भूतपूर्व लौहपुरुष के तेवर हो गए लाल
Updated: January 14, 2013
निरंजन परिहार बीजेपी में हड़कंप है। लालकृष्ण आडवाणी अड़ गए हैं। नितिन गड़करी नहीं चलेंगे। संघ परिवार बहुत कोशिश कर रहा है। कोशिश यह कि…
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वियोग – विजय निकोर
Updated: January 13, 2013
सोचता हूँ, चबूतरे पर बैठी अभी भी क्रोशिए से तुम कोई नाम बुनती हो क्या ? ….इसका मतलब ? तो, “क्या” नाम बुनती होगी…
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‘भागवत पुराण’: निगाहें कहीं पर, निशाना कहीं
Updated: January 13, 2013
तनवीर जाफ़री राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने महिलाओं के साथ होने वाले दुराचार व बलात्कार के परिपेक्ष्य में पिछले दिनों अपनी यह…
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हिन्दी के मार्क्सवादी आलोचक औैर बुद्धिजीवी
Updated: January 13, 2013
पाण्डेय शशिभूषण ‘शीतांशु’ हिन्दी में मार्क्सवादी आलोचकों ने पिछले पचास वर्षों में साहित्य की भावनक्षमता और पाठकीय संवेदनशीलता को कुंठित-अवरोधित ही किया है। इन सब…
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पुस्तक लोकार्पण संस्कार
Updated: January 13, 2013
पंडित सुरेश नीरव किताब से जिसका इतना-सा भी संबंध हो जितना कि एक बच्चे का चूसनी से तो वह समझदार व्यक्ति पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम…
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कैंडील मार्च करा लो…
Updated: January 13, 2013
पंडित सुरेश नीरव कभी रहा होगा भारत कृषि प्रधान देश। इक्सवींसदी में तो यह बाकायदा विश्व का टॉप मोमबत्ती प्रधान देश बन चुका है। जो…
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उपेक्षित है ग्रामीण पत्रकारिता
Updated: January 13, 2013
डॉ. आशीष वशिष्ठ ग्रामीण परिवेश तथा ग्रामीण जन के प्रति भारतीय जनमानस में गहरी संवेदनाएं हैं. प्रेमचंद, रेणु, शरतचंद्र, नागार्जुन जैसे मूर्धन्य साहित्यकारों ने ग्रामीण…
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मंहगा हुआ रेल सफर का विरोध क्यों ?
Updated: January 16, 2013
रवि शंकर नए वित्तीय साल से पहले केंद्र सरकार ने आम आदमी को मंहगाई का एक और झटका दिया है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के…
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भाजपा के आगे भविष्य की चुनौतियाँ — डा कुलदीप चंद अग्निहोत्री
Updated: January 13, 2013
सोनिया कांग्रेस ने देश की सत्ता संभालने के लिये यू पी ए के नाम से जो ताना बाना बुना था वह धीरे धीरे बिखरने लगा…
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सियासी अस्थिरता की भंवर में झारखंड
Updated: January 13, 2013
हिमकर श्याम झारखंड एक बार फिर सियासी अस्थिरता के भंवर में फंसा हुआ हुआ है। अर्जुन मुंडा सरकार से झामुमो के समर्थन वापसी के बाद…
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मर्दवादी महिषासुर और स्त्रीवादी दुर्गा – सारदा बनर्जी
Updated: January 12, 2013
लोग स्त्री पर जब भी बात करते हैं तो उसे मां, बहन, बीवी, चाची, बुआ, ताई के नज़रिए से देखने पर ज़ोर देते रहते हैं।…
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कठोर कानून तो चाहिए ही, लेकिन संस्कार व्यवस्था भी हो- मा. गो. वैद्य
Updated: January 12, 2013
१६ दिसंबर को, राजधानी दिल्ली में चलती बस में एक २३ वर्षीय युवती पर पशु को भी शर्मिंदा करने वाला राक्षसी लैंगिक अत्याचार मानव देहधारी…
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