्धा का महाप्रयाण| —गौरांग वैष्णव जैसे जैसे विष्णुभाई पटेल जी के महाप्रयाण का समाचार मेरी अंतश्चेतना में उतरते गया, सोच में…
Read moreजां देने लेने से शहादत नहीं मिलती….
Updated: January 15, 2013
इक़बाल हिंदुस्तानी फ़िर्क़ो का जाल सिर्फ़ ज़माने में रह गया, इंसान अब असल में फ़साने में रह गया। बेचे उसूल लोगों ने दौलत कमा…
Read moreइंसां हो दरिंदों को ना फिर मात दीजिये….
Updated: January 15, 2013
इक़बाल हिंदुस्तानी आया है नया साल नई बात कीजिये, फिर जिं़दगी की नई शुरूआत कीजिये। ग़म की सियाह रातों से बाहर तो आइये, खु़शियों…
Read moreआंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं….
Updated: January 15, 2013
इक़बाल हिंदुस्तानी कैसे वतन जला उन्हें आता नज़र कहीं, आंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं। ज़ालिम है कौन हमको भी यह खूब…
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आसमान में छेद कराते दादाजी
Updated: January 15, 2013
कड़क चाय मुझको पिलवाते दादाजी| काजू या बादाम खिलाते दादाजी| थाली में भर भर कर चंदा की किरणे, मुझे चांदनी में नहलाते दादाजी| …
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दादी बोली
Updated: January 15, 2013
जितनी ज्यादा बूढ़ी दादी, दादा उससे ज्यादा| दादी कहती ‘मैं’ शहजादी, और दादा शह्जादा| दादी का यह गणित, नातियों पोतों को न भाता| बूढ़े लोगों…
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