कविता अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना होगा ….!!

अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना होगा ….!!

{शहीदों को समर्पित – हितेश शुक्ल } रोज रोज का झंझट अब यह ख़त्म हमे करना होगा ! अबकी बार सिंहासन को ठोस फैसला करना…

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चिंतन ऊँचाइयां पाने की तमन्ना हो तो, अपने संस्कारों से नीचे न गिरें

ऊँचाइयां पाने की तमन्ना हो तो, अपने संस्कारों से नीचे न गिरें

डॉ. दीपक आचार्य जीवन के निर्माण में संस्कारों और आदर्शों का जितना महत्त्व है उतना और किसी का नहीं। अपनी आनुवंशिक परंपरा और पूर्वजों से…

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हिंदुत्व के, एक योद्धा का महाप्रयाण|

  हिंदुत्व के, एक योद्धा का महाप्रयाण| —गौरांग वैष्णव जैसे जैसे विष्णुभाई पटेल जी के महाप्रयाण का समाचार मेरी अंतश्चेतना में उतरते गया, सोच में…

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जां देने लेने से शहादत नहीं मिलती….

इक़बाल हिंदुस्तानी फ़िर्क़ो का जाल सिर्फ़ ज़माने में रह गया, इंसान अब असल में फ़साने में रह गया।   बेचे उसूल लोगों ने दौलत कमा…

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इंसां हो दरिंदों को ना फिर मात दीजिये….

इक़बाल हिंदुस्तानी आया है नया साल नई बात कीजिये, फिर जिं़दगी की नई शुरूआत कीजिये।   ग़म की सियाह रातों से बाहर तो आइये, खु़शियों…

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आंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं….

इक़बाल हिंदुस्तानी कैसे वतन जला उन्हें आता नज़र कहीं, आंखें तो उनके पास हैं लेकिन नज़र नहीं।   ज़ालिम है कौन हमको भी यह खूब…

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बच्चों का पन्ना आसमान में छेद कराते दादाजी

आसमान में छेद कराते दादाजी

कड़क चाय मुझको पिलवाते दादाजी| काजू या बादाम खिलाते दादाजी|   थाली में भर भर कर चंदा की किरणे, मुझे चांदनी में नहलाते दादाजी|  …

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बच्चों का पन्ना दादी बोली

दादी बोली

जितनी ज्यादा बूढ़ी दादी, दादा उससे ज्यादा| दादी कहती ‘मैं’ शहजादी, और दादा शह्जादा| दादी का यह गणित, नातियों पोतों को न भाता| बूढ़े लोगों…

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बच्चों का पन्ना चूहों की चतुराई

चूहों की चतुराई

देखे जब दो दर्जन चूहे, कंडेक्टर घबराया| सारे थे बस में सवार, पर टिकिट एक कटवाया|   बोला दो दर्जन हो तुम सब, सबको टिकिट…

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कला-संस्कृति कुम्भ पर्व का आगाज, मध्य रात्रि के बाद शुरू हुआ मकर संक्रान्ति का स्नान

कुम्भ पर्व का आगाज, मध्य रात्रि के बाद शुरू हुआ मकर संक्रान्ति का स्नान

अवनीश सिंह माघ मकरगत रवि जब होइ, तीरथ पतिहिः आव सब कोइ। सोमवार को मध्य रात्रि के बाद तीर्थराज प्रयाग में पवित्र संगम के किनारे…

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व्यंग्य गुड बाय! टेक केयर!!

गुड बाय! टेक केयर!!

सुबह सुबह फिटनेस के बहाने सरोजनी नगर की पटड़ी पर ताक झांक करने निकला था कि डिपो के पास के मंदिर के बाहर समान बांधे…

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पर्व - त्यौहार सामाजिक उल्लास का पर्व पोंगल

सामाजिक उल्लास का पर्व पोंगल

लोक, परिवेश और प्रकृति भी नहाती है उत्सवी धाराओं में अनिता महेचा उत्सव प्रियाः मानवाः यानि मानव उत्सव प्रिय होते हैं। महाकवि कालिदास का यह…

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